MP News: बच्चों की बीमारी के बीच बालाघाट प्रशासन का विवादित फरमान, अस्पताल में फोटो खींचने पर रोक लगाने के बाद आदेश रद्द

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बालाघाट जिला प्रशासन ने अस्पताल के अंदर फोटोग्राफी पर रोक लगाने का आदेश जारी किया, लेकिन विरोध और चर्चा के बाद कुछ ही घंटों के भीतर उसे वापस ले लिया। अधिकारियों ने सफाई दी कि यह आदेश जल्दबाजी में जारी हुआ था और इसका मकसद मीडिया कवरेज को रोकना नहीं था। अस्पताल में अभी भी कई बच्चों का इलाज चल रहा है।बालाघाट: जिले में जिला प्रशासन के एक फैसले ने अचानक सियासी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी। प्रशासन ने गुरुवार को एक आदेश जारी कर अस्पतालों के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक लगा दी थी, लेकिन जैसे ही इस मामले ने तूल पकड़ा, प्रशासन ने कुछ ही घंटों के भीतर अपना यह आदेश वापस भी ले लिया। अधिकारियों ने सफाई दी है कि यह आदेश जल्दबाजी में जारी हो गया था और इसका उद्देश्य मीडिया कवरेज पर किसी भी तरह की पाबंदी लगाना नहीं था।

क्या था पूरा मामला और क्यों मचा हंगामा?

यह पूरा वाकया ऐसे समय में सामने आया जब जिला अस्पतालों में बड़ी संख्या में बच्चे इलाज के लिए भर्ती थे। मिली जानकारी के मुताबिक, जिले में अब तक 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिनमें से 379 मरीजों को इलाज के बाद डिस्चार्ज किया जा चुका है, जबकि 52 बच्चों का इलाज अभी भी जारी है। अस्पताल के भीतर बच्चों की गंभीर स्थिति और इलाज से जुड़ी तस्वीरें सामने आने के बीच अचानक फोटोग्राफी पर रोक लगाने का यह आदेश आया, जिसे लेकर सवाल उठने लगे थे।कलेक्टर ने दी सफाई, कहा- जल्दबाजी में जारी हुआ था आदेश

इस मामले पर सफाई देते हुए बालाघाट के जिला कलेक्टर कुमार सत्यम ने बताया कि अस्पतालों के नियमों के तहत प्रदर्शनों आदि पर रोक लगाने के लिए आदेश जारी किया जाना था, लेकिन इसे जल्दबाजी में गलत तरीके से निकाल दिया गया। कलेक्टर ने साफ किया, ‘यह आदेश मीडिया कर्मियों के लिए बिल्कुल नहीं था। लेकिन जो आदेश जारी हुआ वह स्पष्ट नहीं था, इसलिए हमने तुरंत प्रभाव से इसे वापस ले लिया है।’

मौतों और बीमारियों पर प्रशासन का बयान

प्रशासन की तरफ से यह स्पष्टीकरण तब आया जब खासकर आदिवासी समुदायों के बच्चों की सेहत को लेकर चिंताएं बढ़ गई थीं। जिले में बच्चों की मौत की खबरों ने पहले ही स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए थे। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सामने आ रही बीमारियां किसी एक खास बीमारी से जुड़ी नहीं हैं। कलेक्टर कुमार सत्यम ने कहा कि हमने व्यापक अभियान चलाए हैं, बच्चों के बीमार होने के पीछे कई तरह के कारण हैं। हर केस मलेरिया या किसी एक विशेष बीमारी का नहीं है, बल्कि इनमें मौसमी फ्लू और बुखार के मामले भी शामिल हैं। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की घबराने की कोई बात नहीं है।

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