Ramayana Review: राम सी ‘सरल’, रावण की लंका सी ‘भव्य’

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Ramayana Review: डायरेक्टर नितेश तिवारी और निर्माता नमित मल्होत्रा ने जब रामायण का ऐलान किया था, तब इन दोनों ने केवल हॉलीवुड की वीएफएक्स हैवी मूवीज के साथ ही रेस लगाना शुरू नहीं की थी बल्कि सालों पहले आई निर्माता रामानंद सागर की उस रामायण को भी चुनौती के रूप में स्वीकार किया था, जो पहले से ही रेखा के उस पार विजेता बनकर खड़ी है। रामानंद सागर की रामायण भारत के गांव-गांव में सालों से मशहूर है, जिसकी सफलता से पार जाने के लिए नमित-नितेश को एक ऐसी लाइन खींचनी थी, जो उनकी अपनी हो क्योंकि रामानंद सागर की रामायण द्वारा खींची गई लाइन को मिटाना भारत में असंभव है। रामायण की रिलीज से पहले हर किसी के दिमाग में यही सवाल था कि क्या नमित और नितेश, रामानंद सागर की रामायण के बराबर ही लाइन खींच पाएंगे? रणबीर कपूर, यश, साई पल्लवी, लारा दत्ता और अरुण गोविल जैसे कलाकारों से सजी रामायण ने रिलीज के बाद ये जवाब दे दिया है और बताया है कि भारत की कहानियों को अगर श्रद्धाभाव से बनाया जाए तो वो दुनियाभर के दर्शकों के बीच में अपनी जगह जरूर बनाएंगी। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Ramayana Public Review: रावण-जटायु के युद्ध सीन ने जीता दिल, Yash की एक्टिंग के दीवाने हुए फैंस

फिल्म रामायण की कहानी देवों और असुरों के महायुद्ध से शुरू होती है, जिसमें इंद्रदेव भगवान विष्णु की मदद से असुरों का नाश करते हैं और उन्हें पाताल लोक में ढकेल देते हैं। यहां असुर कीड़े-मकोड़ों की तरह जी रहे हैं, जो कैकेसी को स्वीकार नहीं है। वो अपने असुर वंश को वैभव की उस चोटी पर देखना चाहती है, जिसका ख्वाब उसके पिता सुमाली ने संजोया था। वो जानती है कि सिर्फ असुर रहकर देवों को नहीं हराया जा सकता है, जिस कारण वो महर्षि विश्रवा के साथ विवाह करती है, जिनसे रावण, विभीषण, कुंभकरण और शूर्पणखा पैदा होते हैं। जहां कुंभकरण और शूर्पणखा पर असुरों का ज्यादा प्रभाव है तो वहीं पर विभीषण ऋषियों की तरह शांत और नीति पर चलने वाला है। इन चारों बच्चों में सिर्फ रावण ही है जो असुरों सी ताकत रखता है और ऋषियों सा दिमाग। बस फिर क्या… कैकेसी अपने बड़े बेटे रावण को उस तपस्या पर भेजती है, जहां वो लंकापति बनने की ताकत अर्जित करता है और भगवान ब्रह्मा का वो वरदान पाता है, जिसके बाद उसका वध दुनिया में एक ‘साधारण मानव’ के अलावा कोई भी नहीं कर सकता है। इसके बाद रावण पृथ्वी पर अत्याचार की वो कहानी लिखना शुरू करता है कि खुद इंद्रदेव को भगवान विष्णु के पास जाकर प्रार्थना करनी पड़ती है कि वो पृथ्वी पर साधारण मानव के रूप में अवतार लें ताकि रावण को रोका जा सके। TimesNow NavBharat पर ये खबर भी पढ़ें: Ramayana First Half X Review: रणबीर-यश को साथ देख फैंस हुए एक्साइटेड, सिनेमाघरों में छाया जादू

एक तरफ जहां रावण का यश बढ़ रहा है, तो वहीं दूसरी ओर भगवान विष्णु अयोध्या नरेश दशरथ के घर पर राम के रूप में जन्म लेते हैं। जहां एक तरफ अयोध्या में राम ऋषियों से शास्त्र और शस्त्र का ज्ञान ले रहे हैं, वहीं दूसरी ओर रावण अंहकार में चूर होता जा रहा है और आखिरकार वो पल आता है, जहां दशरथ को राम के लिए 14 वर्ष के वनवास पर भेजना पड़ता है और यहीं से शुरू होती है रावण के वध की वो कहानी, जिसका अंत पृथ्वी पर रामराज्य के आरंभ के साथ होगा। डायरेक्टर नितेश तिवारी ने रामायण के पहले भाग में सीता हरण तक की कहानी रखी है, जिसके आगे की रामायण दूसरे भाग में दिखाई जाएगी।

फिल्म रामायण में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में हैं, जो शांत और संयमित नजर आते हैं। रणबीर को पर्दे पर साधारण दिखते हुए भगवान सी दिव्यता पेश करनी थी, जिसमें वो सफल रहते हैं। हां कुछ जगह पर उनके एक्सप्रेशन रिपीटेटिव लगते हैं लेकिन जब वो राम के रूप में नीति की बात करते हैं या फिर रावण से प्रतिशोध लेने के लिए गुस्सा होते हैं तो दिल जीत लेते हैं। साई पल्लवी को रिलीज से पहले काफी ट्रोल किया जा रहा था कि वो मिसकास्ट हैं लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित किया है। साई पल्लवी का काम उन्हें जरूर देखना चाहिए जो अब तक उन्हें ट्रोल कर रहे थे। रावण के रोल में यश हैं, जो अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुके हैं और रामायण में भी उन्होंने साबित किया है कि ग्रे कैरेक्टर उनसे बेहतर कोई दूसरा अभिनेता नहीं निभा सकता है। वो महाज्ञानी और अहंकारी दशानन के रोल के लिए एकदम परफेक्ट हैं। हिन्दी में यश के लिए शरद केलकर ने आवाज दी है, जिसकी वजह से वो और भी प्रभावी नजर आते हैं।

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रामायण में लक्ष्मण का रोल रवि दुबे ने निभाया है, जिनके लिए अलग से तारीफ बनती है। उनका रोल नितेश तिवारी ने इतना अच्छा लिखा है कि वो रणबीर कपूर जैसे अभिनेता के सामने भी 19 नहीं पड़ते हैं। उनका मजाकिया अंदाज रामायण की हाईलाइट है, जिसकी वजह से दर्शकों के चेहरों पर मुस्कुराहट आती है।

इन चारों के अलावा फिल्म में अरुण गोविल, इंदिरा कृष्णन, अनुपम खेर, लारा दत्ता, आदित्य कोठारे, नितेश शर्मा, विवेक ओबेरॉय, शीबा चड्ढा, मुकेश तिवारी, रकुलप्रीत सिंह और काजल अग्रवाल जैसे और भी कई बेहतरीन कलाकार हैं। इन सभी को रामायण में कास्ट करने के लिए कास्टिंग टीम की जितनी तारीफ की जाए, उतनी कम है क्योंकि हर एक कलाकार अपने रोल में परफेक्ट है।

रामायण को डायरेक्ट करने के लिए भारतीय कल्चर को समझने वाले एक व्यक्ति की जरूरत थी, जिसके लिए नितेश तिवारी से बेहतर शायद ही दूसरा कोई होता। उन्होंने रामायण की शिक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सीन्स को पर्दे पर उकेरा है। नितेश तिवारी रामायण के दौरान हंसाते हैं, रुलाते हैं और लगातार बांधे रखते हैं। एक कहानी जिसे पीढ़ियों से सुना जाता है, उसे इतने दिलचस्प तरीके से पेश करना और ध्यान रखना कि किसी की भावनाएं आहत ना हों, आसान नहीं था, जिसके लिए नितेश की तारीफ बनती है।

अब बात करते हैं निर्माता नमित मल्होत्रा की जिन्होंने इस महागाथा को वीएफएक्स की उस चाशनी में डुबो कर पेश करने में अहम भूमिका निभायी है, जिसके बाद राम की कहानी का स्वाद 100 गुना बढ़ गया है। नमित मल्होत्रा ने रामायण प्रोजेक्ट पर 4000 करोड़ खर्चे हैं और स्क्रीन पर वो पैसा नजर भी आता है। सैकड़ों वीएफएक्स आर्टिस्ट्स ने रातों-रात जगकर रामायण के सीन्स पर काम किया है, जिनकी मेहनत भव्यता के रूप में पर्दे पर दिखती है। जटायु-रावण युद्ध, राम-खर और दूषण युद्ध, रावण-कुबेर युद्ध जैसे कई सीन्स हैं जिनसे नजरें हटाना बेहद मुश्किल है।

फिल्म रामायण की बात म्यूजिक पर चर्चा किए बिना पूरी नहीं हो सकती है। एआर रहमान के गानों की सोशल मीडिया पर भले ही कितनी भी आलोचना क्यों ना हुई हो लेकिन जब ये गाने पर्दे पर आते हैं तो कहानी को खूब सपोर्ट करते हैं। नितेश तिवारी ने जिस टैंपो पर फिल्म को लिखा है, उसके हिसाब से एआर रहमान ने म्यूजिक दिया है जो दिलों को छूता है। इन्हें कुमार विश्वास ने लिखा है, जिनकी कलम की जादूगरी को लोग वक्त के साथ समझेंगे। हंस जिमर का बैकग्राउंड म्यूजिक भी शानदार है, जो रामायण की भव्यता को बढ़ाता है।

फिल्म रामायण की कमियों की बात करें तो मेकर्स ने यूं तो कोई मौका नहीं दिया है। हां कुछ जगहों पर रणबीर कपूर के एक्सप्रेशन थोड़े बेहतर हो सकते थे और रामायण का जो हिस्सा आम जनमानस की जिंदगियों का हिस्सा रोज रहता है उसे थोड़ी और रफ्तार के साथ पेश किया जा सकता था ताकि स्क्रीन टाइम 10-12 मिनट कम हो जाता तो थोड़ा बेहतर रहता। जो दर्शक रामायण को नॉर्मल स्क्रीन्स पर देखेंगे, उन्हें रामायण का ये हिस्सा थोड़ा लम्बा महसूस हो सकता है।

रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश और रवि दुबे स्टारर रामायण एक संतुलित कहानी है, जिसमें रावण की लंका की भव्यता के साथ भगवान राम की सौम्यता और संयम भी है। ये फिल्म दर्शकों को थिएटर से शांत करके भेजती है और नीति से जीवन जीने की प्रेरणा देती है। हम अपनी ओर से रामायण को 4 स्टार देते हैं।

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आर्टिकल की समाप्ति

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