आंधी-तूफान और बारिश से मिली गर्मी से राहत, कई जगह पेड़ गिरे, बिजली व्यवस्था प्रभावित

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भीषण गर्मी और नौतपा की तपिश से जूझ रहे जिलेवासियों को 30 मई को मौसम में आए अचानक बदलाव से कुछ राहत मिली। दोपहर बाद तेज आंधी, तूफान और बारिश ने गर्मी का असर कम कर दिया, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। हालांकि मौसम के इस बदलाव ने कई स्थानों पर नुकसान भी पहुंचाया और जनजीवन कुछ समय के लिए प्रभावित हो गया। बीते कुछ दिनों से जिले में नौतपा का असर देखने को मिल रहा था। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा था। लोग गर्मी और उमस से परेशान थे। इसी बीच शुक्रवार को अचानक मौसम ने करवट ली और आसमान में बादल छा गए। कुछ ही देर में तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। तेज हवा और बारिश के कारण शहर के कई क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सड़क किनारे खड़े लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए, वहीं दोपहिया वाहन चालक भी बारिश और तेज हवाओं से बचने के लिए दुकानों एवं शेडों के नीचे रुक गए। आंधी-तूफान की वजह से शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई बड़े पेड़ उखड़कर जमीन पर गिर गए। कुछ स्थानों पर पेड़ सड़कों पर गिरने से आवागमन भी प्रभावित हुआ। वहीं कई इलाकों में बिजली के तार और केबल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई, जिसके कारण कुछ समय के लिए विद्युत आपूर्ति बाधित रही। बारिश के बाद मौसम सुहावना हो गया और तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लोगों ने लंबे समय बाद गर्मी से राहत महसूस की। बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर भी लोगों के बीच मौसम परिवर्तन की चर्चा होती रही। शहर में गिरे पेड़ों और क्षतिग्रस्त बिजली लाइनों को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभागों की टीमें सक्रिय रहीं। विद्युत विभाग द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल करने का कार्य देर रात तक जारी रहा।

पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी और तपते मौसम के बीच शनिवार देर शाम मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने बादल छा गए और देखते ही देखते तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। हालांकि बारिश ज्यादा देर तक नहीं हुई, लेकिन तेज हवाओं और तूफान ने जिलेभर में काफी नुकसान पहुंचाया। एक ओर जहां लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिली, वहीं दूसरी ओर आंधी-तूफान ने आमजन की मुश्किलें बढ़ा दीं। जानकारी के अनुसार देर शाम अचानक मौसम बदलने के बाद तेज हवाएं चलने लगीं। कुछ ही देर में तेज आंधी और बारिश का दौर शुरू हो गया। तेज हवा के कारण शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई बड़े पेड़ धराशायी हो गए। वहीं कई स्थानों पर पेड़ों की शाखाएं टूटकर सड़कों पर गिर गईं, जिससे कुछ समय के लिए आवागमन भी प्रभावित रहा। आंधी-तूफान का सबसे अधिक असर विद्युत व्यवस्था पर देखने को मिला। कई जगह पेड़ गिरने से विद्युत लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि कुछ स्थानों पर बिजली के खंभे भी क्षतिग्रस्त हो गये है। विद्युत केबल टूटने और लाइनों में फाल्ट आने के कारण शहर के अनेक वार्डों और आसपास के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। कई इलाकों में घंटों तक अंधेरा छाया रहा। विद्युत विभाग के कर्मचारियों ने तत्काल मोर्चा संभालते हुए क्षतिग्रस्त लाइनों और खंभों को सुधारने का कार्य शुरू किया। विभागीय टीम देर रात तक विभिन्न क्षेत्रों में बिजली बहाली के प्रयासों में जुटी रही। हालांकि जिन स्थानों पर नुकसान अधिक हुआ, वहां देर रात तक भी विद्युत आपूर्ति पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी। आंधी-तूफान के कारण कई निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा। कुछ स्थानों पर पेड़ गिरने से घरों के बाहर खड़े वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। एक स्थान पर चौपहिया वाहन पर पेड़ गिर जाने से वाहन मालिक को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। वहीं छोटे दुकानदारों की अस्थायी दुकानें और टीन शेड भी तेज हवाओं की चपेट में आकर प्रभावित हुए। इधर, बेमौसम बारिश ने नगर पालिका की व्यवस्थाओं की भी पोल खोल दी। शहर के कई क्षेत्रों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण थोड़ी देर की बारिश में ही पानी सड़कों पर जमा हो गया। विशेष रूप से निर्माणाधीन क्षेत्रों में जल निकासी की समस्या अधिक देखने को मिली। हनुमान चौक में एक बार फिर बारिश का पानी भर जाने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के दौरान यह समस्या सामने आती है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इसी तरह अंबेडकर चौक सहित शहर के अन्य प्रमुख चौराहों और मार्गों पर भी पानी जमा होने की स्थिति निर्मित हो गई। गुजरी क्षेत्र स्थित कृष्ण मंदिर परिसर में भी जलभराव की समस्या देखने को मिली। नालियों की पर्याप्त सफाई और पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण मंदिर परिसर के आसपास पानी जमा हो गया, जिससे स्थानीय लोगों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर पार्षद सुधीर चिले और नागरिकों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि मानसून आने से पहले जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन थोड़ी सी बारिश में ही कई क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति बन जाती है। पार्षदों ने नगर पालिका से जल्द ही नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की है।

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