सऊदी अरब में खोई सुधबुध, लेकिन पत्नी का मोबाइल नंबर याद रहा, नरसिंहपुर में उतरा, पुलिस वाला बना देवदूत

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नरसिंहपुर। पुलिस की खाकी वर्दी को अक्सर कठोरता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन जब इसी वर्दी के पीछे एक संवेदनशील और ममतामयी हृदय धड़कता है, तो वह ‘देवदूत’ की भूमिका निभाने लगती है। कुछ ऐसा ही नजारा नरसिंहपुर जिले में देखने को मिला।

सात समंदर पार सऊदी अरब से यहां आ पहुंचा

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर का एक युवक अपनी सुध-बुध खोकर भटकते हुए सात समंदर पार सऊदी अरब से यहां आ पहुंचा। यहां कोतवाली नरसिंहपुर में पदस्थ आरक्षक पंकज राजपूत की आत्मीयता ने इस भटकते शख्स को न केवल सहारा दिया, बल्कि बिछड़े परिवार से मिलवाकर इंसानियत की एक नई इबारत लिख दी।

संवाद कठिन था, क्योंकि ठिकाना लगभग भूल चुके थे

शुरुआत में संवाद कठिन था, क्योंकि उनसाद अपनी पहचान और ठिकाना लगभग भूल चुके थे। लेकिन आरक्षक ने हार नहीं मानी और एक परिजन की तरह उनकी देखभाल शुरू की।

सबसे महत्वपूर्ण उन्हें ‘अपनापन’ दिया

उन्हें भोजन कराया गया, नए कपड़े दिए गए और सबसे महत्वपूर्ण उन्हें ‘अपनापन’ दिया गया। इसी अपनेपन की आंच ने उनसाद की धुंधली यादों को थोड़ा साफ किया।

पत्नी का मोबाइल नंबर आ गया याद

आरक्षक पंकज ने जब उस नंबर पर कॉल किया, तो दूसरी तरफ हताशा में डूबे परिवार के लिए यह किसी ईश्वरीय संदेश से कम नहीं था। 9 मई को जब उनसाद के बड़े भाई जैश मोहम्मद और भतीजे नरसिंहपुर पहुंचे, तो मिलन का वह दृश्य पत्थर दिल को भी पिघला देने वाला था।

सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें छलक आईं

अपने भाई को सुरक्षित पाकर परिजनों की आंखें छलक आईं, वहीं अपनों का स्पर्श पाकर उनसाद के चेहरे पर भी सुकून की लहर दौड़ गई। पुलिस की इस संवेदनशीलता ने न केवल एक परिवार को बिखरने से बचाया।

खाकी के प्रति विश्वास हुआ और गहरा

समाज में खाकी के प्रति विश्वास को और गहरा कर दिया। अंतत: पुलिस ने उसे परिवार के सािा ट्रेन से उनके गृह नगर रवाना किया गया। स्टेशन पर विदाई के वक्त माहौल भावुक था।

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