मुंबई इंडियंस के 33 साल के लेग स्पिनर रघु शर्मा ने लखनऊ सुपर जायंट्स के खिलाफ अक्षत रघुवंशी का विकेट लिया। इसी सीजन लीग में डेब्यू करने वाले रघु का यह पहला आईपीए विकेट था। इसके बाद उन्होंने अपने जेब से एक पर्चा निकाला। उसपर लिखा था- राधे राधे। बहुत से दर्द भरे 15 साल गुरुदेव की कृपा से आज समाप्त हुए। मुंबई इंडियंस (ब्लू और गोल्ड) का इस अवसर के लिए धन्यवाद मैं हमेशा आभारी रहूंगा। जय श्री राम।
रघु शर्मा के आईपीएल तक पहुंचने की कहानी काफी संघर्ष से भरी है। उनका जन्म पंजाब के जलंधर में हुआ था। उन्होंने शुरुआत में प्रोफेशनल क्रिकेट नहीं खेला। 18 साल की उम्र के बाद उन्होंने सीरियस क्रिकेट खेलना शुरू किया। 2017 में उन्होंने पंजाब के लिए घरेलू क्रिकेट में डेब्यू किया। अपने दूसरे ही मैच में 7 विकेट हॉल लेने के बाद भी उन्हें जल्द ही टीम से ड्रॉप कर दिया गया। पंजाब में मौके नहीं मिलने के बाद उन्होंने पुडुचेरी का रुख किया। वहां उनका लिस्ट ए और फर्स्ट क्लास डेब्यू तो हुआ लेकिन ज्यादा मैचों में मौका नहीं मिला।
श्रीलंका में उन्होंने गाले क्रिकेट क्लब के लिए शानदार प्रदर्शन करते हुए 6 मैच में 46 विकेट लिए। फिर इंग्लैंड में जाकर क्लब क्रिकेट खेला। वहीं रघु की मुलाकात इमरान ताहिर से हुई। साउथ अफ्रीका के दिग्गज ताहिर ने उनकी स्किल बेहतर करने में काफी मदद की। यह रघु के करियर के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने अपना एक्शन चेंज किया और अपनी बॉलिंग में वेरिएशन भी ऐड किया।
रघु शर्मा ने पुडुचेरी में मौका नहीं मिलने के बाद वापस पंजाब जाकर खेलन चाहते थे लेकिन उन्हें एनओसी नहीं मिला। फिर रणजी ट्रॉफी से पहले वह यो-यो टेस्ट में फेल हो गए। इसके बाद वह सबकुछ छोड़कर पुरी के जगन्नाथ मंदिर चले गए। वह अभी ट्रेनिंग करते थे। जब उन्हें टीम से बुलाया नहीं आया तो रघु ने मान लिया था कि सबकुछ खत्म हो गया। लेकिन 2024-25 विजय हजारे ट्रॉफी से पहले पंजाब के कोच वसीम जाफर ने आकर उन्हें फिटनेस टेस्ट देने को कहा। अगले ही वह मोहाली पहुंचे और फिटनेस टेस्ट पास कर लिया
2024-25 विजय हजारे ट्रॉफी में रघु ने 8 मैचों में पंजाब के लिए 14 विकेट लिए। 2025 सीजन में वह नेट गेंदबाज के रूप में मुंबई इंडियंस का हिस्सा बने। सीजन के बीच में जब विग्नेश पुथुर चोटिल हुए तो इंजरी रिप्लेसमेंट के रूप में रघु टीम में आ गए। 2016 में उन्हें प्लेइंग इलेवन में खेलने का मौका मिला।रघु शर्मा का परिवार डॉक्टर और इंजीनियर वाला है। उन्होंने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए जलंधर में दाखिला लिया था। लेकिन जब भारत ने 2011 विश्व कप जीता तो रघु की क्रिकेट में रुचि जाग गई। वह पास के पार्क में प्रैक्टिस के लिए जाने लगे। लेकिन उस समय उनका वजन 102 किलो था। रघु ने एक इंटरव्यू में कहा था- मेरा वजन लगभग 102 किलो था। मुझे एहसास हुआ कि मुझे वजन कम करने की जरूरत है। मैं दोपहर में 45-46 डिग्री की गर्मी में मैदान पर जाता था। वहां कोई और नहीं होता था, लेकिन मैं बस दौड़ता ही रहता था। उसके बाद मैं लगातार दो घंटे तक गेंदबाजी करता था। छह महीनों के अंदर मैंने 30-35 किलो वजन कम कर लिया।रघु शर्मा पहले फास्ट बॉलिंग करते थे। इंजरी की वजह से वह बाद में लेग स्पिनर पर स्विच हो गए। यूट्यूब पर वह शेन वॉर्न के ट्यूटोरियल वीडियो देखकर लेग स्पिन की बारीकियां सीखी। वह अभी भी मैच से पहले शेन वॉर्न के वीडियो देखते हैं।










































