क्या आपने तय समय पर KYC अपडेट नहीं कराया तो बैंक आपके खाते से लेन-देन पर रोक सकता है, आइए जानते हैं कि RBI के नियम।
डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ बैंकिंग फ्रॉड की घटना भी बढ़ी है। इसको देखते हुए बैंकों ने कई बदलाव किए हैं। खाताधारकों को बीच-बीच में बैंक की ओर से सावधानी बरतने के लिए मैसेज और कॉल से जानकारी दी जाती है। कई बार बैंक की ओर से KYC अपडेट कराने के भी मैसेज आते हैं। ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल है कि अगर हमने ‘नो योर कस्टमर (KYC)’ नहीं कराया तो क्या बैंक हमारे बैंक अकाउंट को फ्रीज कर देंगे। अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो आइए बताते हैं कि इस बारे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का नियम क्या कहता है?
KYC क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुसार, KYC एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके जरिए कोई रेगुलेटेड एंटिटी (RE) जिसमें बैंक भी शामिल हैं- अपने ग्राहक की पहचान, पता, उनके व्यवसाय की प्रकृति और वित्तीय स्थिति के बारे में जानकारी हासिल करती है और उसकी पुष्टि (वेरिफिकेशन) करती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संस्था अपने ग्राहकों को जानती है, और साथ ही यह मनी लॉन्ड्रिंग, आतंकवाद को फंडिंग देने या हथियारों के प्रसार जैसी गतिविधियों के लिए सेवाओं के दुरुपयोग को रोकता है।
KYC पर RBI के नियम क्या कहते हैं?
नियमों के अनुसार, भारत में KYC एक अनिवार्य आवश्यकता है। आमतौर पर, बैंक और अन्य रेगुलेटेड एंटिटी को कोई भी खाता खोलते समय KYC प्रक्रिया पूरी करनी होती है।यह तब भी जरूरी है जब कोई ऐसा व्यक्ति (जिसका बैंक में कोई खाता नहीं है) 50,000 रुपये या उससे अधिक का लेन-देन करता है। अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर के लिए भी KYC की आवश्यकता होती है। अगर ग्राहक की जानकारी को लेकर कोई संदेह हो, तो भी KYC की मांग की जा सकती है। इसके अलावा, RBI के नियमों के अनुसार, जब बैंक कोई वित्तीय उत्पाद बेचते हैं या 50,000 रुपये से अधिक के क्रेडिट कार्ड भुगतान को प्रोसेस करते हैं, तब भी KYC लागू होता है।
अगर KYC पूरा नहीं किया गया है, तो बैंकों को ग्राहकों को इसे पूरा करने के लिए रिमाइंडर भेजने होते हैं। बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी अगर KYC अपडेट नहीं किया जाता है, तो ‘प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग (रिकॉर्ड्स का रखरखाव) नियम, 2005’ के तहत RBI के नियम बैंकों को उचित नोटिस देने के बाद खाता बंद करने की अनुमति देते हैं।
नियमों के अनुसार, अगर किसी खाते में दो साल तक ग्राहक की तरफ से कोई लेन-देन (customer-induced transaction) नहीं होता है, तो उसे ‘इनऑपरेटिव’ (निष्क्रिय) खाता मान लिया जाता है।
RBI ने अपनी वेबसाइट पर बताया है कि निष्क्रिय खातों को फिर से चालू करने के लिए, ग्राहक RE (रेगुलेटेड एंटिटी) की अपनी होम ब्रांच या किसी अन्य ब्रांच में जाकर अपनी KYC जानकारी/डेटा अपडेट कर सकते हैं। बैंक इन निष्क्रिय खातों को तभी सक्रिय करेंगे, जब वे ‘KYC पर मास्टर डायरेक्शन’ में दिए गए KYC दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन कर लेंगे।







































