IAS Dristi Jaiswal: गोरखपुर के एक साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली दृष्टि जायसवाल ने लगातार तीन बार असफल होने के बाद चौथे प्रयास में यूपीएससी क्रैक किया। परिवार के अटूट समर्थन और कड़ी मेहनत के दम पर IAS बनीं दृष्टि वर्तमान में मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर में एसडीएम के पद पर तैनात हैं।भोपाल: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले हर उम्मीदवार की अपनी अलग कहानी और संघर्ष होता है। किसी के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं होती, तो कोई अपनी मेहनत और सीमित साधनों के बूते इतिहास रच देता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर की रहने वाली दृष्टि जयसवाल की कहानी भी ऐसे ही अटूट संघर्ष, पारिवारिक समर्थन और कभी हार न मानने वाले जज्बे की है। उनके पिता गोरखपुर में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं और मां गृहणी हैं। आर्थिक मोर्चे पर तमाम सीमाओं के बावजूद दृष्टि ने कभी अपने प्रशासनिक सेवा में जाने के सपने को टूटने नहीं दिया।
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: गोरखपुर के चार फाटक रोड पर किराने की दुकान चलाने वाले रमाशंकर जयसवाल की बेटी हैं दृष्टि।
- संघर्षपूर्ण सफर: यूपीएससी के शुरुआती तीन प्रयासों में असफलता मिली, लेकिन चौथे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया 225वीं रैंक हासिल की।
- वर्तमान तैनाती: यूपीएससी के बाद उन्हें पहले कर्नाटक कैडर मिला था, लेकिन आईपीएस अधिकारी मनस्वी शर्मा से विवाह के बाद उनका कैडर बदलकर मध्य प्रदेश कर दिया गया। फिलहाल वह रीवा जिले के सिरमौर में एसडीएम के पद पर तैनात हैं।
गोरखपुर से शुरू हुआ शैक्षणिक सफर
दृष्टि जयसवाल मूल रूप से गोरखपुर के मोहद्दीपुर इलाके की रहने वाली हैं। उनके घर में हमेशा से पढ़ाई-लिखाई के माहौल को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने अपनी शुरुआती स्कूली शिक्षा शहर के सेंट जूड्स स्कूल और डिवाइन पब्लिक स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की उच्च शिक्षा के लिए महाराणा प्रताप पीजी कॉलेज का रुख किया और साल 2018 में अपनी B.Sc. की डिग्री पूरी की। ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी होते ही उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का मन बना लिया था।पढाई के दौरान उन्होंने समाजशास्त्र को अपना ऑप्शनल सब्जेक्ट चुना। इस मुश्किल सफर में उनके परिवार ने उनका हर कदम पर साथ दिया। उनके पिता और बड़े भाई ने सीमित आर्थिक संसाधनों के बावजूद उनकी पढ़ाई में कभी कोई रुकावट नहीं आने दी और उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
तीन असफलताएं और फिर चौथी बार में मिली सफलता
दृष्टि के लिए यूपीएससी का यह सफर बिल्कुल भी आसान नहीं था। उन्होंने जब पहली बार परीक्षा दी तो उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद दूसरे और लगातार तीसरे प्रयास में भी उनका चयन नहीं हो सका। लगातार तीन बार असफलता मिलने के कारण उनके मन में थोड़ा संदेह और निराशा घर करने लगी थी, लेकिन उनके परिवार ने उनका हौसला टूटने नहीं दिया। परिवार के मजबूत समर्थन के बल पर उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और एक बार फिर पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में उतरीं। उनकी यह मेहनत आखिरकार रंग लाई। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2022 के फाइनल रिजल्ट में दृष्टि ने ऑल इंडिया 225वीं रैंक हासिल करते हुए अपने आईएएस बनने के सपने को आखिरकार सच कर दिखाया।व्यक्तिगत जीवन और कैडर बदलाव
सफलता हासिल करने के बाद लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी से अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें शुरुआत में कर्नाटक कैडर अलॉट हुआ था। हालांकि, बाद में 2023 बैच के आईपीएस अधिकारी मनस्वी शर्मा के साथ विवाह के बाद उनका कैडर बदलकर मध्य प्रदेश कर दिया गया। उनके पति मनस्वी शर्मा ने भी कड़े संघर्ष के बाद अपने छठे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा क्रैक की थी और 101वीं रैंक हासिल की थी। वर्तमान में दृष्टि मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिरमौर में एसडीएम के रूप में प्रशासनिक जिम्मेदारी संभाल रही हैं।










































