मप्र के 253 पुल जर्जर, 46 सबसे खतरनाक घोषित, सुरक्षा ऑडिट अधूरा, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा

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मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के रिकॉर्ड में प्रदेश के 253 पुल जर्जर श्रेणी में चिन्हित किए जा चुके हैं। इनमें से 46 पुलों की स्थिति बेहद खतरनाक बताई गई है।

सुप्रीम कोर्ट की कमेटी ऑन रोड सेफ्टी हर वर्ष पुलों और पुलियों के सुरक्षा ऑडिट की सिफारिश करती रही है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश में कई स्थानों पर भौतिक निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट का काम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

46 पुलों को माना गया सबसे ज्यादा जोखिम वाला

पीडब्ल्यूडी की सूची के अनुसार प्रदेश में 253 पुल मरम्मत और निगरानी की जरूरत वाली श्रेणी में हैं। इनमें 46 पुल ऐसे हैं, जिन्हें अत्यधिक संवेदनशील और जोखिमपूर्ण माना गया है। ऐसे पुलों पर दुर्घटना की आशंका को देखते हुए नियमित निगरानी और मरम्मत की आवश्यकता बताई गई है।

निरीक्षण के साथ फोटो अपलोड करना अनिवार्य

नियमों के मुताबिक वार्षिक निरीक्षण के दौरान पुलों के फाउंडेशन, बियरिंग्स, एक्सपेंशन जॉइंट्स और जल निकासी की स्थिति की जांच की जाती है। इंजीनियरों को निरीक्षण रिपोर्ट विभागीय सॉफ्टवेयर पर तस्वीरों सहित अपलोड करना अनिवार्य है। हालांकि विभाग का कहना है कि इस वर्ष की कई रिपोर्टें अभी आना बाकी हैं।

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नए पुल भी पहुंचे संवेदनशील सूची में

संवेदनशील पुलों की सूची में केवल पुराने पुल ही नहीं, बल्कि तीन से पांच वर्ष पहले बने कुछ नए पुल भी शामिल हैं। इनमें वर्ष 2024 में बना एकलव्य पुल और वर्ष 2021 में तैयार रीवा शहर का फ्लाईओवर भी शामिल है। इन्हें विशेष मजबूतकरण श्रेणी में रखा गया है।

मजबूतकरण के लिए 11.41 करोड़ रुपये स्वीकृत

प्रदेश सरकार ने मार्च 2026 में 50 संवेदनशील पुलों के विशेष मजबूतकरण के लिए 11.41 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इनमें सबसे अधिक 22 पुल भोपाल संभाग के बताए गए हैं। अब इन पुलों की मरम्मत और सुरक्षा कार्य समय पर पूरा करना विभाग के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

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