भोजशाला परिसर मंदिर है, मुस्लिम पक्ष को अलग से मिलेगी जमीन, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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महत्वपूर्ण फैसला आने से ठीक पहले हाई कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा एक आइसक्रीम पार्टी आयोजित की गई है। गौरतलब है कि हाई कोर्ट में हर साल ग्रीष्म अवकाश शुरू होने के ठीक पहले अंतिम कार्य दिवस पर अभिभाषक संघ द्वारा आइसक्रीम पार्टी आयोजित की जाती है। हाई कोर्ट और जिला कोर्ट में ग्रीष्म अवकाश शनिवार से शुरू हो रहे हैं, जो लगभग एक माह के होंगे। अवकाश में आपराधिक और अर्जेंट मामलों की सुनवाई हो सकेगी।

क्या है पूरा विवाद?

यह विवाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) संरक्षित भोजशाला परिसर के धार्मिक स्वरूप को लेकर है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। वहीं जैन समुदाय के एक पक्ष का दावा है कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल था।

अफवाह फैलाने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी

प्रशासन ने सोशल मीडिया और इंटरनेट मीडिया पर विशेष निगरानी शुरू कर दी है। अफवाह फैलाने, भ्रामक जानकारी प्रसारित करने या माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने लोगों से शांति बनाए रखने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है।

चार साल से चल रही थी सुनवाई

दरअसल, हिंदू पक्ष की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर भोजशाला को मंदिर घोषित करने तथा हिंदू समाज को वर्षभर 24 घंटे पूजा-अर्चना का अधिकार देने की मांग की गई थी। इस मामले में पिछले चार वर्षों से सुनवाई चल रही थी। लंबी न्यायिक प्रक्रिया और बहस पूरी होने के बाद अब फैसले की घड़ी आ गई है।

भोजशाला मामले को लेकर धार ही नहीं, पूरे प्रदेश में उत्सुकता का माहौल बना हुआ है। फैसले से पहले शहर में सुरक्षा व्यवस्था जिस स्तर पर बढ़ाई गई है, उसे देखते हुए प्रशासन किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहा है।

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