संघ प्रमुख ने कहा, प्रजातंत्र में आंदोलन होंगे, आंदोलन समाधान के लिए होना चाहिए। अखण्ड समाज में द्वेष पैदा नहीं होना चाहिए। वोट और सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक लाभ का लोभ हमारे विवेक औऱ सद्भावना पर हावी नहीं हो।Mohan Bhagwat: विजयादशमी के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपने संदेश में देश को फ्रांस-अल्बानिया जैसे हिंसक घटनाओं के प्रति चेताया है। भागवत ने कहा कि एक पश्चिम से आंधी चली, फ्रांस में क्या हो रहा है, नेपाल में क्या हुआ, रिजीम चेंज करने से परिस्थिति बदलेगी? ऐसा कभी नहीं हुआ न होगा। भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं, पक्के नेतृत्व ने चलाया। उनको महत्वाकांक्षी नेता भी मिल जाते हैं, देश विकास कर रहा है समस्या रहती है,आंदोलन समाधान के लिए होते हैं।
फ्रांस और अल्बानिया में क्या हो रहा है?
भागवत ने कहा, फ्रांस और अल्बानिया में क्या हो रहा है? नेपाल और बांग्लादेश में क्या हुआ? रिजीम चेंज करने से परिस्थिति नहीं बदलती। स्वार्थ के लिए ये घटना होती। भारत में भी ऐसे प्रयास चल रहे हैं। असुरी ताकतों का लक्ष्य भारत है। वो कोशिश करते हैं भारत, हिंदू और संघ को किस प्रकार तोड़ें। उन्हें उनकी प्रवृत्ति के लोगों की मदद मिल जाती है। विवेकहीनता के कारण महत्वाकांक्षी नेता उनको मिल जाते हैं।
संघ प्रमुख ने कहा, प्रजातंत्र में आंदोलन होंगे, आंदोलन समाधान के लिए होना चाहिए। अखण्ड समाज में द्वेष पैदा नहीं होना चाहिए। वोट और सस्ती लोकप्रियता और राजनीतिक लाभ का लोभ हमारे विवेक और सद्भावना पर हावी नहीं हो। समाज इस चपेट में ना आए। आंदोलन से समस्या का समाधान होगा, ऐसा कम होता है, समाज के उद्यम से समाधान होगा।मोहन भागवत ने कहा, ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय एकता की प्रेरणा है। अलगाववाद, राजनीतिक वर्चस्व की लालसा और तुष्टीकरण की मानसिकता ने राष्ट्रीय एकता के आधारों को कमजोर किया और देश के विभाजन में योगदान दिया। विभाजन से अपेक्षित शांति नहीं मिली, बल्कि क्षेत्र में अविश्वास, असुरक्षा और बार-बार होने वाले संघर्षों की स्थिति बनी रही ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय एकता की सशक्त प्रेरणा बताते हुए इसे गर्व और बिना संकोच के गाने की अपील की।
पीएम मोदी ने भागवत के संदेश को बताया प्रेरणादायक
वहीं, पीएम मोदी ने मोहन भागवत के संदेश को प्रेरणादायक बताया। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया – नागपुर में शताब्दी वर्ष श्री विजयादशमी उत्सव के अवसर पर परम पूज्य सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी का संबोधन अत्यंत प्रेरणादायी है। इस अवसर पर उन्होंने राष्ट्र की प्रगति, सामाजिक एकता, आत्मनिर्भरता और समाज के सशक्तिकरण सहित कई विषयों पर विस्तार से अपनी बातें रखी हैं।भारत को जोड़ने वाले तीन सूत्र
अपने संबोधन में भागवत ने कहा, भारत को जोड़ने वाले तीन सूत्र —भारत के प्रति भक्ति, साझा पूर्वजों के जीवन पर गौरव और भारतीय संस्कृति व उसके वैश्विक मानवीय मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता। छोटी पहचानों को लेकर भय, संकीर्ण अहंकार और विविधता को अलगाव समझने की प्रवृत्ति छोड़ने की अपील करता हूं। दुनिया की समस्याओं के समाधान में भारत की वैश्विक जिम्मेदारी है । साथ ही, भारत दूसरे देशों से संगठन-कौशल जैसी उपयोगी बातें भी सीख सकता है।
ओटीटी प्लेटफॉर्म को लेकर शासन प्रशंसकों को भी इसका विचार करना चाहिए। विश्वगुरु की बात करते हैं, इसका दायित्व नई पीढ़ी को आने वाला है, इसका जवाब देने के लिए नई पीढ़ी को तैयार होना पड़ेगा, हमको तैयार करना पड़ेगा। ज्ञान और तकनीक का स्वागत और स्वीकार करना चाहिए। कैप्शन मच्छार ने जो किया उसकी ट्रेनिंग नहीं हुई, उनकी परंपरा है उसकी कसौटी में खरे उतरे। जो झगड़ा लगाने वाले हैं वो लगाएंगे, ऐसी घटना होती है तो संघ का नाम भी उछालते हैं ,संघ का कोई संबंध नहीं है, संघ का प्रेम हिंदू पर है हिंदू मतलब सब पर है, विश्व को हिंदू कुटुंब मानता है, संघ कुछ नहीं मांगता, संघ अपना काम करता है।










































