‘न्याय भले ही अंधा हो, लेकिन..’, भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बताया कोर्टरूम में क्या होता है

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नई दिल्ली: भारत के चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने कहा है कि न्याय भले ही अंधा होता है, लेकिन इसमें हास्य-बोध भी होता है, जो कि बहुत ही बेहतरीन होता है। सीजेआई सूर्यकांत ने रविवार को एक ऐसे कार्यक्रम में अदालतों के अंदर की परिस्थितियों पर अपनी बात रखी, जिसमें एक तरह से पूरा सुप्रीम कोर्ट मौजूद था।

सीजेआई सूर्यकांत का कहना है, हर फैसले के पीछे एक इंसान ही होता है, जिसकी अपनी कमियां भी हो सकती हैं, लेकिन उसमें हास्य भी हो सकता है और उससे सीखने का मौका भी मिलता है।सॉलिसिटर जनरल के पुस्तकों की लॉन्च पर बोले सीजेआई

सीजेआई सूर्यकांत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की पुस्तकों की लॉन्च पर पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने दोनों किताबों का जिक्र किया- द बेंच, द बार एंड द बिजार: द क्यूरियस एंड द एक्ट्राऑर्डिनरी इन लॉ; और द लॉफुल एंड द ऑफुल:क्वर्की टेल्स फ्रॉम द वर्ल्ड ऑफ लॉ। उन्होंने कहा कि कोर्टरूम ऐसी जगह है जहां रंगमंच और कानून का मिलन होता है।’यहां का हास्य उपहास नहीं, बल्कि शिक्षा है’

जिस कार्यक्रम में भारत के प्रधान न्यायधीश बोल रहे थे, वहां सुप्रीम कोर्ट के लगभग सभी जज श्रोताओं के तौर पर मौजूद थे। इस दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा, ‘यहां का हास्य उपहास नहीं, बल्कि शिक्षा है…एक ऐसी दुनिया, जिसमें कानून को अक्सर डरावनी और अथाह समझा जाता है, एक सॉलिसिटरल ने दरवाजे खोल दिए हैं, हमें आमंत्रित किया और इसकी बेतुकी बातों पर भी हमें मन भर के हंसने की अनुमति दी है।’

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