गुरपतवंत पन्नू मर्डर प्लॉट: निखिल गुप्ता की सजा सुनाने में देरी, इस दिन आएगा यूएस कोर्ट का फैसला

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अमरीका में प्रतिबंधित संगठन ‘सिंक्स फॉर जस्टिस’ (SFJ) के प्रमुख और खालिस्तानी अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश के मामले में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। अमेरिकी सरकार ने न्यू यॉर्क की एक संघीय अदालत से भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता की सजा की सुनवाई को टालने का औपचारिक अनुरोध किया है। न्यू यॉर्क के साउर्दर्न डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के जज विक्टर मरेरो को भेजे गए पत्र में अमरीकी अटॉर्नी कार्यालय ने बताया कि पीड़ित (गुरपतवंत सिंह पन्नू) अपनी वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए इस सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना चाहता है और बयान दर्ज कराना चाहता है। हालांकि, पूर्व निर्धारित तिथि के दौरान पन्नू अमरीका से बाहर रहेगा, जिसके चलते सजा की तारीख आगे बढ़ाने की अपील की गई है।

सजा टालने का कारण और नई संभावित तारीखें

अमेरिकी कानून के तहत अपराध के शिकार व्यक्ति को दोषी की सजा की सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित रहने और अपनी बात रखने का कानूनी अधिकार है। अमरीकी अभियोजकों ने पत्र में स्पष्ट किया कि उन्होंने निखिल गुप्ता के वकील (बचाव पक्ष) से इस संबंध में चर्चा कर ली है और उन्हें सुनवाई स्थगित करने पर कोई आपत्ति नहीं है। अदालत से अपील की गई है कि सजा सुनाने की प्रक्रिया को 6 नवंबर या 20 नवंबर, 2026 तक के लिए टाल दिया जाए।

निखिल गुप्ता ने कबूल किया था अपना जुर्म

  • 54 वर्षीय भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता को जून 2023 में चेक गणराज्य से गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद जून 2024 में उसे अमरीका प्रत्यर्पित कर दिया गया था।
  • निखिल गुप्ता ने अमेरिकी अदालत में ‘मर्डर-फॉर-हायर’ (सुपारी देकर हत्या कराने), हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में अपना दोष स्वीकार कर लिया था।
  • इन आरोपों के तहत निखिल गुप्ता को 40 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। अभियोजकों ने उसके लिए 20 से 24 साल की सजा का सुझाव दिया है।क्या है पूरा मामला और क्या हैं आरोप?
  • अमरीकी न्याय विभाग द्वारा दायर आरोप-पत्र के अनुसार, आरोप है कि निखिल गुप्ता ने न्यू यॉर्क में रह रहे अमरीकी नागरिक पन्नू की हत्या कराने के लिए $1,00,000 (लगभग 83 लाख रुपये) में डील तय की थी और जून 2023 में $15,00,00 (15 हजार डॉलर) बतौर एडवांस दिए थे। गुप्ता जिस शख्स को सुपारी दे रहा था, वह वास्तव में अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसी (DEA) का एक अंडरकवर एजेंट और गुप्त सूचनादाता था। अमेरिकी अभियोजकों का दावा है कि निखिल गुप्ता खुद से यह काम नहीं कर रहा था, बल्कि उसे ‘विकास यादव’ द्वारा निर्देश दिए जा रहे थे।
  • भारत सरकार का रुख
  • भारत सरकार ने अमेरिका द्वारा लगाए गए ऐसे किसी भी सरकारी आदेश या साजिश में शामिल होने के आरोपों को साफ खारिज किया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि किसी नागरिक को लक्षित कर हत्या कराना उसकी सरकारी नीति का हिस्सा नहीं है। अमरीका द्वारा साझा किए गए इनपुट और सबूतों की जांच के लिए भारत सरकार ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। इसके साथ ही, भारत ने निखिल गुप्ता को एक निजी नागरिक बताया है, जिसका भारत सरकार के किसी आधिकारिक तंत्र से कोई संबंध नहीं है।

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