कच्चे तेल में गिरावट के बीच पेट्रोल-डीजल पर सरकार का बड़ा फैसला, किसे होगा फायदा?

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नई दिल्ली: कच्चे तेल की कीमत में गिरावट के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने फ्यूल एक्सपोर्ट पर विंडफॉल टैक्स में कटौती की है। पेट्रोल, डीजल और एटीएफ यानी विमान ईंधन पर एक्पोर्ट ड्यूटी में कमी की गई है। यह व्यवस्था 1 जून से शुरू होगी और अगले 15 दिनों तक जारी रहेगी। पेट्रोल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 1.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है जबकि डीजल पर यह 13.5 रुपये और एटीएफ पर 9.5 रुपये प्रति लीटर होगी। सरकार हर 15 दिन में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर लगने वाली एक्सपोर्ट ड्यूटी की समीक्षा करती है। कच्चे तेल की कीमत के आधार पर इसे तय किया जाता है।

सरकारी नोटिफिकेशन के मुताबिक पेट्रोल के एक्सपोर्ट पर 1.5 रुपये प्रति लीटर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) रहेगी और रोड एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस लागू नहीं होगा। पहले यह 3 रुपये थी। इसी तरह डीजल के एक्सपोर्ट पर SAED प्रति लीटर 16.5 रुपये से घटाकर 13.5 रुपये और एटीएफ पर 16 रुपये से घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। सरकार ने साथ ही साफ किया है कि घरेलू बाजार में मौजूदा एक्साइज ड्यूटी के रेट्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है।किसे होगा फायदा?

देश में पहली बार जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स की शुरुआत की गई थी। ईरान युद्ध के कारण दुनिया में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित हुई है जिससे कीमतों में काफी तेजी आई। सरकार ने देश में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता बनाए रखने के लिए 27 मार्च को एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी। विंडफॉल टैक्स से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसे बड़े प्राइवेट रिफाइनर्स प्रभावित होते हैं।

रिलायंस बड़ी मात्रा में पेट्रोलियम पदार्थों का एक्सपोर्ट करती है। रिलायंस देश में डीजल और एटीएफ की बड़ी एक्सपोर्टर है। जामनगर में उसकी दो रिफाइनरीज में करीब 5 मिलियन टन एटीएफ का उत्पादन होता है जो देश के कुल उत्पादन का करीब एक चौथाई है। इसका एक बड़ा हिस्सा एक्सपोर्ट किया जाता है। साथ ही ओएनजीसी और ऑयल इंडिया भी फ्यूल प्रोडक्ट्स का एक्सपोर्ट करती हैं।

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