रात में बिना बताए आइए, तब पता चलेगी अस्पताल की हकीकत
कलेक्टर के निरीक्षण में महिला ने खोली जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं की पोल,
बोली—आपके जाने के बाद कोई नही देता ध्यान ,चिड़चिड़ करती है नर्स,
गंदगी, भोजन और गंदी चादरों की भी शिकायत
कलेक्टर ने किया अस्पताल का निरीक्षण, दिए आवश्यक दिशा निर्देश
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं की हकीकत एक बार फिर सामने आई है। गुरुवार को अस्पताल के निरीक्षण पर पहुंचे कलेक्टर आदित्य सिंह के सामने शिशु वार्ड में भर्ती बच्चों के परिजनों ने बेबाकी से अव्यवस्थाओं की शिकायतें रखीं। सफाई, शौचालय, भोजन, मच्छरो का प्रकोप, बिस्तरों की चादर और स्टाफ नर्सों के व्यवहार तक पर सवाल उठे। एक महिला ने तो कलेक्टर को सीढ़ियों के पास रोककर समस्याए गिनानी शुरू कर दी।महिला ने दो टूक कह दिया कि रात में बिना बताए आइए, तब आपको अस्पताल की असली हकीकत पता चलेगी। महिला की शिकायत थी कि अधिकारियों के आने की जानकारी मिलते ही साफ-सफाई कर दी जाती है, लेकिन उनके जाते ही व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। इस पर कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि वे अब अस्पताल आते रहेंगे।
महिला ने बेबाकी से बताई हकीकत, बोली- चिड़चिड़ करती है नर्स
निरीक्षण के दौरान शिशु वार्ड में मरीज के परिजनों से चर्चा करते समय कलेक्टर को ऐसी शिकायतें सुनने मिलीं, जो अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। महिला ने बताया कि वार्डों की खिड़कियों में जाली और कांच नहीं होने से मच्छर अंदर आते हैं। उल्टी करने के लिए बाल्टी तक उपलब्ध नहीं है और वार्डों में गंदगी बनी रहती है। परिजनों के अनुसार, मरीजों को समय पर नाश्ता नहीं मिलता, जिसके कारण उन्हें कैंटीन से भोजन खरीदकर खाना पड़ता है। अस्पताल में मिलने वाली दाल और सब्जी भी पानी जैसी होने की शिकायत की गई।महिला ने साफ शब्दों में कहा कि दिन में निरीक्षण के समय सफाई नजर आ सकती है, लेकिन वास्तविक स्थिति जाननी है तो रात में बिना बताए अस्पताल पहुंचना होगा। उनके मुताबिक, अधिकारियों के जाने के बाद सफाई और अन्य व्यवस्थाओं पर ध्यान नहीं दिया जाता। महिला ने स्टाफ नर्सों के चिड़चिड़े व्यवहार की शिकायत भी की। वहीं, अन्य मरीजों के परिजनों ने बिस्तरों की चादर नियमित रूप से नहीं बदले जाने की बात कही।
शिकायतें सुन कलेक्टर ने दिए सुधार के निर्देश
मरीजों और उनके परिजनों की समस्याएं सुनने के बाद कलेक्टर ने अस्पताल के शिशु वार्ड सहित अन्य वार्डों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अस्पताल परिसर में ट्रामा सेंटर के सामने बह रहे गंदे पानी की निकासी तत्काल दुरुस्त करने के निर्देश दिए। मरीजों के लिए बेड की आवश्यकता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से डिमांड भेजने को कहा। शौचालयों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने और अस्पताल में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए।इसके अलावा अस्पताल में अनुपयोगी और कबाड़ में पड़े सामान के निस्तारण के लिए नियमानुसार टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई। वही शिशु वार्ड और जिला पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन एवं पोषण आहार के मेन्यू की जानकारी ली, ताकि बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे आहार की व्यवस्था की समीक्षा की जा सके।
उपमा चखकर परखी नाश्ते की गुणवत्ता
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने अस्पताल में मरीजों को नाश्ते में दिए जा रहे उपमा का स्वाद भी चखकर देखा। उन्होंने डे केयर सेंटर, स्टाफ नर्सों और मरीजों से चर्चा कर व्यवस्थाओं की जानकारी ली। हालांकि, निरीक्षण में उन्हें कौन-कौन सी कमियां मिलीं और सुधार के लिए आगे क्या कार्रवाई होगी, इस संबंध में चर्चा करने का प्रयास किया गया, लेकिन कलेक्टर बिना बातचीत किए रवाना हो गए।निरीक्षण के दौरान सीएमएचओ डॉ. शत्रुघ्न दाहिया, सिविल सर्जन डॉ. निलय जैन, सीएमओ सूर्य प्रकाश उइके सहित स्वास्थ्य विभाग व नपा का अमला मौजूद रहा।
मरीजों को सुविधाओं का इंतजार, फिर उठे कई सवाल
आपको बताए कि जिला अस्पताल में अव्यवस्थाओं की शिकायतें नई नहीं हैं। समय-समय पर कलेक्टर और अन्य अधिकारी अस्पताल का निरीक्षण करते रहे हैं। नए भवनों और संसाधनों के विस्तार के बावजूद मरीजों के परिजनों को सफाई, भोजन, बिस्तर और कर्मचारियों के व्यवहार जैसी बुनियादी समस्याओं की शिकायत करनी पड़ रही है।सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार का निरीक्षण अस्पताल की व्यवस्था में स्थायी बदलाव ला पाएगा? क्या रात में भी सफाई, भोजन और मरीजों की देखभाल की नियमित निगरानी होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे? कलेक्टर ने अस्पताल आते रहने का भरोसा तो दिया है, लेकिन अब असली परीक्षा निर्देशों के पालन और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में सुधार की होगी।










































