एक मिठाई कारोबारी के लिए जरा सा लालच जीवनभर का सबक बन गया है। उसकी दुकान पर चांदी की जगह एल्युमिनियम की फॉइल वाली काजू कतली मिली, जिसके चक्कर में कारोबारी 30 साल से आदलतों के चक्कर लगा रहा हैगुजरात के एक कारोबारी को काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉयल लगाना बेहद महंगा पड़ा। कारोबारी पिछले 30 साल से इस मामले में अदालतों के चक्कर काट रहा है। आखिर में अब जाकर उसे गुजरात हाई कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।
यह मामला करीब 30 साल पुराना है। 1995 में शुरू हुई कार्रवाई में ट्रायल कोर्ट ने नवंबर 2006 में दुकानदार और उसके साथियों को 3 साल की साधारण जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। बाद में अपीलीय कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। गुजरात सरकार ने इस बरी किए जाने को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 17 जून 2026 को जस्टिस हेमंत एम. प्रच्छक ने राज्य की अपील खारिज कर दी और बरी किए जाने के फैसले को बरकरार रखा।
गुजरात हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ काजू कतली पर एल्युमिनियम फॉयल पाए जाने से उसे मिलावटी भोजन नहीं माना जा सकता, जब तक रिकॉर्ड पर यह साबित करने वाला सबूत न हो कि यह फॉयल स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है या उसे खाने से सेहत पर खतरा पैदा होता है। इसके अलावा जिस तरीके से फूड इंस्पेक्टर ने काजू कतली का सैंपल लिया, उसमें भी नियमों का पालन साबित नहीं हो पाया।1995 में क्या हुआ?
मामला गुजरात के तापी जिले के व्यारा स्थित एक मिठाई की दुकान से जुड़ा है। 9 मार्च, 1995 को सुबह करीब 10:30 बजे फूड इंस्पेक्टर चौधरी दुकान पर पहुंचे। उन्होंने दुकान से 96 रुपये में काजू कतली खरीदी और नियम के मुताबिक इसकी जानकारी दुकानदार को दी। इसके बाद काजू कतली का सैंपल जांच के लिए भुज स्थित पब्लिक एनालिस्ट के पास भेजा गया। जांच में काजू कतली पर एल्युमिनियम फॉयल पाए जाने की बात सामने आई।
ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी 3 साल की सजा
रिपोर्ट आने के बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमे का सामना किया। व्यारा के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उपलब्ध सबूतों पर विचार करने के बाद 24 नवंबर 2006 को दुकानदार और उसके साथियों को दोषी ठहराया। कोर्ट ने उन्हें 3 साल की साधारण जेल और 5,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना नहीं देने पर 6 महीने की अतिरिक्त साधारण जेल का प्रावधान भी किया गया था।
हाई कोर्ट में पलट गया मामला
आखिर में आरोपियों को गुजरात हाई कोर्ट ने बरी कर दिया है। गुजरात हाई कोर्ट के सामने अहम कानूनी सवाल यह था कि क्या सिर्फ यह साबित हो जाना कि काजू कतली पर एल्युमिनियम फॉयल लगा था, किसी व्यक्ति को खाद्य अपमिश्रण के अपराध में दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त है? गुजरात हाई कोर्ट ने इसका जवाब ‘नहीं’ में दिया। हाई कोर्ट ने सरकार से पूछा- एल्युमिनियम फॉयल से सेहत को नुकसान हुआ, इसका सबूत कहां है? जब सरकार इस सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई, तो कोर्ट ने कहा, केवल काजू कतली पर चांदी की जगह एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल कर देने से वह खाद्य पदार्थ अपने आप मिलावटी नहीं हो जाता।










































