डकैती से पहले गूगल मैप्स और स्ट्रीट व्यू से रेकी, 4-5 साल में उड़ाया 80 किलो सोना, सिंगरौली बैंक लूट में बड़ा खुलासा

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सिंगरोली के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 17 अप्रैल को हुई 5 करोड़ रुपये की डकैती से पहले बदमाशों ने गूगल मैप्स और स्ट्रीट व्यू का इस्तेमाल कर रेकी की थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि मास्टरमाइंड पीयूष जायसवाल और उसके गिरोह ने बैंक और भागने के रास्तों का ऑनलाइन जायजा लेने के बाद इस वारदात को अंजाम दिया था।सिंगरौली: 17 अप्रैल को बैंक ऑफ महाराष्ट्र की बैढ़न शाखा में हुई 5 करोड़ रुपये की सनसनीखेज डकैती को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। इस वारदात को अंजाम देने वाले कुख्यात गिरोह ने बैंक लूटने से पहले जमीन पर उतरने के बजाय ऑनलाइन ‘गूगल मैप्स’ और ‘स्ट्रीट व्यू’ का सहारा लिया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि बदमाशों ने केवल रास्तों की तलाश नहीं की, बल्कि डिजिटल माध्यम से टारगेट की सटीक रेकी और भागने के सुरक्षित विकल्पों की योजना बनाई थी।

गूगल मैप्स और स्ट्रीट व्यू से होती थी रेकी

सिंगरोली के एसपी शियाज केएम के मुताबिक, यह गिरोह पहले ऑनलाइन टूल्स और मैप्स की मदद से संभावित ठिकानों की पहचान करता था। इसके बाद गिरोह के एक या दो सदस्य जमीनी हकीकत का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुंचते थे। हालात अनुकूल लगने पर बाकी के साथी भी इस साजिश में शामिल हो जाते थे। बैंक और ज्वैलरी कारोबारियों को निशाना बनाने वाले इस गिरोह के लिए सबसे अहम बात यह होती थी कि बैंक के आसपास से पड़ोसी राज्यों में निकलने के आसान और तेज रास्ते (बॉर्डर रूट्स) मौजूद हों। शुरुआती योजना में छतरपुर भी इनके निशाने पर था, लेकिन बाद में गैंग ने अपना रुख सिंगरोली की तरफ मोड़ लिया था।ओड़िशा जेल से लाया गया मास्टरमाइंड पीयूष जायसवाल

इस हाई-प्रोफाइल डकैती के मामले में पुलिस ने बिहार के पटना के रहने वाले 26 साल के लिस्टेड क्रिमिनल पीयूष जायसवाल को ओड़िशा जेल से प्रोडक्शन वारेंट पर सिंगरोली लाई थी। दो दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उसे वापस जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब उसके पुराने संपर्कों और पटना की बेउर जेल में बंद सुबोध सिंह जैसे अन्य आरोपियों के साथ उसके संबंधों की गहराई से जांच कर रही है।

सोने की तस्करी और गैंग की परतें

पुलिस का मानना है कि यह डकैती सिर्फ एक कड़ी भर है। इस गिरोह का काम करने का तरीका दो स्तरों पर बंटा हुआ था। एक दल डकैती को अंजाम देता था, जबकि दूसरा गिरोह लूटे गए सोने को ठिकाने लगाता था। सुबोध सिंह की भूमिका इसी दूसरी परत में होने का संदेह है। पुलिस इस बात का पता लगाने के लिए सोने के ट्रेल को खंगाल रही है कि आखिर लूट का माल कहां गया और नेटवर्क में कैसे आगे बढ़ा। जांच अधिकारियों का यह भी अनुमान है कि पिछले चार से पांच वर्षों में इस गिरोह ने अलग-अलग वारदातों में करीब 70 से 80 किलोग्राम सोना चुराया है। गिरोह के सदस्य अपनी इस आपराधिक भाषा में ऑपरेशन को ‘असिगमेंट’ और ‘ट्रेनिंग पीरियड’ जैसे शब्दों से पुकारते थे।

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