चार दिन बाद भी कांग्रेसियों ने ली प्रेस वार्ता कहा जिला निर्वाचन अधिकारी पर होनी चाहिए कार्यवाही

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27 नवंबर से चल रहे डाक मतपत्र के विषय को लेकर अब सियासत धीरे-धीरे जिले से प्रदेश और प्रदेश से देश तक गरमाती जा रही है हर कोई इसमें अब आवेदन निवेदन कर निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है वहीं कांग्रेस भी देर से ही सही पर 30 नवंबर को 27 नवंबर के डाकपत्र वाले विषय को लेकर एक पत्रकार वार्ता लेकर पत्रकारों को संबोधित कर बताया कि किस प्रकार से अस्थाई स्ट्रांग रूम तहसील कार्यालय में 27 नवंबर को डाक मत पत्र के साथ छेड़खानी की गई और किस प्रकार से चुनाव आयोग के नियम है इन सब बातों को पत्रकार वार्ता में पत्रकार के समक्ष रखा और कहा कि जब तक जिला निर्वाचन अधिकारी को हटाया नहीं जाता और उनके स्थान पर होने वाली 3 तारीख को मतगणना के लिए निर्वाचन आयोग से कोई अधिकृत अधिकारी मतगणना में शामिल होकर निष्पक्ष मतगणना की वह मांग करते हैं क्योंकि वह जिला निर्वाचन अधिकारी की उपस्थिति में मतगणना नहीं करवाना चाहते क्योंकि उन्हें पता है कि जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा ना ही चुनाव निष्पक्ष तरीके से करवाया गया है और ना ही मतगणना निष्पक्ष तरीके से करवाई जाएगी

आपको बतादे की डाक मतपत्रों की समय से पूर्व सार्टिंग मामले में मुख्य निर्वाचन अधिकारी व कलेक्टर डा. गिरीश कुमार मिश्रा पर षडयंत्रपूर्वक डाक मतपत्रों की सार्टिंग (बंडलिंग) करने का आरोप लग रहा है। गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस के निर्देश पर छह विधानसभाओं के कांग्रेस प्रत्याशियों ने पत्रकारवार्ता लेकर इस पूरे मामले को लेकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार के नाम ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने इस पूरे मामले को साजिश व षडयंत्र बताते हुए भाजपा के दबाव में जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा निर्वाचन प्रक्रिया में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष संजय उइके ने कहा कि 27 नवंबर को डाक मतपत्रों की सार्टिंग को लेकर प्रशासन का कहना है कि सभी प्रत्याशियों व अभिकर्ताओं को सूचना दी गई थी, लेकिन पत्र में कहीं भी डाक मतपत्रों की सार्टिंग करने का उल्लेख नहीं था। इतना ही नहीं, सार्टिंग निर्धारित समय दोपहर तीन बजे से पहले डेढ़ बजे की गई। तब वहां कांग्रेस का अभिकर्ता माैजूद नहीं था। इस तरह जिला निर्वाचन अधिकारी की सोची समझी साजिश सामने आ रही है। कांग्रेस ने ज्ञापन के माध्यम से मतगणना से पूर्व डा. गिरीश कुमार मिश्रा को चुनावी प्रक्रिया से हटाने की पुरजोर मांग की है।

अपने ही बयानों में फंस रहा जिला प्रशासन –

27 नवंबर को मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने इंटरनेट मीडिया पर एक पत्र जारी कर स्पष्ट किया था कि डाक मतपत्रों की सॉर्टिंग के लिए अभिकर्ताओं को उपस्थित रहने के लिए 15 नवंबर को जारी किया गया था, लेकिन उस पत्र में डाक मतपत्रों की सॉर्टिंग करने जैसी बातों का कहीं भी उल्लेख नहीं है। उस पत्र में यह लिखा है कि समय-समय पर डाक विभाग के माध्यम से प्राप्त इटीपीबीएमएस को जमा करने के लिए प्रतिदिन दोपहर तीन बजे पोस्टल बैलेट पेपर प्रभारी की उपस्थिति में स्ट्रांग रूम खोलने व बंद करने का कार्य किया जाएगा, यानी आदेश में कहीं भी डाक मतपत्रों की सॉर्टिंग का जिक्र नहीं है। ऐसे में जिला प्रशासन अपने ही बयानों और सफाई में फंस रहा है।

बयान में विरोधाभास –

जब हमारे द्वारा कांग्रेस जिला अध्यक्ष से पूछा गया कि क्या वह मतगणना जिला निर्वाचन अधिकारी के रहते ही करवाना चाहते हैं तब उनके द्वारा कहा गया कि वह जिला निर्वाचन अधिकारी के सामने मतगणना नहीं करवाना चाहते एवं वही पूछे गए दूसरे सवाल में की जो डाक मत पत्र में हेरा फेरी की गई है इसे आप लापरवाही या षडयंत्र मानते हैं उसे पर कांग्रेस के जिला अध्यक्ष संजय उयके और हिना कावरे के बयान में विरोधाभास लग रहा था जिसको देखकर ऐसा लग था कि अभी भी कांग्रेस पूरी तरह एकजुट नहीं हुई है और उनके बयानों में अभी भी विरोधाभास ही चल रहा है किंतु उन्होंने अपने बयान में सफाई देते हुए अलग-अलग शब्दों में तो कह दिया दिया कि इस विषय में लापरवाही मानते हैं तो वही हिना कावरे ने कहा कि वह इस षड्यंत्र मानते हैं किंतु कहीं ना कहीं जिस प्रकार से इस विषय को लेकर जिस प्रकार से जिला प्रशासन व जिला निर्वाचन अधिकारी को जिले के कांग्रेसियों द्वारा भुना था उस हिसाब से नहीं भुनाया गया एवं महज चार दिन तक कांग्रेस की प्रत्याशी अनुभा मुंजारे द्वारा ही इस विषय को लेकर अपनी आवाज बुलंद की गई एवं जब आलाकमान से इस विषय को उठाया गया तब जाकर चार दिन बाद कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता ली

कांग्रेस ने आयोग से की ये मांग –

  • जिला निर्वाचन अधिकारी डा. मिश्रा के खिलाफ आयोग तत्काल कार्रवाई करे और निर्वाचन प्रक्रिया से तत्काल हटाया जाए।
  • छेड़छाड़ किए गए डाक मतपत्रों के क्रमांक दिए जाएं, जिसका मिलान होगा, फिर डाक मतपत्रों की गिनती हो।
  • स्ट्रांग रूम खोलने व बंद करने को लेकर बनाया गया पंचनामा गलत है, इसकी जांच की जाए।
  • मतगणना के लिए आयोग द्वारा अधिकारी नियुक्त किया जाए, ताकि निष्पक्ष मतगणना हो सके।
  • नोडल अधिकारी शरद बिसेन की मामले में संलिप्ता संदिग्ध है इसलिए उन पर भी कार्रवाई हो।

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