आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में शामिल होने के बाद बालाघाट में पार्टी कार्यकर्ताओं का गुस्सा खुलकर सामने आया। बुधवार 29 अप्रैल को जिला मुख्यालय स्थित कालीपुतली चौक पर आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान भाजपा में शामिल हुए सातों सांसदों का प्रतीकात्मक पुतला दहन किया गया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी कर नाराजगी जाहिर की गई।
पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना था कि जिन नेताओं को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा भेजकर जनता की आवाज उठाने का मौका दिया, उन्हीं नेताओं ने पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। कार्यकर्ताओं ने इसे पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास के साथ बड़ा धोखा बताया। गौरतलब है कि 27 अप्रैल को राज्यसभा सचिवालय द्वारा आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों के भाजपा में विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई थी। इस खबर के सामने आने के बाद से ही पार्टी के भीतर नाराजगी का माहौल बना हुआ था। इसी नाराजगी के चलते बालाघाट में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। प्रदर्शन के दौरान आप नेताओं ने आरोप लगाया कि संबंधित सांसद केंद्रीय एजेंसियों ईडी और सीबीआई की कार्रवाई के डर से भाजपा में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों के दबाव में लिया गया यह फैसला लोकतंत्र के लिए सही संकेत नहीं है। जिन सांसदों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया उनमें राघव चड्ढा, संदीप कुमार पाठक, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, अशोक कुमार मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी, स्वाति मालीवाल और राजेंद्र गुप्ता के नाम शामिल हैं। कार्यकर्ताओं ने इन नेताओं के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें दल-बदलू करार दिया। आम आदमी पार्टी के जिला अध्यक्ष शिव जायसवाल ने प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा लगातार विपक्षी दलों के नेताओं को अपने पक्ष में करने के लिए ऑपरेशन लोटस चला रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए इन सांसदों को अपने साथ मिलाया है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इन नेताओं पर भरोसा जताकर उन्हें संसद भेजा था, लेकिन उन्होंने पार्टी की विचारधारा और जनता के विश्वास को ठेस पहुंचाई है। प्रदर्शन में प्रदेश और जिला स्तर के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। इनमें रजनीश नायडू, मनोज पमनानी, शरद जैन, अंकित जेतवार, शिव जायसवाल, मस्तराम डहारे, अनिल ब्रह्मे, सादिक कुरैशी, सुरेश सिंह कारे, भीमसेन ठाकरे, प्रदीप नागेश्वर, रामचंद्र सीहोर, ऊषा नगपुरे, दिनेश बघेले, संतोष अहिगारे, कमलेश रामटेके, ज्ञानेश राणा, डॉ. भुनेश भारद्वाज, दुर्गा प्रसाद कटरे, नागेंद्र पवार सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। विरोध प्रदर्शन के दौरान कालीपुतली चौक पर काफी देर तक राजनीतिक माहौल गर्म रहा। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं को जनता कभी माफ नहीं करेगी और आने वाले समय में इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।









































