पवार समाज के आराध्य चक्रवर्ती सम्राट राजा भोज को लेकर पूर्व सांसद कंकर मुंजारे द्वारा दिए गए कथित बयान के विरोध में पवार समाज ने बड़ा प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में समाजजन पहले स्थानीय पीजी कॉलेज स्थित पवार छात्रावास में एकत्रित हुए, जहां से आक्रोश रैली निकालकर पूर्व सांसद के निवास की ओर कूच किया गया। रैली के दौरान समाज के लोगों ने कंकर मुंजारे का पुतला साथ लेकर नारेबाजी की और उनके निवास के सामने पहुंचकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि राजा भोज को लेकर की गई टिप्पणी से समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने मांग की कि पूर्व सांसद सार्वजनिक रूप से माफी मांगें, अन्यथा उनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज की जाए। जैसे ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी पूर्व सांसद के घर के सामने पहुंचे, माहौल तनावपूर्ण हो गया। प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की और कंकर मुंजारे के खिलाफ विरोध जताया। इसी दौरान पूर्व सांसद भी घर से बाहर आए और उन्होंने इस प्रकार किए जा रहे प्रदर्शन पर आपत्ति जताई। प्रदर्शन के दौरान समाज के कार्यकर्ताओं ने पुतला दहन भी किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी लगातार माफी मांगने और कानूनी कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। हालांकि पूर्व सांसद ने माफी मांगने से स्पष्ट इनकार कर दिया, जिसके बाद प्रदर्शन और उग्र हो गया। स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कुछ प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और मार्ग अवरुद्ध कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस बल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। बढ़ते तनाव को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों और पूर्व सांसद के समर्थकों को अलग-अलग कर माहौल शांत कराया।
हाल ही में लोकार्पित हुए गर्रा रेलवे क्रॉसिंग स्थित राजा भोज ओवरब्रिज के नामकरण को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों पर पहुंच गया है। पूर्व सांसद कंकर मुंजारे द्वारा ओवरब्रिज के नामकरण पर दिए गए बयान के विरोध में 18 जून को पवार समाज ने बड़ा प्रदर्शन करते हुए रैली निकाली, पूर्व सांसद के निवास के सामने विरोध दर्ज कराया और उनका पुतला दहन किया। बाद में समाज के प्रतिनिधियों ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की। दरअसल, ओवरब्रिज का नाम सम्राट राजा भोज के नाम पर रखे जाने के बाद पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने एक वीडियो बयान जारी किया था। उन्होंने कहा था कि किसी भी सार्वजनिक संरचना का नाम उन महापुरुषों के नाम पर होना चाहिए जिनका जिले के विकास और इतिहास में प्रत्यक्ष योगदान रहा हो। उन्होंने सवाल उठाया था कि बालाघाट जिले के संदर्भ में राजा भोज का क्या योगदान रहा है और इसी आधार पर नामकरण पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। पूर्व सांसद के इस बयान के बाद पवार समाज में नाराजगी फैल गई। समाज के पदाधिकारियों ने पहले प्रेस वार्ता आयोजित कर बयान की निंदा की थी और चेतावनी दी थी कि यदि बयान वापस नहीं लिया गया तो विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इसी क्रम में गुरूवार को जिले सहित छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु बालाघाट पहुंचे। पवार समाज के लोग स्थानीय पीजी कॉलेज स्थित छात्रावास परिसर में एकत्र हुए, जहां से सैकड़ों की संख्या में रैली निकाली गई। रैली गोंदिया रोड होते हुए पूर्व सांसद कंकर मुंजारे के निवास के पास पहुंची। यहां प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए पूर्व सांसद से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अपने बयान को वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय और गर्मा गया जब पूर्व सांसद स्वयं घर से बाहर आ गए। प्रदर्शनकारियों और पूर्व सांसद के बीच तीखी बहस की स्थिति निर्मित हो गई। पवार समाज के लोगों का कहना था कि सम्राट राजा भोज केवल पवार समाज ही नहीं बल्कि पूरे समाज के गौरव हैं और उनके संबंध में इस प्रकार की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पूर्व सांसद का पुतला भी जलाया और कुछ समय तक सड़क पर धरना देकर विरोध जताया। प्रदर्शन लगभग दो से ढाई घंटे तक चलता रहा। स्थिति को देखते हुए पुलिस बल लगातार मौके पर मौजूद रहा और बाद में पुलिस अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराया। इसके बाद पवार समाज के पदाधिकारी और सामाजिक बंधु पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर पूर्व सांसद के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की मांग की।
इसी प्रकार के प्रदर्शन की आवश्यकता थी – विशाल बिसेन
समाज के राष्ट्रीय पदाधिकारियों और जिला अध्यक्ष विशाल बिसेन ने कहा कि यदि पूर्व सांसद अपने बयान के लिए माफी नहीं मांगते हैं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। विशाल बिसेन ने यह भी कहा कि पूर्व सांसद कंकर मुंजारे की नजर में हर चुनाव जीतने वाला प्रत्याशी गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो भी व्यक्ति, प्रशासनिक अधिकारी, एसपी ,कलेक्टर सब उनकी नजर में गलत है। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शन उसी भाषा में किया गया, जिसे कंकर मुंजारे समझते हैं, इसलिए उग्र प्रदर्शन की आवश्यकता महसूस हुई। विशाल बिसेन ने कहा कि किसी को भी यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यक्ति , समाज को यह बताए कि उसका आराध्य कौन होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी समाज के महापुरुष , आराध्य के प्रति अपमानजनक टिप्पणी की जाती है, तो पवार समाज उसका विरोध करेगा और उसके खिलाफ संघर्ष करेगा। उन्होंने आगे कहा कि पवार समाज की मांग है कि कंकर मुंजारे के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर एफआईआर दर्ज की जाए। उनका कहना था कि जब तक उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक समाज शांत नहीं बैठेगा।
अपमानजनक शब्द नहीं कहा था, मैं भी उनका सम्मान करता हूँ – कंकर मुंजारे
पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रदर्शन को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के घर के सामने इस प्रकार का प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने बयान में राजा भोज के लिए कोई अपमानजनक शब्द नहीं कहा था और वह स्वयं उनका सम्मान करते हैं। उनका कहना था कि उन्होंने केवल यह सवाल उठाया था कि बालाघाट जिले के संदर्भ में नामकरण किन आधारों पर किया गया। पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि पूरा विवाद अनावश्यक रूप से बढ़ाया गया है और यह आंदोलन राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होता है। उन्होंने यह भी कहा कि ओवरब्रिज निर्माण में फुटपाथ और अन्य तकनीकी कमियों से ध्यान हटाने के लिए नामकरण के मुद्दे को प्रमुखता दी जा रही है।
किसी प्रकार का टकराव और अप्रिय घटना नहीं हुई – मयंक तिवारी
इधर नगर पुलिस अधीक्षक मयंक तिवारी ने बताया कि पवार समाज द्वारा किया गया प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। समाज की ओर से ज्ञापन प्राप्त हुआ है और उसमें की गई मांगों के संबंध में नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदर्शन के दौरान किसी प्रकार का गंभीर टकराव और अप्रिय घटना नहीं हुई।









































