नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में शांति की उम्मीद में इस हफ्ते कच्चे तेल की कीमत में भारी गिरावट आई। तीन महीने से चली आ रही इस लड़ाई के कारण कच्चे तेल की कीमत में भारी तेजी आई थी। इससे दुनियाभर में महंगाई बढ़ी है और कई देशों की अर्थव्यवस्था बुरी तरह हिल गई है। लेकिन अब होर्मुज की खाड़ी खुलने की उम्मीद में कच्चा तेल नीचे आया है। दुनिया का करीब 20 फीसदी कच्चा तेल इसी रास्ते गुजरता है। यही वजह है कि इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा तेल संकट माना जा रहा है।
इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड की कीमत में 11 फीसदी गिरावट आई जो सात हफ्ते में सबसे अधिक है। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 9 फीसदी से अधिक गिर गया। यह इसकी छह हफ्ते में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। शुक्रवार को जुलाई डिलीवरी का ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 1.66 डॉलर यानी 1.8 फीसदी गिरावट के साथ 92.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ। डब्ल्यूटीआई भी 1.7 फीसदी गिरावट के साथ $87.36 प्रति बैरल रह गया।भारत के लिए मायने
जानकारों का कहना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर पर सहमति बनती है तब भी होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने में कई महीने लग सकते हैं। इसी तरह तेल प्रतिष्ठानों को भी पुरानी स्थिति में लौटने में ज्यादा लंबा समय लग सकता है। इसी महीने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी सऊदी अरामको के सीईओ अमीन नासिर ने कहा था कि ग्लोबल ऑयल मार्केट के 2027 के अंत तक उथलपुथल रह सकती है।










































