शेयर बाजार में शुरुआत मजबूत कारोबार के साथ हुई। लेकिन, दोपहर से पहले ही सेंटिमेंट बिगड़ता दिख रहा है। इसके पीछे क्रूड के दाम, और पश्चिम एशिया के तनाव के साथ ही रिजर्व बैंक का फैसला भी है।RBI Cash Rule Share Market : शेयर बाजार में सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को कारोबार की शुरुआत में मजबूती के साथ हुई। लेकिन, 105 के आसपास मंडरा रहे Brent Crude और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिक्विडिटी मैनेजमेंट से जुड़े कदमों ने बाजार का मूड बदल दिया है। खासतौर पर बढ़ती बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से निवेशक चौकन्ने हो गए हैं।
Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 1,000 अंक तक फिसल गया, जबकि Nifty फिर 22,400 के अहम स्तर के नीचे आ गया। India VIX में भी तेज उछाल देखने को मिला, जो बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है।
RBI के किस फैसले से बाजार में बढ़ी बेचैनी?
RBI ने बैंकों के लिए कैश रिजर्व रेशियो (CRR) की न्यूनतम दैनिक मेंटेनेंस सीमा 90% से बढ़ाकर 99% करने का फैसला किया। यह नियम 16 अक्टूबर से लागू होगा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने 13 अक्टूबर को ₹25,000 करोड़ के सरकारी बॉन्ड बेचने की घोषणा की है। इन कदमों का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त लिक्विडिटी को कम करना है।बाजार की चिंता यह है कि बैंकिंग सिस्टम में नकदी की उपलब्धता घटने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो सकती हैं। ऐसे माहौल में शेयरों में निवेश का आकर्षण प्रभावित होता है। हालांकि, RBI के रुपये को स्थिर करने के उपायों से रुपये को मजबूती भी मिली है। यानी केंद्रीय बैंक के कदमों का असर अलग-अलग बाजारों पर अलग हो रहा है।
बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बढ़ाई मुश्किल
बाजार पर दूसरा दबाव सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड से आया। भारत की 10 साल की सरकारी बॉन्ड यील्ड करीब 3 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, अमेरिका में भी बॉन्ड यील्ड ऊंची बनी हुई है। जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो कुछ निवेशक शेयर बाजार के मुकाबले बॉन्ड को प्राथमिकता देने लगते हैं। इससे इक्विटी बाजार में निवेश की मांग प्रभावित हो सकती है।
FII की बिकवाली ने बिगाड़ा सेंटीमेंट
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर के शुरुआती 6 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹45,125 करोड़ निकाल लिए। यह सितंबर के पूरे महीने में दर्ज लगभग ₹45,536 करोड़ की निकासी के करीब है। जब विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर शेयर बेचते हैं, तो प्रमुख कंपनियों और बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बढ़ सकता है। घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी इस दबाव को कुछ हद तक कम कर सकती है, लेकिन इससे बाजार में उतार-चढ़ाव खत्म होना जरूरी नहीं है।
दो दिन की तेजी के बाद हुई मुनाफावसूली
पिछले कारोबारी सत्र यानी 9 अक्टूबर को Nifty 50 करीब 1.30% की बढ़त के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ था। इससे पहले बाजार लगातार 8 हफ्तों की गिरावट का सामना कर चुका था। ऐसे में लगातार दो सत्रों की रिकवरी के बाद निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क रखा। सोमवार को एशियाई बाजारों में कमजोरी के बीच भारतीय बाजार की शुरुआती तेजी टिक नहीं पाई।Sensex-Nifty का ताजा हाल
| इंडेक्स | स्तर | गिरावट |
| Sensex | 71894.75 | 577.58 अंक |
| Nifty 50 | 22372.6 | 148.50 अंक |
| Nifty Bank | 54803.75 | 452.90 अंक |
नोट: आंकड़े 12 अक्टूबर 2026 को दोपहर करीब 12 बजे के इंट्राडे स्तर हैं, बाजार बंद होने के आंकड़े नहीं।
Nifty के लिए अब कौन से स्तर अहम?
टेक्निकल विश्लेषकों के मुताबिक, Nifty के लिए 22,300 का स्तर अहम सपोर्ट है। इसके नीचे निर्णायक गिरावट आने पर बिकवाली और बढ़ सकती है। वहीं, तेजी को दोबारा मजबूत होने के लिए 22,600 से 22,650 के दायरे के ऊपर टिकना जरूरी होगा। आगे की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली कितनी कम होती है, बॉन्ड यील्ड किस दिशा में जाती है और महंगाई के आंकड़े कैसे रहते हैं।
कुल मिलाकर, बाजार की गिरावट को सिर्फ RBI के एक फैसले से जोड़ना सही नहीं होगा। लिक्विडिटी पर केंद्रीय बैंक के कदम, ऊंची बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और मुनाफावसूली ने मिलकर बाजार पर दबाव बनाया है।







































