नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) की तपिश में भारतीय अर्थव्यवस्था भी झुलसेगी। जी हां, केंद्रीय वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक रिपोर्ट (MER) में स्वीकार किया गया है कि पश्चिम एशिया संघर्ष से भारत के सप्लाई चेन को बड़ा झटका लगा है। इससे महंगाई भड़कने का जोखिम बढ़ गया है।
क्या है इस रिपोर्ट में?
वित्त मंत्रालय की तरफ से अप्रैल महीने के लिए मासिक समीक्षा रिपोर्ट बुधवार को जारी किया गया। इसमें बताया गया है कि पश्चिम एशिया संकट से भारत का सप्लाई चेन बाधित हुआ है। इससे कारोबार और वित्तीय प्रवाह पर जोखिम बढ़ गया है। हालांकि इसमें कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, नीतिगत समर्थन, सुदृढ़ वित्तीय प्रणाली और सार्वजनिक निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक सुरक्षा मिलेगी। इस समय कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के साथ साथ रासायनि खान की सप्लाई को लेकर जो लंबी अनिश्चितता उभरी है, वह देश की वृहद आर्थिक स्थिरता की मजबूती की परीक्षा ले सकती है।
अन नीनो का प्रभाव भी खेल बिगाड़ेगा
इस रिपोर्ट में ‘अल नीनो’ के प्रभाव का भी जिक्र है। इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्य से कम रहने की आशंका जताई गई है। ऐसा होने से अधिकांश जिलों में औसत से कम बारिश होने का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि ‘अल नीनो’ एक खास जलवायु स्थिति है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे भारत में मानसून कमजोर पड़ जाता है। मानसून कमजोर पड़ने से खरीफ फसल की उत्पादकता पर प्रभाव पड़ सकता है।
भड़केगी महंगाई, बढ़ेगा घाटा
वित्त मंत्रालय की यह रिपोर्ट कहती है कि इन परिस्थितियों में महंगाई, राजकोषीय घाटा और चालू खाते का घाटा बढ़ने का जोखिम है, जबकि आर्थिक वृद्धि पर दबाव पड़ सकता है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत वित्त वर्ष 2026-27 में मजबूती के साथ कदम रख रहा था और वृद्धि दर 7-7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान था। लेकिन पश्चिम एशिया युद्ध के कारण वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में बदलाव से यह अनुमान प्रभावित हुआ है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।









































