ईरान का ‘दुश्मन नंबर 1’ क्यों हैं पैगंबर के वंशज की सत्ता वाला जॉर्डन, अमेरिकी हमलों के बाद बनता रहा है निशाना

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ईरान के निशाने पर जॉर्डन

जॉर्डन में अल-अजराक एयर बेस और उसके कंट्रोल सेंटर पर ईरानी हमले से हुए नुकसान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका के साथ बीते चार दिनों में तनाव बढ़ने के बाद ईरान ने जॉर्डन, कुवैत और बहरीन को निशाना बनाया है। इसके चलते कुवैत ने अपना एयरस्पेस तक अस्थायी तौर पर बंद करना पड़ा है।

ईरान के इजरायल और अमेरिका से संघर्ष में जॉर्डन की भूमिका सामने आती रही है। इजरायल की ओर दागे जाने वाली ईरान की मिसाइलों को बड़ी संख्या में जॉर्डन में रोका जाता रहा है। जॉर्डन में अमेरिकी सेना का बड़ा जमावड़ा है। जॉर्डन को ईरानी इजरायल और अमेरिका के साथ खास सहयोगी के तौर पर देखते हैं।तेहरान: अमेरिका के हवाई हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई के तौर पर ईरान ने जॉर्डन को निशाना बनाया है। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया है कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया है। ईरानी पक्ष ने हमले में बेस को भारी नुकसान और कई फाइटर जेट नष्ट होने का दावा किया है। जॉर्डन उन देशों में शामिल है, जो लगातार ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों का शिकार हुआ है। जॉडर्न किंग अब्दुल्ला पैगंबर मोहम्मद के वंशज माने जाते हैं लेकिन इजरायल-अमेरिका से दोस्ती ने उनको ईरान का ‘दुश्मन’ बना दिया है।

IRGC की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उसने अल-अजराक एयर बेस को 12 बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया है। जॉर्डन का अल अजराक खाड़ी में अमेरिकी सेना का एक अहम अड्डा है। ईरान ने संघर्ष के दौरान लगातार उन देशों को निशाना बनाया है, जहां से उड़कर अमेरिकी जहाज उसकी जमीन पर हमले कर रहे हैं।

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