19 नवंबर को जिले भर में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व बड़ी ही धूमधाम से मनाया गया इस अवसर पर शहर के वैनगंगा नदी के विभिन्न घाटों में श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से देखी गई इस दौरान शंकर घाट पहुंचे श्रद्धालुओं द्वारा घाट में पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की परेशानी बताई गई।
शंकर घाट स्थित मंदिर के पुजारी ने बताया कि भगवान शंकर ने त्रिपुरा नामक एक असुर का वध किया था जिसके कारण सभी देवी देवताओं ने उनका वंदन किया और देव द्वारा दीपावली मनाई गई इसलिए इसको देव दीपावली भी कहते हैं। इसे गंगा स्नान पूर्णिमा तथा त्रिपुरी पूर्णिमा भी कहा जाता है ।
वहीं पर बाहर से आए हुए श्रद्धालुओं से शंकर घाट की सुरक्षा और व्यवस्था को और अधिक पर्याप्त करने की मांग की। शंकर घाट में महिला और पुरुष के स्नान के लिए व्यवस्था नहीं होना स्नान के बाद कपड़े बदलने से लेकर भोजन पकाने के लिए सेट की कमी खल रही है हालांकि स्थानीय जन जानते हैं कि स्थान वन विभाग के अधीन है इसलिए मांग करते हैं कि वन विभाग की अनुमति के बाद ही कार्य किए जाएं।
शंकर घाट में नीचे उतरने की व्यवस्था नहीं है ।महिलाओं के लिए शौचालय तथा पीने के पानी की उपयुक्त रूप से व्यवस्था होनी चाहिए इसके साथ ही बच्चों के खेलने की व्यवस्था नहीं है इसलिए यह शासन से अपील है कि आगामी शिवरात्रि महोत्सव तक जनता के लिए यह सारी व्यवस्थाएं की जाए ।
इसी तरह को श्रद्धालुओं का मानना है कि साफ-सफाई के साथ ही पर्याप्त पानी की व्यवस्था और कुछ जरूरी व्यवस्था कर दी जाए तो शहर में यह सबसे अच्छा पिकनिक स्पॉट बन जाएगा।










































