Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल में करारी हार के बाद भी टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। आज ममता ने हार के बाद पहली प्रेस कांफ्रेंस कर केंद्र सरकार से लड़ाई का नया ऐलान कर दिया। ममता ने कहा कि मुझे हराया गया है। उन्होंने बीजेपी और चुनाव आयोग पर कई आरोप लगाते हुए कहा कि साजिश करके उन्हें हराया गया है। ममता ने कहा कि मैं हारी नहीं हूं, मैं राजभवन जाकर इस्तीफा नहीं दूंगी। ममता के तेवरों से साफ हो गया है कि वह बीजेपी, चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के साथ अपनी लड़ाई को आगे ले जाने का मंसूबा बना चुकी हैं।
क्या है दीदी की मंशा?
स्पष्ट है कि हार के बाद भी अपनी हार को न मानना और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाया ममता की आक्रामक रणनीति का हिस्सा है। बीजेपी और टीएमसी के बीच चुनाव से पहले जो सियासी टकराव दिख रहा था, ममता उसे अब भी जारी रखना चाहती हैं। ममता ने हमेशा की तरह एक बार फिर चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस्तीफा न देने की मंशा बताती है कि बंगाल में सियासी माहौल को गर्म रखा जाए और अपने कार्यकर्ताओं के बीच संदेश दिया जाए कि लड़ाई अभी जारी है। ममता बनर्जी के 15 वर्षों के शासन का अंत उनके लिए किसी दुस्वप्न से कम नहीं है। उन्होंने चुनाव के दौरान बढ़ चढ़कर दावे किए थे कि बंगाल की जनता बीजेपी को पूरी तरह नकार देगी। एसआईआर को बड़ा मुद्दा बनाते हुए ममता ने दावा किया था बीजेपी को इसकी कीमत चुकानी होगी।
अब क्या होगा आगे?
सबसे बड़ा सवाल है कि अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी तो आगे क्या होगा। साफ तौर पर इससे एक नया संकट शुरू होगा। चूंकि ममता अभी भी मुख्यमंत्री पद पर हैं और इस्तीफे के बाद ही नया सीएम शपथ ले सकता है। ममता अगर अड़ी रहीं तो नई सरकार बनने का रास्ता साफ नहीं होगा। इससे न सिर्फ संवैधानिक संकट खड़ा होगा, बल्कि केंद्र सरकार के साथ जबरदस्त टकराव शुरू हो जाएगा। फिर संवैधानिक तरीके से ही इस संकट से निपटा जाएगा। इसके लिए संविधान में स्पष्ट नियम हैं।
फिर राज्यपाल लेंगे फैसला
भारतीय संविधान के अनुसार, मुख्यमंत्री का पद राज्यपाल की मंजूरी तक ही बना रहता है। अनुच्छेद 164 में स्पष्ट है कि राज्यपाल ही मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। अगर मुख्यमंत्री चुनाव हार गए हैं या उनकी पार्टी सदन में बहुमत खो चुकी है और फिर भी वे इस्तीफा देने में आनाकानी करते हैं, तो राज्यपाल को उन्हें पद से बर्खास्त करने का पूरा अधिकार है। राज्यपाल एक आधिकारिक आदेश जारी कर वर्तमान सरकार को तत्काल प्रभाव से भंग कर सकते हैं।
करना होगा बहुमत साबित
संवैधानिक परंपराओं के तहत, अगर मुख्यमंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं, तो राज्यपाल विधानसभा का विशेष सत्र बुला सकते हैं। इस सत्र में बहुमत साबित करने के लिए अविश्वास प्रस्ताव लाया जाता है। भाजपा के पास 206 सीटें हैं और टीएमसी के पास सिर्फ 80, इसलिए ममता बनर्जी सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाएंगी। जाहिर है अविश्वास प्रस्ताव पारित होते ही मुख्यमंत्री ममता को हर हाल में अपनी कुर्सी छोड़नी होगी।
ममता ने क्या-क्या कहा?
पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, बंगाल में यह(वोट चोरी) और ज्यादा हुआ क्योंकि हमने बहुत कड़ी लड़ाई लड़ी। हमारी लड़ाई सीधे तौर पर भाजपा के साथ नहीं थी, हमारी लड़ाई चुनाव आयोग के साथ थी। अगर चुनाव आयोग बिक जाए, न्यायपालिका से न्याय न मिले, इतने लोगों को SIR के नाम पर निकाल दिया जाए, अधिकारी एकतरफा काम करें…आप मुझे बताएं कि EVM मशीन में मतदान के बाद भी चार्ज 90-95 कैसे रहा जो 40 से नीचे होता है?… उन्होंने मतदान केंद्र में मुझे जाने नहीं दिया, उन्होंने केंद्रीय बलों और चुनाव अधिकारियों के माध्यम से हमारे कार्यकर्ताओं को टॉर्चर किया… धक्का मारते मारते मुझे बाहर निकाला गया, हमारे एजेंट को मारा गया।
ममता ने लगाए बड़े आरोप
पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, पहले चरण की मतगणना के बाद, वे कहने लगे कि भाजपा को 195-200 सीटें मिल रही हैं। आपने फाइनल रिजल्ट का इंतजार नहीं किया। आपने 5-6 चरण का भी इंतजार नहीं किया। प्रेस मीडिया के साथ उस प्रचार के बाद, भाजपा पोलिंग स्टेशन के अंदर गई और उन्होंने लोगों, काउंटिंग एजेंट्स को पीटना शुरू कर दिया। जब मुझे पता चला कि सभी काउंटिंग एजेंट्स हटा लिए गए हैं, तो मैं लगभग 30,000 से आगे चल रही थी और लगभग 5 राउंड बाकी थे। हमें 32,000 से अधिक मिलना चाहिए था। फिर BJP कैंडिडेट 200 CRPF जवानों और 200 बाहरी गुंडों के साथ अंदर गया, फिर उन्होंने हमारे लोगों को पीटा। महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया और उन्होंने सारे फॉर्म छीन लिए। जब मुझे पता चला, तो मैं वहां गई। उन्होंने मेरी कार रोक दी लेकिन मैंने दूसरा रास्ता लिया। जब मैं अंदर गई, तो CRPF ने मुझसे कहा कि मुझे जाने की इजाजत नहीं है। मैंने कहा कि मैं एक उम्मीदवार हूं…फिर मैंने RO से शिकायत की कि सामान्य हालात होने तक मतगणना तुरंत रोक दी जाए। मैंने DEO को देखा। मुझे पता है कि वह 15 दिन पहले किसी को संदेश किया था कि ‘काउंटिंग में खेला होगा’…मैं कुछ मिनट के लिए अंदर गई। उन्होंने मेरे साथ मारपीट की। उस समय CCTV बंद था।










































