वॉशिंगटन/पेरिस: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात से ठीक पहले अमेरिका ने अपने ‘इंडो-पैसिफिक कमांड’ से ‘इंडो’ शब्द हटा दिया। ट्रंप के पहले कार्यकाल में जब ‘इंडो’ शब्द को जोड़ा गया था तो दिल्ली में इसका जश्न मनाया गया था। इसे भारत के बढ़ते वर्चस्व का प्रतीक माना गया था लेकिन अब ‘इंडो’ शब्द का हटाये जाने का मतलब है कि चीन के खिलाफ जो धुरी अमेरिका तैयार कर रहा था, उसमें शायद अब भारत का स्थान नहीं है। इसके अलावा दूसरी थ्योरी जी2 को लेकर है कि क्या ट्रंप प्रशासन ने चीन के साथ सीक्रेट समझौता कर लिया है जिसके तहत अब वो चीन के रास्ते में नहीं आएगा और चीन अमेरिका के रास्ते में नहीं आएगा?
G-2 थ्योरी की बुनियाद यही है कि अमेरिका और चीन, इन दोनों ने दुनिया को दो हिस्सों में बांट लिया है और आपसी संघर्ष को रोकने के लिए दोनों देशों के बीच समझौता हो गया है। हालांकि अमेरिका के पैसिफिक कमांड का कहना है कि उसका मुख्य मिशन वही है। अमेरिकी अधिकारियों ने नाम बदलने को मुख्य रूप से प्रतीकात्मक बताया है जिसका मकसद इसकी ‘गहरी ऐतिहासिक जड़ों’ को फिर से स्थापित करना है। लेकिन रणनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका ने भारत के साथ फिर से ‘धोखेबाजी’ की है।










































