बालाघाट नगर पालिका परिषद में अधिकारियों के लगातार हो रहे तबादले और प्रभार परिवर्तन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गए हैं। वर्तमान परिषद के लगभग चार वर्ष के कार्यकाल में दर्जनों प्रभारी एवं अस्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी पदस्थ होकर स्थानांतरित हो चुके हैं। किसी अधिकारी ने स्वेच्छा से स्थानांतरण लिया, तो कुछ अधिकारियों को उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक परिस्थितियों के चलते हटाया गया। हाल ही में मुख्य नगर पालिका अधिकारी निशांत श्रीवास्तव के स्थानांतरण का मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बी.डी. कतरोलिया को भी बालाघाट नगर पालिका से हटाकर कलेक्टर कार्यालय स्थित डूडा शाखा में अटैच कर दिया गया है। जारी आदेश में उनके हटाए जाने का कोई स्पष्ट कारण उल्लेखित नहीं किया गया है और इसे केवल प्रशासनिक व्यवस्था बताया गया है। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि बी.डी. कतरोलिया की सेवानिवृत्ति में महज दो माह का समय शेष है, ऐसे में उन्हें नगर पालिका से हटाकर डूडा में अटैच किए जाने को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं प्रशासन द्वारा एक बार फिर सूर्यप्रकाश उइके को वारासिवनी के साथ-साथ बालाघाट नगर पालिका का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। नगर पालिका परिषद के इस कार्यकाल में लगातार बदलते अधिकारियों को लेकर अब आमजन और राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लगभग एक वर्ष का कार्यकाल अभी परिषद का शेष है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में नगर पालिका में और कितने अधिकारियों की आमद और विदाई होती है।
बालाघाट नगर पालिका बीते लगभग चार वर्षों से अपने विकास कार्यों से ज्यादा मुख्य नगरपालिका अधिकारियों के लगातार बदलते प्रभार और स्थानांतरण को लेकर चर्चा में बनी हुई है। हालात यह रहे कि इस पूरे कार्यकाल में परिषद को स्थायी और लंबे समय तक काम करने वाला पूर्णकालिक मुख्य नगरपालिका अधिकारी तक नहीं मिल पाया। लगातार अधिकारियों के बदलने और प्रभारी व्यवस्था के सहारे नगरपालिका चलने से प्रशासनिक स्थिरता पर भी सवाल खड़े होते रहे हैं। जब वर्तमान परिषद का गठन हुआ था, उस समय सतीश मठसेनिया मुख्य नगरपालिका अधिकारी के रूप में पदस्थ थे। शुरुआत में उम्मीद की जा रही थी कि उनके नेतृत्व में परिषद का कार्यकाल स्थिरता के साथ आगे बढ़ेगा, लेकिन अचानक उन्होंने स्वयं के व्यय पर अपना स्थानांतरण करवा लिया। उनके स्थानांतरण के बाद बालाघाट नगर पालिका को लंबे समय तक स्थायी मुख्य नगरपालिका अधिकारी नहीं मिल सका और इसके बाद से नगरपालिका प्रभारी अधिकारियों के भरोसे ही चलती रही। व्यवस्थाओं को संभालने के लिए सबसे पहले देवेंद्र मर्सकोले को प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी बनाया गया, लेकिन उनका कार्यकाल भी ज्यादा लंबा नहीं चल सका। उनके बाद प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बनाए रखने के उद्देश्य से तहसीलदार नितिन चौधरी को प्रभारी सीएमओ के रूप में नगर पालिका में बैठाया गया, किंतु वह भी अधिक समय तक यहां नहीं टिक सके और कुछ समय बाद उन्होंने भी इस जिम्मेदारी से दूरी बना ली। इसके बाद नगरपालिका की कमान रेखलाल राहागडाले को सौंपी गई। उम्मीद की जा रही थी कि वे परिषद की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से आगे बढ़ाएंगे, लेकिन उनका कार्यकाल भी चर्चा और असंतोष के बीच ही गुजर गया। आरोप लगते रहे कि उन्होंने अधिकतर समय छुट्टियों में ही बिताया और नगरपालिका की व्यवस्थाएं अपेक्षित गति से नहीं चल सकीं। बाद में उनकी सेवानिवृत्ति हो गई। इसी बीच बालाघाट नगरपालिका को स्थायी रूप से संभालने के लिए निशांत कुमार श्रीवास्तव को मुख्य नगरपालिका अधिकारी बनाकर भेजा गया था। उनकी कार्यशैली को सख्त, अनुशासित और प्रशासनिक दृष्टि से मजबूत माना जा रहा था। शुरुआती दिनों में उन्होंने कई व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास भी किए, लेकिन कुछ ही महीनों में वे विवादों में घिर गए। राजनीतिक और प्रशासनिक दबावों के बीच वे भी ज्यादा समय तक यहां नहीं टिक सके और अंततः उनका भी स्थानांतरण कर दिया गया। इसके बाद अपनी सेवा के अंतिम दौर में बी.डी. कतरोलिया को बालाघाट नगर पालिका का मुख्य नगरपालिका अधिकारी बनाया गया। माना जा रहा था कि उनका अनुभव परिषद को स्थिरता देगा, लेकिन सेवानिवृत्ति से करीब दो महीने पहले ही उन्हें नगरपालिका से हटाकर बालाघाट डूडा कार्यालय में अटैच कर दिया गया। सूत्रों की मानें तो हाल ही में नगरीय निकायों की जांच के लिए आई टीम की कार्रवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस संबंध में कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। अब वर्तमान में कामकाज चलाने के लिए बालाघाट नगरपालिका में पहले स्वच्छता प्रभारी रह चुके सूर्य प्रकाश उइके को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वे इन दिनों वारासिवनी नगर परिषद में प्रभारी मुख्य नगरपालिका अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं और वहीं से बालाघाट नगरपालिका का अतिरिक्त कार्यभार संभाल रहे हैं। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब अतिरिक्त प्रभार के भरोसे नगरपालिका चलाई जा रही हो। बीते चार वर्षों में दिशा डेहरिया, वाचस्पति त्रिपाठी, कमलेश विजेवार, बी.एल. लिल्हारे और मलाजखंड के मुख्य नगरपालिका अधिकारी दिनेश वाघमारे सहित कई अधिकारियों को समय-समय पर बालाघाट नगरपालिका का अतिरिक्त प्रभार दिया जाता रहा है। इस दौरान दर्जनों अधिकारी यहां आए और गए, लेकिन परिषद को स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व नहीं मिल पाया। लगातार हो रहे स्थानांतरण, प्रभारी अधिकारियों की नियुक्ति और प्रशासनिक अस्थिरता के कारण बालाघाट नगर पालिका परिषद पूरे कार्यकाल में चर्चा का विषय बनी रही है। अब देखना यह होगा कि आगामी समय में सूर्यप्रकाश उइके ही इस अतिरिक्त प्रभार के साथ परिषद का काम संभालते रहेंगे या फिर शासन बालाघाट नगरपालिका को कोई पूर्णकालिक और स्थायी मुख्य नगरपालिका अधिकारी उपलब्ध कराएगा।










































