Elephant E5 News: मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ से जुड़े रेडियो-कॉलर हाथी E-5 ने एक बार फिर अपनी गजब की याददाश्त का परिचय देते हुए शहडोल के बाणसागर बांध के 5 किलोमीटर से अधिक गहरे पानी को तैरकर पार किया है और मैहर इलाके में वापसी कर ली है। ठीक एक महीने पहले भी इसी हाथी ने ऐसा ही सफर तय किया था।मैहर: मध्य प्रदेश के जंगलों में घूम रहे रेडियो-कॉलर हाथी E-5 ने एक बार फिर अपनी अनोखी गतिविधियों से वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के अधिकारियों को चौंका दिया है। अन्य हाथियों के उलट, E-5 के लिए शहडोल जिले के बाणसागर बांध का गहरा और शांत पानी किसी बाधा की तरह नहीं, बल्कि एक परिचित रास्ते जैसा बन गया है। ठीक एक महीने बाद एक बार फिर इस नर हाथी ने बांध के बैकवाटर को तैरकर पार किया और मैहर जिले में दोबारा प्रवेश कर लिया है।
सोमवार सुबह पुरानी पहाड़ी पर लौटा
शहडोल के ब्योहारी से बाणसागर बांध के 5 किलोमीटर से अधिक हिस्से को तैरकर पार करने वाला यह वही रास्ता है, जिसे हाथी ने सबसे पहले 7 सितंबर को अपनाया था। इस बार मैहर इलाके में प्रवेश करने के बाद हाथी ने सिमरिया गांव के कंपार्टमेंट 633 में दो दिन बिताए। इसके बाद वह हर्रई और मरवारी गांवों से गुजरा। फिर गोर्सरी के पास एक पहाड़ी पर चढ़कर एक दिन रुका, खरामकखेड़ा गांव के पास उतरा और दोबारा पहाड़ी पर चढ़ गया। इसके बाद नीचे उतरकर उसने हाईवे के पास अमरपाटन कस्बे को पार किया और बरेह गांव तक जा पहुंचा। सोमवार सुबह वह फिर से उसी पुरानी पहाड़ी पर लौट आया।तेज होती है हाथियों की याद्दाश्त
मैहर के वन रेंज अधिकारी प्रफुल त्रिपाठी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘हाथी E-5 एक बार फिर मैहर लौट आया है और उसने वही पुराना रास्ता अपनाया है। उसकी हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है और स्थानीय ग्रामीणों को लगातार सतर्क किया जा रहा है।’ उन्होंने बताया कि हाथी ने एक बार फिर बाणसागर बांध के शांत बैकवाटर में 5 किलोमीटर से अधिक दूरी तक तैरकर सफर तय किया। उन्होंने हाथियों की विशेषताओं का जिक्र करते हुए कहा कि हाथियों की याददाश्त बहुत तेज होती है, और एक बार रास्ता मिल जाने के बाद वे उसे लंबे समय तक याद रखते हैं।लगभग 10 किलोमीटर तैरकर किया पार
E-5 की इस बार-बार की वाटर-क्रॉसिंग ने वन अधिकारियों की दिलचस्पी बढ़ा दी है। जब उसने पहली बार 7 सितंबर को मैहर में प्रवेश किया था, तो उसने शहडोल से बांध पार करके पुरैना गांव के पास कदम रखा था। हालांकि, 29 सितंबर को अपनी वापसी की यात्रा के दौरान उसने एक अलग रास्ता चुना था और 9.43 किलोमीटर तक बांध का पानी तैरकर पार किया था, इस दौरान उसने ब्योहारी के जमनी गांव पहुंचने से पहले एक टापू पर छोटा सा विश्राम भी लिया था।
कर चुका है 50 वर्षीय किसान की हत्या
हाथी की इस वापसी ने एक बार फिर मानव-हाथी संघर्ष को लेकर पुरानी चिंताएं बढ़ा दी हैं। पिछली बार 7 सितंबर की रात को ही E-5 ने पुरैना पंचायत के अंतर्गत आने वाले सिंगपुर मोहरी गांव में प्रवेश किया था, जहां उसने 50 वर्षीय किसान कंचहेड़ी यादव को कुचलकर मार डाला था। इसके अलावा उसने दो घरों को नुकसान पहुंचाया था और दो बकरियों की भी जान ले ली थी, जिसके बाद से ही इस हाथी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वन विभाग लगातार यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके और स्थानीय लोगों की सुरक्षा पुख्ता रहे।










































