आज के समय में हर दूसरा व्यक्ति अपनी जमा-पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए सेविंग अकाउंट (Savings Account) का इस्तेमाल कर रहा है। रोजमर्रा के खर्च, अचानक आने वाली जरूरत और Emergency Fund के लिए बैंक खाते में पर्याप्त रकम होना आर्थिक सुरक्षा तो देता है लेकिन अगर आपकी जरूरत से काफी ज्यादा रकम लंबे समय तक सेविंग अकाउंट में बिना किसी खास उद्देश्य के पड़ी है, तो यह आपके पैसे की ग्रोथ को प्रभावित कर सकती है।
कितना पैसा Savings Account में रखना ठीक है?
सेविंग अकाउंट में कितनी रकम (Idle Money In Savings Account) रखनी चाहिए, इसका कोई एक तय नियम सभी लोगों पर लागू नहीं होता। आपकी आमदनी, परिवार की जिम्मेदारियां और मासिक खर्च इसके आधार पर तय होते हैं। रोजमर्रा के खर्चों के अलावा करीब छह महीने के जरूरी घरेलू खर्च के बराबर रकम Emergency Fund के तौर पर अकाउंट रखी जा सकती है। अगर परिवार की आमदनी अनियमित है या घर में केवल एक व्यक्ति कमाता है, तो इससे ज्यादा रकम का सुरक्षा कवच रखना भी उचित हो सकता है।
मान लीजिए किसी परिवार का जरूरी मासिक खर्च 60,000 रुपये है। ऐसे में करीब छह महीने के खर्च यानी 3.60 लाख रुपये को इमरजेंसी के लिए अलग रखना एक आधार हो सकता है। इसके अलावा रोजमर्रा के खर्च के लिए जरूरी रकम भी Savings Account में रखी जा सकती है।ज्यादा पैसा पड़ा रहने से क्या नुकसान?
Savings Account में पैसा सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध रहता है, लेकिन बहुत ज्यादा रकम लंबे समय तक बिना इस्तेमाल के रखने की एक लागत भी होती है। अगर उस रकम पर मिलने वाला ब्याज महंगाई से कम है, तो समय के साथ पैसे की खरीदने की क्षमता घट सकती है।
उदाहरण के तौर पर, आज जितने पैसे में कोई सामान खरीदा जा सकता है, जरूरी नहीं कि कुछ साल बाद उसी रकम में वही सामान मिल जाए। इसलिए केवल बैंक बैलेंस बढ़ता हुआ देखना काफी नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि आपका पैसा वास्तविक रूप से कितनी वैल्यू बना रहा है।
Surplus Money का क्या करें?
अगर Emergency Fund और जरूरी खर्चों के लिए पर्याप्त रकम अलग रखने के बाद भी Savings Account में बड़ी राशि लगातार पड़ी है, तो उसके उद्देश्य पर विचार करना चाहिए। अगर यह पैसा आने वाले कुछ समय में घर खरीदने, पढ़ाई या किसी अन्य बड़े खर्च के लिए इस्तेमाल होना है तो अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार दूसरे निवेश विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
Fixed Deposit, Recurring Deposit, Debt Mutual Funds, Equity Mutual Funds और दूसरे रेगुलेटेड निवेश विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इनमें से किसी विकल्प को चुनने से पहले निवेश की अवधि, जोखिम और अपनी वित्तीय जरूरतों को समझना जरूरी है।










































