जिले के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लामटा का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में स्वास्थ्य केंद्र में उपचार के लिए पहुंचे एक युवक और वहां मौजूद महिला कर्मचारी के बीच विवाद होता दिखाई दे रहा है। मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार युवक उपचार के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचा था। उसका आरोप है कि ड्यूटी समय के दौरान उसे अस्पताल में कोई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी नहीं मिला। इसके बाद उसने अस्पताल परिसर का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। इसी दौरान वहां मौजूद एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी की नजर युवक पर पड़ी। युवक का आरोप है कि महिला कर्मचारी ने वीडियो बनाने का विरोध करते हुए उससे अभद्र व्यवहार किया और उसके मोबाइल कैमरे को हाथ मारकर बंद करने का प्रयास किया। युवक ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। वीडियो वायरल होने के बाद लोगों के बीच स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। कई लोगों ने अस्पताल में कर्मचारियों की उपस्थिति और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर से भी युवक के खिलाफ शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अस्पताल प्रबंधन ने युवक पर बिना अनुमति वीडियो बनाने और शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया है।
जैसे-जैसे देश आधुनिक और डिजिटल युग की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आमजन भी अपने अधिकारों और शासकीय व्यवस्थाओं को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। पहले जहां लोग शासकीय योजनाओं और सेवाओं में आने वाली परेशानियों को चुपचाप सहन कर लेते थे, वहीं अब ग्रामीण क्षेत्रों तक के नागरिक मोबाइल और सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याओं को सीधे सार्वजनिक मंच तक पहुंचा रहे हैं। ऐसा ही एक मामला इन दिनों जिले के लामटा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जानकारी के अनुसार लामटा क्षेत्र के वनग्राम मैरा निवासी मनीष उईके ने पद्मेश न्यूज़ से दूरभाष पर चर्चा के दौरान बताया कि वह 10 जून को अपने साथियों आधार मडावी और मिथलेश उईके के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लामटा पहुंचे थे। मनीष का आरोप है कि उनके शरीर पर लगी चोट के उपचार के लिए उन्होंने अस्पताल में मलहम की मांग की थी, लेकिन वहां मौजूद एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी ने उन्हें मलहम देने से मना कर दिया। मनीष उईके ने आरोप लगाया कि जब वे स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, तब अस्पताल में कोई डॉक्टर और जिम्मेदार स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं था। उनके अनुसार अस्पताल में केवल एक महिला कर्मचारी ही मौजूद थी। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने और जिम्मेदार कर्मचारियों की अनुपस्थिति से नाराज होकर उन्होंने अपने मोबाइल फोन से अस्पताल परिसर, डॉक्टर कक्ष और वहां की स्थिति का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। युवक का आरोप है कि वीडियो बनाते समय महिला कर्मचारी ने पहले उनका मोबाइल बंद कराने का प्रयास किया और बाद में उन्हें रोकने की कोशिश की। वायरल वीडियो में महिला कर्मचारी द्वारा कटु भाषा का प्रयोग किए जाने की बात भी सामने आ रही है। इसके बाद मनीष ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर दिया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया। मनीष उईके का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन 181 पर भी दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि वीडियो वायरल होने और शिकायत दर्ज कराने के बाद कुछ लोगों द्वारा उन पर वीडियो हटाने का दबाव बनाया गया तथा धमकियां भी दी गईं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने वीडियो नहीं हटाया है और पूरे मामले में निष्पक्ष जांच एवं उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर इस मामले में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कुसुमलता नेवारे ने भी अपना पक्ष रखते हुए थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया वीडियो एडिट कर प्रस्तुत किया गया है। साथ ही उनका कहना है कि युवक द्वारा सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि और अधिक लाइक-कमेंट प्राप्त करने के उद्देश्य से जानबूझकर इस प्रकार का वीडियो बनाया गया और उन्हें उकसाने का प्रयास किया गया।
पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी – परेश उपलव
इधर पूरे मामले को लेकर जब प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी परेश उपलव से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है तथा पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके आधार पर संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर युवक स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और अभद्र व्यवहार के आरोप लगा रहा है, तो दूसरी ओर कर्मचारी वीडियो को भ्रामक और संपादित बताकर अपना बचाव कर रही है। अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की जांच पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि वायरल वीडियो और लगाए गए आरोपों के पीछे वास्तविक स्थिति क्या है।










































