बीएससी नर्सिंग की डिग्री बनी परेशानी, रजिस्ट्रेशन न होने से 47 छात्राओं का भविष्य संकट में,साढ़े चार साल की पढ़ाई, लाखों रुपए खर्च, फिर भी न नौकरी मिल रही, न नर्सिंग काउंसिल में हो रहा पंजीयन

0

सरदार पटेल यूनिवर्सिटी की वर्ष 2020-21 बैच की करीब 47 छात्राओं ने अपनी डिग्री की मान्यता को लेकर जिला प्रशासन से शिकायत की है। छात्राओं ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपते हुए यूनिवर्सिटी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मीडिया से चर्चा करते हुए छात्राओं ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा उनसे बीएससी नर्सिंग का पूरा कोर्स कराया गया और निर्धारित फीस के रूप में लाखों रुपये भी लिए गए। कोर्स पूरा होने के बाद उन्हें डिग्री भी प्रदान कर दी गई, लेकिन अब जब वे नर्सिंग काउंसिल की वेबसाइट पर अपना रजिस्ट्रेशन कराने पहुंचीं तो वहां यूनिवर्सिटी का नाम ही प्रदर्शित नहीं हो रहा है। छात्राओं का कहना है कि रजिस्ट्रेशन नहीं होने की वजह से वे परीक्षाओं में आवेदन नहीं कर पा रही हैं और निजी अस्पतालों में नौकरी के अवसरों से भी वंचित हो रही हैं। इससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है। छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपने करियर के लिए लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन अब उनकी डिग्री बेकार साबित होती नजर आ रही है। उन्होंने प्रशासन से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की है।

अलग अलग जिले की लगभग 47 बेटियों ने नर्सिंग के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का सपना देखा था। परिवारों ने अपनी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद कर्ज लेकर, जमीन गिरवी रखकर और अपनी जमा पूंजी खर्च कर बेटियों को बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कराई, लेकिन अब पढ़ाई पूरी होने के बाद यही छात्राएं अपने भविष्य को लेकर गहरे संकट में हैं। बुधवार 29 अप्रैल को स्थानीय सर्किट हाउस में सरदार पटेल यूनिवर्सिटी से बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर चुकी करीब 15 से 20 छात्राएं मीडिया के सामने पहुंचीं और अपनी पीड़ा साझा की। छात्राओं ने बताया कि उनके बैच की कुल 47 छात्राओं ने साढ़े चार वर्षों तक लगातार पढ़ाई की और प्रत्येक छात्रा ने करीब 5 लाख रुपए तक फीस एवं अन्य खर्चों में खर्च किए। लेकिन अब जब वे नौकरी के लिए आगे बढ़ना चाहती हैं तो उनका रजिस्ट्रेशन ही नहीं हो पा रहा है। छात्राओं ने बताया कि नर्सिंग क्षेत्र में किसी भी सरकारी भर्ती या अच्छे निजी अस्पताल में नौकरी के लिए नर्सिंग काउंसिल में पंजीयन अनिवार्य होता है। जब उन्होंने ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू की तो वहां उनकी यूनिवर्सिटी का नाम ही दिखाई नहीं दिया। यूनिवर्सिटी का नाम पोर्टल पर नहीं आने के कारण उनकी पूरी प्रक्रिया अटक गई। इस समस्या के कारण कई छात्राएं सरकारी भर्तियों में आवेदन करने से वंचित रह गईं। उनका कहना है कि बीते कुछ महीनों में कई शासकीय वैकेंसी निकलीं, लेकिन रजिस्ट्रेशन नहीं होने के कारण वे आवेदन तक नहीं कर सकीं। वहीं निजी अस्पतालों में भी उन्हें या तो नौकरी नहीं मिल रही या बहुत कम वेतन पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं – खुशबू भारद्वाज

छात्रा खुशबू भारद्वाज ने भावुक होते हुए बताया कि उनके परिवार ने बड़ी उम्मीदों के साथ उन्हें पढ़ाया था। परिवार को भरोसा था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वह अच्छी नौकरी कर परिवार का सहारा बनेंगी, लेकिन अब हालात ऐसे हैं कि वह खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हैं।उन्होंने कहा कि लाखों रुपए खर्च करने और वर्षों तक मेहनत करने के बाद भी आज वह किसी सरकारी भर्ती में आवेदन नहीं कर पा रही हैं। उनका कहना है कि उनकी जिंदगी के महत्वपूर्ण पांच साल बर्बाद हो गए।

यूनिवर्सिटी अपनी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं – प्रिंसी

बरघाट निवासी छात्रा प्रिंसी ने बताया कि जैसे ही उन्हें रजिस्ट्रेशन में समस्या की जानकारी मिली, उन्होंने कॉलेज प्रबंधन और यूनिवर्सिटी से संपर्क किया। कई बार फोन किए गए, कई बार व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की गई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला। उन्होंने बताया कि समस्या के समाधान के लिए वे कई बार भोपाल गईं और संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाए। यहां तक कि सीएम हेल्पलाइन में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन उसके बाद भी कोई समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद यूनिवर्सिटी ने उनकी बात सुनना तक बंद कर दिया। छात्राओं ने आरोप लगाया कि प्रवेश के समय कॉलेज प्रबंधन द्वारा कोर्स की मान्यता और भविष्य को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन अब जब वास्तविक समस्या सामने आई तो यूनिवर्सिटी जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।

सभी निजी कॉलेजों की विस्तृत जांच कराई जाए – सौरभ

इस पूरे मामले में छात्राओं की लड़ाई लड़ रहे सौरभ लोधी ने कहा कि यह मामला केवल 47 छात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के निजी शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जिले में संचालित सभी निजी कॉलेजों की विस्तृत जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि जिन कोर्सों और डिग्रियों के नाम पर छात्रों से लाखों रुपए वसूले जा रहे हैं, वे वास्तव में मान्यता प्राप्त हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले समय में और भी छात्र-छात्राएं इसी तरह ठगी का शिकार हो सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here