आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक विनोद कुमार का निधन, ‘गांधी’ उपनाम से थे मशहूर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिया कंधा

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Vinod Kumar RSS: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और अखिल भारतीय कार्यकारिणी के आमंत्रित सदस्य विनोद कुमार का उज्जैन में 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उनकी अंतिम इच्छा महाकाल की शरण में रहने की थी।उज्जैन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ प्रचारक और संगठन के विभिन्न महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर चुके विनोद कुमार का मंगलवार को उज्जैन के आराधना कार्यालय में 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे, लेकिन उनकी गहरी आस्था भगवान महाकाल के प्रति थी और वे अपना अंतिम समय महाकाल की शरण में ही बिताना चाहते थे।

उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीधे उज्जैन स्थित आराधना भवन पहुंचे और दिवंगत विनोद कुमार के पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद अर्थी को कंधा दिया और उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें नम आंखों से विदाई दी।शैया दान और वसीयत की अनूठी मिसाल

संघ के प्रति उनका समर्पण किस हद तक था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्ष प्रयागराज महाकुंभ के दौरान उन्होंने अपना शैया दान कर दिया था। उसी समय उन्होंने एक वसीयत भी लिखी थी, जिसमें स्पष्ट इच्छा जताई थी कि उनका शरीर जिस भी स्थान पर पूरा हो, वहीं उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उनकी इसी इच्छा के अनुरूप बुधवार की सुबह उज्जैन के चक्रतीर्थ पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

संघ कार्य में समर्पित रहा पूरा जीवन

विनोद कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी में आमंत्रित सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इससे पहले वे मध्य क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक और अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख सहित संगठन के कई बड़े और अहम पदों पर रहे। उनके पारिवारिक पृष्ठभूमि और दिनचर्या के बारे में उनके चाचा वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वे लंबे समय से बीमार थे, फिर भी उनकी दिनचर्या बेहद अनुशासित थी। उज्जैन में निवास के दौरान उनकी सुबह तड़के चार बजे महाकाल के दर्शन और नामजप के साथ शुरू होती थी।कौन थे विनोद कुमार?

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के बामनौली गांव में काशीराम और शकुंतला देवी के घर जन्मे विनोद कुमार का बचपन मेरठ के इंद्रा नगर में बीता था। परिवार और सगे-संबंधियों के बीच उन्हें स्नेह से ‘गांधी’ कहकर पुकारा जाता था।

मोदीनगर से अपनी शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की और फिर अपना पूरा जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यों के लिए समर्पित कर दिया। एक प्रचारक के रूप में उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी, उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद समेत देश के विभिन्न अंचलों में संगठन को मजबूत करने के लिए निष्ठापूर्वक कार्य किया। उनका जाना संघ परिवार और वैचारिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

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