प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेंगलुरु दौरे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू के बाहरी इलाके में उनके कार्यक्रम स्थल के पास सड़क किनारे से जिलेटिन की दो छड़ें बरामद की गई हैं। इस बरामदगी के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच कर रही है। पुलिस इस बात का भी पता लगाने में जुटी है कि कहीं ये किसी बड़ी साजिश का हिस्सा तो नहीं है।
कहां की है घटना
पुलिस के अनुसार, ये मामला कग्गलीपुरा थाना क्षेत्र के तातागुनी इलाके का हैं। यहां रविवार सुबह पीएम मोदी के आगमन के पहले नियमित सुरक्षा जांच के दौरान फुटपाथ किनारे दो जिलेटिन स्टिक मिलीं। यह स्थान प्रधानमंत्री के मुख्य कार्यक्रम स्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर बताया गया है। बता दें कि पीएम मोदी कनकपुरा रोड स्थित आर्ट ऑफ लिविंग के 45वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
बम निरोधक दस्ते से लेकर फॉरेंसिक टीम तक सब कर रहे जांच
पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री के आगमन से पहले सुरक्षा जांच के दौरान विस्फोटक सामग्री बरामद हुई, जिसके बाद तत्काल जांच शुरू कर दी गई। जिलेटिन स्टिक मिलने की सूचना के बाद पुलिस, बम निरोधक दस्ता और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और इलाके को घेरकर सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
एक व्यक्ति पुलिस हिरासत में
सूत्रों के मुताबिक, एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विस्फोटक सामग्री वहां कैसे पहुंची और क्या इसके पीछे किसी तरह की साजिश थी। हालांकि शुरुआती जांच में अभी किसी आतंकी लिंक की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के कारण एजेंसियां कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
क्या है जिलेटिन स्टिक
बता दें कि जिलेटिन स्टिक एक तरह की विस्फोटक सामग्री होती है,जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से खनन, पत्थर तोड़ने,सड़क निर्माण और सुरंग बनाने जैसे कामों में किया जाता है। इसे आम भाषा में ब्लास्टिंग स्टिक भी कहा जाता है। इनमें अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक रसायन भरे होते हैं। सामान्य तौर पर इनमें नाइट्रेट आधारित कंपाउंड और अन्य रासायनिक पदार्थ होते हैं, जो डेटोनेटर की मदद से विस्फोट करते हैं।भारत में जिलेटिन स्टिक का उपयोग पूरी तरह नियंत्रित होता है। इसे खरीदने, रखने और इस्तेमाल करने के लिए सरकारी लाइसेंस जरूरी होता है।










































