नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर प्रदेश की राजनीति इन दिनों गर्माई हुई है। भारतीय जनता पार्टी जहां इस कानून को महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताकर इसका श्रेय लेने में जुटी है और इसे लेकर कांग्रेस पर लगातार निशाना साध रही है, वहीं प्रदेश सरकार द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में बालाघाट से कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे ने अपने संबोधन के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने सदन का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान विधायक अनुभा मुंजारे ने भाजपा सरकार के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात केवल भाषणों और नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह व्यवहार और प्रशासनिक व्यवस्था में भी दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व के अवसर दिए हैं और देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, लोकसभा अध्यक्ष से लेकर मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं को बैठाकर उनके सम्मान और नेतृत्व क्षमता को बढ़ावा दिया है।
विधायक अनुभा मुंजारे ने सदन में अपनी व्यक्तिगत पीड़ा साझा करते हुए कहा कि प्रदेश में डॉ. मोहन यादव सरकार के कार्यकाल में एक महिला विधायक के अधिकारों का हनन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बिना उनकी जानकारी और सहमति के उनके निजी सहायक को हटा दिया गया, जिससे उनके कामकाज पर सीधा असर पड़ा है। विधायक ने कहा कि वह पिछले छह महीनों से बिना पीए के काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों से चर्चा भी की, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने कलेक्टर से इस विषय में बात की तो उन्हें दूसरा पीए रखने की बात कहकर मामला टाल दिया गया। अनुभा मुंजारे ने सदन में सवाल उठाया कि आखिर किस कारण से उनके पीए को हटाया गया और आज तक उन्हें नया सहयोगी क्यों उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने कहा कि एक महिला विधायक होने के नाते उन्हें ऐसा सहयोगी चाहिए जो हर परिस्थिति में उनके साथ रह सके, क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान सहयोग कर सके और देर रात भी जरूरत पड़ने पर कार्य कर सके। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति यह जिम्मेदारी निभा रहा था, उसे अचानक हटा देना उनके अधिकारों का सीधा हनन है। उन्होंने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि एक ओर सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर महिलाओं की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह भाजपा की कथनी और करनी के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। विधायक ने अपने संबोधन के दौरान बालाघाट शहर में शराब दुकान के विरोध में आंदोलन कर रही महिलाओं का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर की महिलाएं रिहायशी क्षेत्र में शराब दुकान खोले जाने का लगातार विरोध कर रही हैं। महिलाएं रातभर जागकर प्रदर्शन कर रही हैं, अपनी सुरक्षा और परिवार के भविष्य को लेकर आवाज उठा रही हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से ज्यादा राजस्व को महत्व दिया जा रहा है। यदि सरकार वास्तव में महिलाओं के हितों को लेकर गंभीर है तो उसे तत्काल रिहायशी क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों को हटाने की दिशा में ठोस निर्णय लेना चाहिए। अनुभा मुंजारे के इस तीखे संबोधन के बाद सदन में कुछ समय तक माहौल गर्म रहा। उनके बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।









































