Longevity: मिल गया 100 साल तक जीने का राज! 316 साल वाली तीन बहनों की लंबी उम्र में छिपा यह सीक्रेट?

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नई दिल्ली: लंबी उम्र और स्वस्थ रहने की ख्वाहिश हर किसी की होती है। पूरी दुनिया में इसे लेकर प्रयोग हो रहे हैं कि कैसे इंसान की उम्र बढ़ाई जा सके। यहां तक कि ऐसी खबरें आती रहती हैं कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी अपनी उम्र बढ़ाने को लेकर फिक्रमंद रहते हैं और कोशिशें कर रहे हैं। मगर, अब शायद लंबी उम्र पाने का राज मिल सकता है।

ब्राजील की तीन बहनों की उम्र 316 साल

  • वैज्ञानिकों को लंबे जीवन का राज शायद ब्राजील की उन तीन बहनों में मिल सकता है, जिनकी संयुक्त रूप से उम्र 316 साल है। इसी महीने उनके नाम दुनिया की सबसे ज्यादा उम्र वाली तीन बहनों के रूप में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्र्स में शामिल हो सकते हैं।
  • ब्राजील के रियो डी जनेरियो में रहने वाली तीन बहनें ज़ुलिना डी डेउस नुनेस (103), जोराइडे डी डेउस मोटा (104) और लेविटा डी डेउस नुनेस (109) उम्र के इस पड़ाव पर भी बेहद स्वस्थ जिंदगी जी रही हैं।
  • DNA टेस्टिंग से प्रोटेक्टिव जीन को समझने की कोशिश
  • मयाना जैट्ज के मुताबिक, डीएनए टेस्टिंग की बदौलत हम प्रोटेक्टिव जीन को समझेंगे। हम जानते हैं कि उनमें से कई हैं। वह ह्यूमन जीनोम रिसर्च सेंटर को भी कोऑर्डिनेट कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग ऐसे हैं, जो 100 साल से ज्यादा की उम्र जी चुके हैं। खासतौर पर ऐसे परिवार जिनमें कई लोग शतक लगा चुके हैं। इससे हमें सटीक शोध करने में मदद मिलेगी।
  • आनुवांशिक फैक्टर पर्यावरणीय से ज्यादा प्रभावी
  • वैज्ञानिकों का मानना है कि कई आनुवांशिक फैक्टर हैं, जो लंबी उम्र के लिए बड़ी भूमिका निभाता है। यह पर्यावरणीय प्रभाव से ज्यादा प्रभावी होता है।
  • रियो डी जनेरियो में रहने वाली तीन बहनें ज़ुलिना डी डेउस नुनेस (103), जोराइडे डी डेउस मोटा (104) और लेविटा डी डेउस नुनेस (109) की पहचान ‘लॉन्गेवीक्वेस्ट’ (LongeviQuest) के जरिए की गई। यह एक ग्लोबल संस्था है जो लंबी उम्र के रिकॉर्ड की पुष्टि करती है और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के साथ मिलकर काम करती है।
  • लॉन्गेवीक्वेस्ट के CEO बेन मेयर्स ने कहा, ‘जब बहनें इतनी उम्र तक पहुंचती हैं, तो साफ तौर पर इसमें जेनेटिक (आनुवंशिक) कारण अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन चूंकि वे एक-दूसरे के पास रहती हैं, इसलिए उन्हें एक-दूसरे का सहारा भी मिलता है और जरूरत पड़ने पर परिवार मदद कर सकता है। इसमें निश्चित रूप से एक कम्युनिटी (समुदाय) वाला पहलू भी है।’

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