खरगोन के शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा प्राध्यापकों से शासकीय स्कूलों के लिए टेबल-बेंच खरीदने हेतु ‘सहायता राशि’ मांगने का नोटिस मंगलवार को वायरल होने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया। मामला तूल पकड़ने पर कलेक्टर के निर्देश पर नोटिस वापस ले लिया गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि योगदान पूरी तरह स्वैच्छिक था।खरगोन: जिले में शासकीय स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा जारी एक नोटिस मंगलवार को विवाद का कारण बन गया। नोटिस में जिले के महाविद्यालयों के प्राध्यापकों और सहायक प्राध्यापकों से शासकीय प्राथमिक विद्यालयों के लिए टेबल-बेंच खरीदने हेतु सहायता राशि देने की अपेक्षा की गई थी। नोटिस सोशल मीडिया समूहों में प्रदेश भर में वायरल हुआ, जिसके बाद कलेक्टर ने इसे वापस लेने के निर्देश दिये।
फैकल्टी से मांगा सहयोग
मंगलवार को सोशल मीडिया समूहों में तेजी से वायरल हुए इस नोटिस को खरगोन पीजी कॉलेज के प्राचार्य जी.एस. चौहान द्वारा जारी किया गया था। इसमें जिला कलेक्टर के निर्देश का हवाला देते हुए बताया गया था कि महाविद्यालय को शासकीय प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की बेहतर बैठक व्यवस्था के लिए 200 टेबल-बेंच उपलब्ध कराने हैं। पत्र में एक जोड़ी टेबल-बेंच की कीमत 1,200 रुपये बताई गई थी और तमाम फैकल्टी सदस्यों से इसके लिए आर्थिक सहयोग मांगा गया था।सेवा-वर्ष के आधार पर तय किया गया था योगदान
विवादित नोटिस की सबसे खास और चर्चा का विषय बनी बात यह थी कि इसमें प्राध्यापकों के सेवा-वर्ष के आधार पर चंदे का कोटा तय किया गया था। निर्देश के अनुसार:
- 2005 बैच से पूर्व के फैकल्टी सदस्यों को पांच टेबल-बेंच के बराबर राशि देनी थी।
- 2005 बैच के सदस्यों को तीन टेबल-बेंच की राशि चुकानी थी।
- 2019 बैच के सदस्यों को दो और 2022 बैच के नए सदस्यों को एक टेबल-बेंच के बराबर राशि संबंधित विभागाध्यक्ष के पास जमा करने के निर्देश दिए गए थे।
प्राचार्य ने स्वीकार की गलती, कलेक्टर ने दी सफाई
मामला गर्माने के बाद प्राचार्य डॉ. जी.एस. चौहान ने मीडिया के सामने सफाई देते हुए कहा कि जिला कलेक्टर गुरु प्रसाद ने टीएल बैठक में इस तरह के सामाजिक योगदान और दान के लिए सलाह दी थी। मंगलवार को जब जिले भर के प्राचार्य खरगोन में एक बैठक के लिए जुटे, तो उन्होंने कलेक्टर की इसी मंशा से सबको अवगत कराया। इस पर वहां मौजूद प्राचार्यों ने टेबल-बेंच की संख्या और राशि के संबंध में लिखित पत्र जारी करने का सुझाव दिया, जिसके बाद उन्होंने यह नोटिस जारी कर दिया। हालांकि, डॉ. चौहान ने यह स्वीकार किया कि यह पत्र “त्रुटिपूर्ण” रूप से जारी हो गया था।दूसरी ओर, जिला कलेक्टर गुरु प्रसाद ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उन्होंने केवल जन्मदिन या वैवाहिक वर्षगांठ जैसे विशेष अवसरों पर जन-भागीदारी के तहत स्वैच्छिक अनुदान से ऐसी व्यवस्था करने का निवेदन किया था। कलेक्टर ने दो टूक कहा कि यह किसी भी स्थिति में अनिवार्य नहीं था, बल्कि पूरी तरह से जन-सहयोग और स्वैच्छिक भावना पर आधारित था। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर प्राचार्य ने उक्त विवादित नोटिस तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया और स्पष्ट किया कि प्राध्यापकों को किसी भी प्रकार की राशि जमा करने की आवश्यकता नहीं है।







































