नई दिल्ली: पश्चिम एशिया संकट का असर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान पर बुरी तरह पड़ रहा है। होर्मुज नाकेबंदी के कारण पाकिस्तान में कच्चे तेल की सप्लाई रुक गई है। वहीं ऑयल रिजर्व (तेल भंडार) को लेकर अब पाकिस्तान का दुख सामने आया है। पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली मलिक ने हाल में कहा है कि ऑयल रिजर्व के मामले में उसका देश भारत की तरह नहीं है।
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था कि ईरान युद्ध के कारण पाकिस्तान का तेल आयात बिल एक हफ्ते में तीन गुना बढ़कर 800 मिलियन डॉलर (करीब 7623 लाख करोड़ रुपये) हो गया है। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक के कर्ज पर पल रहे पाकिस्तान के लिए आर्थिक रूप से यह बड़ी चोट है।
भारत-पाकिस्तान में कितना अंतर?
अली मलिक ने अपने देश पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। उन्होंने भारत की तुलना में पाकिस्तान की कमजोर स्थिति को स्वीकार करते हुए कहा कि पाकिस्तान के पास रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) के नाम पर कुछ भी नहीं है। मंत्री अली मलिक ने एक बयान में दोनों देशों के ऊर्जा प्रबंधन के बीच की खाई को इस प्रकार उजागर किया:
1. पाकिस्तान की स्थिति
- मलिक ने बताया कि पाकिस्तान के पास एक दिन का भी रणनीतिक रिजर्व (SPR) नहीं है।
- देश के पास केवल 5-7 दिनों का कच्चा तेल उपलब्ध है।
- तेल कंपनियों के पास रिफाइंड ईंधन का स्टॉक मात्र 20-21 दिनों का है।
2. भारत पर टिप्पणी
- पाकिस्तान के पेट्रोलियम मिनिस्टर ने कहा, ‘हम भारत नहीं हैं जो एक हस्ताक्षर के साथ तेल सुरक्षित कर ले।’
- मलिक ने माना कि भारत के पास 60-70 दिनों का विशाल भंडार है और नई दिल्ली एक इशारे पर आपूर्ति जारी कर सकती है।
तेल बिल में 167% का भारी उछाल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कैबिनेट बैठक में स्वीकार किया कि युद्ध के कारण देश का साप्ताहिक तेल आयात बिल आसमान छू रहा है।
- शरीफ के मुताबिक युद्ध से पहले पाकिस्तान हर हफ्ते 300 मिलियन डॉलर का तेल आयात करता था।
- अब यह बिल बढ़कर 800 मिलियन डॉलर प्रति सप्ताह हो गया है।
- सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई है जो रोजाना कीमतों की समीक्षा कर रही है।
भारत कैसे सुरक्षित?
वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। भारत की इस मजबूती के पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- रणनीतिक भंडार (SPR): भारत ने आपातकालीन स्थितियों के लिए भारी मात्रा में तेल सुरक्षित रखा है।
- आयात का विविधीकरण: भारत ने खाड़ी देशों पर निर्भरता कम की है। वर्तमान में रूस भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। वेनेजुएला से भी आयात फिर से शुरू हो गया है। इससे मिडिल-ईस्ट के तनाव का असर कम पड़ा है।









































