बालाघाट(पदमेश न्यूज़)।
नगर के हद्रय स्थल में स्थित देवी तालाब के किनारे ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिर होने से, यह तालाब ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है, हालांकि यह जगह विवादास्पद है, जिसके जल में हो रहे प्रदूषण को लेकर पूर्व में एनजीटी ने, तालाब के जल को संरक्षित करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन प्रशासन ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया। इसके उलट देवी तालाब में कचरा डालकर जल को प्रदूषित करने के साथ साथ,तालाब को पूरने का कार्य किया जा रहा है।ऐसा आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाते हुए मामले में वैधानिक कार्यवाही की मांग की है।वही कलेक्टर कार्यालय में भी कलेक्टर से शिकायत कर मामले की जांच कराने की मांग की है।उधर शिकायतकर्ता की शिकायत पर कलेक्टर मृणाल मीणा ने मामले की जांच के आदेश एसडीएम को दिए है।लेकिन नपा द्वारा एसडीएम को प्रतिवेदन नही दिया गया है जिसके चलते इसकी जांच अब तक ठंडे बस्ते में पड़ी है।
शिकायतकर्ता बोला लगातार प्रदूषित किया जा रहा जल
जागरूक नागरिक द्वारकानाथ चौधरी ने कलेक्टर को शिकायत करते हुए बताया है कि सार्वजनिक और निजी जलस्त्रोतो को संरक्षित करने की जिम्मेदारी नगरपालिका की है, नगर के हृदय स्थल में स्थित देवी तालाब को नगरपालिका लगातार प्रदूषित कर रही है। शहर की नालियों और नालों में बहने वाले प्रदूषण मल-जल को सीधे देवी तालाब में छोड़ा जा रहा है जिसके कारण देवी तालाब में लगातार प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। जिसमें कलेक्टर मृणाल मीना ने एसडीएम गोपाल सोनी को मामले की जांच कर में संबंधित दोषी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे।लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नही की गई है।
16 एकड़ से 8 एकड़ में सिमटा तालाब
बताया जा रहा है कि राजस्व रिकॉर्ड में देवी तालाब पटवारी हल्का क्रमांक 13/2, खसरा नंबर 319 में रकबा 16 एकड़ 14 डिसमिल है, जिसमें कालांतर में अतिक्रमण और भराव से यह सिकुड़कर वर्तमान में केवल 8 एकड़ में रह गया है। जिससे इसके जलभराव क्षेत्र में नाली और नालों से प्रदूषित जल के साथ ही, रोजाना निकलने वाले कचरे से पाटने का काम हो रहा है।जिसकी शिकायत, शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से की है।
तालाब को लेकर फैक्ट जानकारी
बताया गया कि राजस्व रिकॉर्ड में देवी तालाब पटवारी हल्का क्रमांक 13/2, खसरा नंबर 319 में रकबा 16 एकड़ 14 डिसमिल है। जिसमें लगभग 6 एकड़ में अतिक्रमण है। लगभग डेढ़ एकड़ को मिट्टी, मुरूम और कचरे से पाठ दिया गया है, शेष 8 एकड़ में तालाब में पानी है। जिसमें एनजीटी ने 2021 में दिए गए निर्णय में कहा था कि देवी तालाब का जल प्रदूषित होना, तालाब मद परिवर्तन कर देना, तालाब को भरने का कारण नहीं हो सकता। यदि किसी का मालिकाना हक को लेकर विवाद है, तो उसे सक्षम न्यायालय में ले जाए।
एनजीटी के आदेशों का नही किया जा रहा पालन- द्वारकानाथ चौधरी
शिकायतकर्ता द्वारकानाथ चौधरी ने बताया कि नगरपालिका, देवीतालाब को विभिन्न नाली और नालो से बहने वाले मल-मूत्र के पानी को तालाब में प्रवाहित कर तालाब को प्रदूषित कर रही है। जिसको लेकर एनजीटी ने 13 दिसंबर 2021 को तालाब को संरक्षित करने के निर्देश दिए थे। जिसमें कोई कार्यवाही नहीं की गई। जिसके बाद, यह शिकायत कलेक्टर से की गई है। यदि तालाब को संरक्षित करने के प्रयास नहीं किए जाते है तो फिर एनजीटी में वह इस मामले को लेकर जाएंगे।
तो 133 सहित सम्बधित अन्य धाराओ के तहत की जाएगी कार्यवाही- एसडीएम
वहीं पूरे मामले को लेकर की गई चर्चा के दौरान एसडीएम गोपाल सोनी ने बताया कि पूर्व शिकायतकर्ता की शिकायत पर नगरपालिका को पत्र जारी कर प्रतिवेदन मांगा गया था, जो अब तक अप्राप्त है। जिसके बाद एक और पत्र जारी किया जा रहा है। यदि प्रदूषण सहित अन्य प्रकार की अनियमियता पाई जाती है तो सीआरपीसी की पुरानी धारा 133 के तहत मामला बनाया जाएगा वही यदि पब्लिक न्यूसेंस का मामला पाया जाता है तो इसके खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया जाएगा।










































