Shivraj Singh Chouhan Vs Mohan Yadav: शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव को लेकर मध्य प्रदेश की राजनीति में कई तरह की अटकलें हैं। दोनों के बीच मनभेद की खबरें आते रहती हैं। लेकिन सार्वजनिक मंच से दोनों नेता एक-दूसरे की तारीफ करते हैं। आइए आपको बताते हैं कि इसके पीछे की वजह क्या है।भोपाल: मध्य प्रदेश बीजेपी में सब कुछ ठीक नहीं होने की अटकलें हैं। समय-समय पर ये चीजें खुलकर सामने आ जाती हैं तो विपक्ष की बातों पर मुहर लगने लगती है। कोसमी में आदिवासियों के विवाद में सरकार और शिवराज आमने सामने हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा है कि दोनों की लड़ाई में आदिवासी परिवार उजड़ रहे हैं।
शिवराज सिंह चौहान Vs मोहन यादव?
हालिया घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में एक चर्चा सरेआम है कि क्या मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान वर्सेस मोहन यादव चल रहा है। हालांकि मंच से दोनों नेताओं ने कभी इस बात का एहसास नहीं होने दिया है। शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव जब एक साथ दिखते हैं तो दोनों एक-दूसरे की तारीफ में कसीदे पढ़ने से नहीं चूकते हैं। मगर हाल में घटित कुछ घटनाओं ने इन अटकलों को बल दिया है कि सब कुछ ठीक नहीं है।
कोसमी की कार्रवाई पर बिफर पड़े हैं शिवराज
मध्य प्रदेश में दोनों के बीच मनभेद की खबरों पर इसलिए ज्यादा चर्चा होने लगी है कि कोसमी में अतिक्रमण करने वाले आदिवासी परिवारों पर कार्रवाई हो रही है। यह क्षेत्र शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा में आता है। वन भूमि पर घर बनाकर रह रहे आदिवासी परिवारों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई है। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान उनके साथ धरने पर बैठ गए। सरकार पर सीधे हमला बोलने की बजाए अधिकारियों को कोस कर अपना संदेश पहुंचा दिया है। मगर जिस भाषा में उन्होंने अधिकारियों को लपेटा है, उससे साफ जाहिर था कि उनका निशाना कही और था।सीएम से मिलने की बात कही
कोसमी में शिवराज सिंह चौहान के चेहरे का गुस्सा यह बताने के लिए काफी था, इसके पीछे कितने दर्द है। उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो। इसे लेकर हम सीएम मोहन यादव से मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि ये आदिवासी परिवार वर्षों से हमारे वोटर हैं।
सीएम ने भी दिया जवाब
हालांकि सीएम मोहन यादव ने भी इस मसले पर बड़ी सहजता के साथ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेता ने कोई बात उठाई है तो हमने इसे गंभीरता से लिया है। हम इसकी जांच करवाएंगे। साथ ही सीएस से रिपोर्ट मांगी है।हजारों एकड़ जमीन पर है कब्जा
मध्य प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार अरुण दीक्षित इसे अलग नजरिए से देखते हैं। वह कहते हैं कि सीएम ने एक अलग तरीके की मुहिम चला रखी है। इससे पार्टी के वरिष्ठ नेता असहज महसूस करते हैं। अब शिवराज सिंह चौहान भी उनके निशाने पर हैं। इस राज्य में हजारों एकड़ जमीन पर कब्जा है। ऐसे में 10-12 परिवारों के कब्जे को क्यों ऐसे हटाया जा रहा है।
शिवराज सिंह चौहान ने जो किया है वही भर रहे हैं। उन्होंने उमा भारती के साथ ऐसा ही किया था। 2008 में उमा भारती रोते हुए घूमी थीं। शिवराज सिंह चौहान ने पुलिस प्रशासन के जरिए उनके साथ बहुत कुछ किया था।कैबिनेट में मंत्री हैं शिवराज
उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान के साथ तब ऐसा हो रहा है, जब वह मोदी कैबिनेट में मंत्री हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि मोहन यादव को सह कौन दे रहा है, जो वह ये सब कर पा रहे हैं।
नई सरकार में पलट गए थे शिवराज के फैसले
- दरअसल, दिसंबर 2023 में जब मोहन यादव मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने तत्कालीन सरकार के समय के कई फैसले पलट दिए हैं। इसमें सबसे पहले उन्होंने यह पलट दिया था कि एमपी गान के दौरान खड़ा होना अनिवार्य नहीं है। इसे शिवराज सिंह चौहान के समय में अनिवार्य किया गया था।
- इसके साथ ही तत्कालीन शिवराज सरकार में भोपाल और इंदौर में बीआरटीएस का निर्माण हुआ था। मोहन यादव ने कुर्सी पर बैठने के कुछ दिनों बाद ही दोनों शहरों से इसे हटाने का फैसला किया। इसके बाद भोपाल-इंदौर से बीआरटीएस को हटा दिया गया है।
- शिवराज सिंह चौहान के समय में सीएम राइज स्कूल की शुरुआत की गई। मोहन यादव ने सीएम बनने के बाद इन स्कूलों का नाम बदल दिया। इन स्कूलों क नाम सांदीपनि स्कूल कर दिया गया है।
शिवराज सिंह चौहान भी अब नहीं चूक रहे
- वहीं, अब शिवराज सिंह चौहान भी अपनी वजूद को एमपी में कायम रखने के लिए खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कोसमी में आदिवासी परिवारों के लेकर प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
- इससे पहले एमपी में मूंग खरीदी को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे। आंदोलन के बीच शिवराज ने एक चिट्ठी जारी की थी। साथ ही मोहन सरकार पर आरोप लगाया था कि केंद्र की मंजूरी के बाद एमपी मूंग की खरीदी नहीं कर पा रही है।
- हाल ही में मोहन यादव ने कहा था कि लाडली बहना योजना उन पर भारी पड़ी रही है। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि हर सरकार को यह योजना चलानी पड़ेगी, बहनें नाराज हुईं तो फिर खैर नहीं।
- इससे पहले देवास में भी आदिवासियों पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हुई थी तो शिवराज ने विरोध किया था। इसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।
गौरतलब है कि सियासी जानकार यह भी मानते हैं कि शिवराज सिंह चौहान मध्य प्रदेश से केंद्र की राजनीति में शिफ्ट हो गए हैं। लेकिन वह अपना दबदबा यहां कायम रखना चाहते हैं। उनकी ज्यादा लड़ाई वजूद को लेकर ही है। कोसमी में भी उन्होंने कहा था कि अधिकारियों को मैंने निर्देशित किया था। इसके बावजूद कार्रवाई की गई।








































