18 साल से पट्टे की आस में 17 आदिवासी परिवार, कलेक्टर से लगाई न्याय की गुहार

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नक्सल प्रभावित चिरी मुरूम से 2008 में किया गया था विस्थापित
पट्टा देकर पीएम आवास योजना सहित मूलभूत सुविधा देने की करी मांग
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पदमेश न्यूज़। बालाघाट।किसी ने सुरक्षित ठिकाने की उम्मीद में अपना गांव छोड़ा, तो किसी ने पक्के मकान के सपने के साथ प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा किया। लेकिन करीब 18 साल बीत जाने के बाद भी 17 आदिवासी परिवार अपनी जमीन के अधिकार के लिए इंतजार कर रहे हैं।बताया गया कि नक्सल प्रभावित ग्राम चिरी मुरूम से वर्ष 2008 में लांजी लाए गए इन परिवारों को अब तक भू-धारणाधिकार का पट्टा नहीं मिल पाया है।सरकारी आबादी भूमि आवंटित होने के बावजूद पट्टा जारी नहीं होने से परिवारों की परेशानी बरकरार है। जहां के ग्रामीणों ने वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद संजय सैय्याम के नेतृत्व में मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में एक ज्ञापन सौपते हुए, पात्र परिवारों को आवासीय पट्टा दिए जाने के साथ साथ पीएम आवास का लाभ व सड़क बिजली पानी नाली जैसी मूलभूत सुविधाएं दिए जाने की गुहार लगाई है।अब 17 आदिवासी परिवारों की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं। करीब 18 वर्षों के इंतजार और सरकारी भूमि आवंटन के बाद भी अधूरे पड़े पट्टे के मामले में ग्रामीणों को उम्मीद है कि कलेक्टर के हस्तक्षेप से उन्हें जमीन पर अधिकार के दस्तावेज मिल सकेंगे और उनके पक्के मकान का सपना साकार हो सकेगा।

पहले निजी जमीन पर बसाया, फिर सरकारी भूमि का कराया इंतजार
ग्रामीणों की शिकायत के अनुसार, चिरी मुरूम गांव के 17 आदिवासी गोंड परिवारों को नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत वर्ष 2008 में जिला प्रशासन द्वारा लांजी नगर परिषद के वार्ड क्रमांक 01 में बसाया गया था। उस समय खसरा नंबर 664 की निजी भूमि पर इन परिवारों को बसाए जाने और बाद में वैकल्पिक शासकीय भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था।शिकायतकर्ता का कहना है कि लंबे समय तक न तो संबंधित भूमि स्वामी को वैकल्पिक शासकीय भूमि उपलब्ध कराई गई और न ही वहां रह रहे परिवारों को उनके आवास के लिए पट्टा मिल सका। इस बीच परिवार वर्षों तक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद लगाए रहे।

26 जून 2024 को मिली सरकारी जमीन, लेकिन पट्टा आज तक नही मिला
बताया गया कि स्थानीय प्रशासन ने 26 जून 2024 को वार्ड क्रमांक 01 स्थित खसरा नंबर 663/1 की सरकारी आबादी भूमि पर 17 परिवारों को भूमि आवंटित की। इससे परिवारों को उम्मीद जगी कि अब उनके जमीन संबंधी अधिकारों का रास्ता साफ हो जाएगा और जल्द ही भू-धारणाधिकार के पट्टे जारी कर दिए जाएंगे।लेकिन भूमि आवंटन के बाद भी पट्टा जारी नहीं हुआ। ग्रामीणों ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकारी भूमि आवंटित करने की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, तो पात्र परिवारों को अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने में देरी क्यों हो रही है?

पट्टा नहीं तो पक्के मकान का सपना कैसे होगा पूरा?
इन परिवारों के लिए पट्टा केवल जमीन का दस्तावेज नहीं, बल्कि अपने घर को सुरक्षित और स्थायी बनाने की उम्मीद भी है। आवेदन में बताया गया है कि भू-धारणाधिकार का पट्टा नहीं मिलने के कारण परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान निर्माण की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।आर्थिक रूप से कमजोर इन परिवारों के सामने आवास की समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग पट्टा जारी करने में आ रही बाधाओं को दूर करें, ताकि वे नियमानुसार आवास योजना का लाभ प्राप्त कर सकें और अपने परिवारों के लिए पक्के मकान का सपना पूरा कर सकें।

जल्द पट्टे जारी कर दिया जाए पीएम आवास का लाभ, मिले मूलभूत सुविधाएं- संजय
ज्ञापन को लेकर की गई चर्चा के दौरान लांजी वार्ड क्रमांक 01 के पार्षद संजय सैय्याम ने मामले का जल्द निराकरण करने की मांग की। उन्होंने आवेदन में वर्ष 2008 से लंबित समस्या और 26 जून 2024 को सरकारी आबादी भूमि आवंटित होने के बाद भी पट्टा जारी नहीं होने नारजगी जताते हुए प्रशासन से आग्रह किया कि संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश देकर पात्र परिवारों को नियमानुसार जल्द से जल्द भू-धारणाधिकार के पट्टे उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वर्षों से लंबित भूमि अधिकार का मामला सुलझ सके।

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