वारासिवनी(पद्मेश न्यूज)। वारासिवनी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम झालीवाड़ा और खापा ग्राम के ग्रामीणों के द्वारा अनुविभागीय दंडाधिकारी वारासिवनी के नाम का ज्ञापन तहसीलदार को सौंपा है। ज्ञापन में पुलिस थाना वारासिवनी द्वारा अपराध क्रंमाक ३४७/२०२५ में संलिप्त अन्य व्यक्ति जिनमें भूमि के विक्रय से लेकर नामांतरण कार्यवाही जिनमें हल्का पटवारी ,उपपंजीयक वारासिवनी, तहसीलदार वारासिवनी और सेवा प्रदाता रजिस्ट्री की फर्जी रजिस्ट्री मामले में जांच कर कार्यवाही करने की मांग की गई। वहीं मामले में आक्रोश व्यक्त किया गया कि उक्त शासकीय अधिकारी व संबंधित व्यक्तियों के बिना सहयोग से यह संभव नहीं है। वहीं पुलिस प्रशासन पर ग्रामीणो ने जनता पर कार्यवाही करने और शासकीय अमले को सुरक्षित करने का आरोप भी लगाया गया।
सभी लोग दोषी है जिनके द्वारा पारदर्शिता का उपयोग ना कर षंडयत्र पूर्वक कार्य किया
ज्ञापन में उल्लेखित है कि पुलिस थाना वारासिवनी अपराध क्रमांक ३४७/२०२५ जो कि धारा ४१९,४२०,४६७,४६८,४७१,१२० बी भादवि के तहत पंजीबद्ध किया गया है। जिसमें मनोज मेश्राम, विकास गौतम एवं ममता उर्फ सुनीता, कमला बाई, स्वरूपचंद टेंभरे को अभियुक्त बनाये है। जिसमें उपरोक्त सम्पूर्ण रजिस्ट्री की कार्यवाही से लेकर नामांतरण की कार्यवाही तक अन्य लोग भी शामिल है। जिनमें केवल पांच लोगो के विरूद्ध ही कार्यवाही कि गई है जबकि हल्का पटवारी के द्वारा मौके पर जाकर भुमि मापकर ब्रिकी नक्शा बनाया गया है। उस ब्रिकी नक्शा के आधार पर सेवा प्रदाता रजिस्ट्री वारासिवनी के द्वारा स्लाटिंग की गई थी। तत्पश्चात उपपंजीयक वारासिवनी के समक्ष के्रता ,विक्रेता एवं गवाह के हस्ताक्षर अंकित करवाये गये थे । तत्पश्चात रजिस्ट्री के उपरांत नामांतरण की कार्यवाही तहसीलदार वारासिवनी के समक्ष करवाई गई। जिसमें के्रता एवं विके्रता के शपथ पत्र जो कि नोटरी वारासिवनी द्वारा पास किये गये है तथा तहसीलदार वारासिवनी के द्वारा नामांतरण का आदेश दिया गया है। जिसमें सभी लोग दोषी है जिनके द्वारा पारदर्शिता का उपयोग ना कर षंडयत्र पूर्वक कार्य किया गया है। जिसमें उपरोक्त वर्णित व्यक्ति भी दोषी हैं जिन्हे पुलिस थाना वारासिवनी के द्वारा छोड दिया गया है। पुलिस थाना वारासिवनी के द्वारा मात्र गांव के सिधे साधे लोगो को आरोपी बनाया गया है तथा उपरोक्त वर्णित लोगो को प्रकरण में छोड दिया गया है। हमारी मांग है कि यदि कार्यवाही कि जा रही है तो सभी के विरूद्ध की जायें अन्यथा पंजीबद्ध अपराध को निरस्त किया जायें। इस अवसर पर ग्रामीण जन मौजूद रहे।
पुलिस प्रशासन ने छोटे मगरमच्छ को पडक़र बड़े मगरमच्छ को छोड़ दिया- मनोज टेंभरे
ग्रामीण मनोज टेंभरे ने बताया कि अभी फर्जी रजिस्ट्री का सनसनीखेज मामला सामने आया उसमें पुलिस प्रशासन का कहना है कि फर्जी लोग खड़े होकर फर्जी तरीके से दस्तावेज बनाकर बिना सत्यापन रजिस्ट्री की गई है। इसमें जो पांच आरोपी जेल गए हैं वह किसान है उन्होंने फर्जी किया है किंतु इस प्रक्रिया को करने में पटवारी ,स्टांप होल्डर, रजिस्ट्रार, तहसीलदार इन पर कार्यवाही और जांच क्यों नहीं की गई। यह पूरे मामले का सत्यापन करते हैं पटवारी क्रेता और विके्रता का खसरा नक्शा निकालकर पहचान करता है। तहसीलदार पेशी लेता है रजिस्ट्रार दस्तावेज देखकर सभी की पहचान करता है। पुलिस ने पांच लोगों पर कार्यवाही की है शासकीय अमला खुला घूम रहा है। शिकायतकर्ता सामने आया तो मामला उछला शिकायत नहीं होती तो रजिस्ट्री हो गई थी। इसमें तहसीलदार ,पटवारी ,सेवा प्रदाता ,रजिस्ट्रार शक के दायरे में है इन संबंधित अधिकारी पर कार्यवाही हो इनके संलग्न हुए बिना रजिस्ट्री संभव नही है। हम यही चाहते हैं कि इन्हें भी आरोपी बनाया जाए या जो आरोपी बने हैं उन्हें छोड़ दिया जाए मामले की निष्पक्ष जांच हो। इसमें कहीं ना कहीं अधिकारी मिले हुए हैं कुल मिलाकर पुलिस प्रशासन ने छोटे मगरमच्छ को पडक़र बड़े मगरमच्छ को छोड़ दिया है।










































