मध्य प्रदेश में शराब ठेके से जुड़े फर्जीवाड़े में आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। उपमुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी और जिला आबकारी अधिकारी दीपक रायचूरा को 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी ई-एफडीआर मामले में निलंबित कर दिया गया है। बैंक की जांच में यह गारंटी फर्जी पाई गई है।भोपाल: आबकारी विभाग में बड़े वित्तीय और प्रशासनिक फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए जिला आबकारी अधिकारी दीपक रायचूरा को निलंबित कर दिया है। रायचूरा इससे पहले मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। यह पूरा मामला वर्ष 2024-25 के दौरान भोपाल के एक शराब समूह से जुड़ा हुआ है, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर लाइसेंस जारी करने और दस्तावेज तैयार करने के गंभीर मामले सामने आए हैं।
2.75 करोड़ रुपये से अधिक की फर्जी ई-एफडीआर का पर्दाफाश
विभागीय जांच के अनुसार, भोपाल के शराब समूह बीपीएल/एफ-14 (पीएंडटी चौराहा) के ठेके के एवज में 2,75,53,535 रुपये की ई-एफडीआर जमा कराई गई थी, जिसके साथ 20 मई 2024 की सत्यापन रिपोर्ट भी लगी हुई थी। जब अक्टूबर 2026 में बैंक से इसका आधिकारिक सत्यापन कराया गया, तो एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने लिखित में जवाब दिया कि यह एफडीआर उनके द्वारा कभी जारी ही नहीं की गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि सत्यापन रिपोर्ट सीधे लाइसेंसी के ई-मेल से आई थी और बैंक को कोई पत्र भेजने का रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं था।
नियमों की अनदेखी और तय समयसीमा का उल्लंघन
जांच रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि नियमों के मुताबिक प्रतिभूति की शेष 50 प्रतिशत राशि 30 अप्रैल 2024 तक जमा हो जानी चाहिए थी, लेकिन यह फर्जी या अनधिकृत ई-एफडीआर 12 मई को स्वीकार कर ली गई और इस देरी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके अलावा, जिस बैंक के नाम पर यह गारंटी दिखाई गई थी, वह उस समय निर्धारित नियमों के तहत प्रतिभूति स्वीकार करने के लिए मान्य श्रेणी में भी नहीं था।
लाइसेंस हस्तांतरण में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएं
सिर्फ वित्तीय गारंटी ही नहीं, बल्कि मेसर्स मां माइंस के लाइसेंस के ट्रांसफर में भी जमकर मनमानी बरती गई। इस फर्म के लिए आवेदन 10 जुलाई 2024 को मिला था, जिस पर तत्कालीन कलेक्टर ने 27 दिसंबर 2024 को हस्तांतरण का आदेश जारी कर दिया। जांच में पाया गया कि फर्म की पंजीकृत पार्टनरशिप डीड के बिना ही पूरी प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई। इतना ही नहीं, विजय सिंह नामक व्यक्ति के नाम से 76 लाख रुपये की बैंक गारंटी स्वीकार कर ली गई, जबकि उपलब्ध दस्तावेजों में उनका नाम फर्म के साझेदार के रूप में दर्ज ही नहीं था। उनके व्यक्तिगत बैंक खातों के पोस्ट-डेटेड चेक भी स्वीकार कर लिए गए थे।ओएसडी पद से हटने के बाद विभागीय कार्रवाई
गौरतलब है कि हाल ही में एक अन्य मामले में आरोपी मोहित गोगिया द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने पिछले शुक्रवार को दीपक रायचूरा को अपने ओएसडी पद से हटा दिया था और मामले की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद दो सदस्यीय जांच दल की रिपोर्ट और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना द्वारा 12 अक्टूबर को जारी आदेश के आधार पर यह निलंबन की कार्रवाई की गई है। आबकारी आयुक्त के आदेश में कुल सात बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं का जिक्र है। निलंबन अवधि के दौरान दीपक रायचूरा का मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, ग्वालियर तय किया गया है, और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। विभाग का कहना है कि ये निष्कर्ष फिलहाल प्रथम दृष्टया जांच के आधार पर हैं।









































