संयुक्त राष्ट्र महासभा ने दुनिया के नक्शे में महाद्वीपों के वास्तविक क्षेत्रफल को ज्यादा सटीक तरीके से दिखाने वाली इक्वल अर्थ प्रक्षेपण पद्धति को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दी है। प्रस्ताव को 164 देशों का समर्थन मिला, जबकि अमेरिका ने विरोध में वोट दिया और छह देश मतदान से दूर रहे। नई पद्धति में अफ्रीका अपने वास्तविक आकार के ज्यादा करीब दिखाई देगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका अपेक्षाकृत छोटे नजर आएंगे।World Map: दुनिया को जिस नक्शे के जरिए हम दशकों से देखते आए हैं, उसमें बड़ा बदलाव होने वाला है। नक्शे में बदलाव की दिशा में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने बड़ा कदम उठाया है। संयुक्त राष्ट्र ने मर्केटर प्रक्षेपण से हटकर ऐसे विश्व मानचित्र को बढ़ावा देने वाली प्रस्तावना को मंजूरी दी है, जिसमें महाद्वीपों का आकार वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देता है। नए पृथ्वी के वास्तविक क्षेत्रफल को अधिक सटीक दिखाने वाले नक्शे में अफ्रीका मौजूदा नक्शों की तुलना में काफी बड़ा नजर आएगा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका अपेक्षाकृत छोटे दिखेंगे।
164 देशों ने प्रस्ताव का किया समर्थन
अफ्रीकी देशों की अगुवाई में लाए गए इस प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र महासभा में 164 देशों का समर्थन मिला। अमेरिका ने इसके खिलाफ मतदान किया, जबकि छह देश वोटिंग से दूर रहे। प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के नक्शों में महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक सटीक तरीके से प्रदर्शित करना है।
इस पहल की अगुवाई टोगो ने की और इसे अफ्रीकी संघ का भी समर्थन प्राप्त था। टोगो का तर्क है कि नक्शे केवल भौगोलिक जानकारी नहीं देते, बल्कि दुनिया के बारे में लोगों की धारणा भी बनाते हैं। मौजूदा मर्केटर प्रक्षेपण (Mercator Projection) में ध्रुवों के करीब स्थित इलाकों का आकार वास्तविकता से काफी बड़ा दिखाई देता है।क्या बै मर्केटर प्रक्षेपण?
यह दुनिया के गोलाकार आकार को एक सपाट नक्शे पर दिखाने की एक मानचित्र पद्धति है। इसमें भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों का आकार वास्तविकता की तुलना में बड़ा दिखाई देता है। इसी वजह से ग्रीनलैंड, यूरोप और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्र नक्शे पर अपने वास्तविक क्षेत्रफल से काफी बड़े नजर आते हैं।
इस पद्धति को मुख्य रूप से समुद्री नौवहन के लिए विकसित किया गया था, क्योंकि इसमें दिशाओं और कोणों को बनाए रखना आसान होता है। हालांकि, क्षेत्रफल के मामले में इसमें काफी विकृति आती है। उदाहरण के लिए, नक्शे पर ग्रीनलैंड बहुत बड़ा दिखाई देता है, जबकि वास्तविक क्षेत्रफल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।क्यों बदला जा रहा है दुनिया का नक्शा?
मर्केटर प्रक्षेपण को 1569 में फ्लेमिश कार्टोग्राफर जेरार्डस मर्केटर ने विकसित किया था। इसका मूल उद्देश्य समुद्री नौवहन के लिए उपयोगी नक्शा तैयार करना था। इसमें भूमध्य रेखा से दूर जाने पर क्षेत्रों का आकार बढ़ता जाता है। यही वजह है कि ग्रीनलैंड जैसे इलाके नक्शे पर अफ्रीका के आकार के आसपास नजर आ सकते हैं, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।
इसके मुकाबले इक्वल अर्थ प्रक्षेपण महाद्वीपों के क्षेत्रफल को अधिक वास्तविक अनुपात में दिखाता है। हालांकि, कोई भी सपाट विश्व मानचित्र पृथ्वी की गोलाकार सतह को पूरी तरह बिना विकृति के नहीं दिखा सकता।
क्या अब मर्केटर नक्शा पूरी तरह खत्म हो जाएगा?
ऐसा नहीं है। संयुक्त राष्ट्र का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है और मर्केटर प्रक्षेपण पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। प्रस्ताव सदस्य देशों को शिक्षा, संस्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म समेत विभिन्न क्षेत्रों में अधिक क्षेत्रफल-सटीक मानचित्रों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है। साथ ही, समुद्री और हवाई नेविगेशन में Mercator projection का इस्तेमाल जारी रह सकता है, क्योंकि वहां इसकी उपयोगिता बनी हुई है। इस फैसले को अफ्रीकी देशों की उस मुहिम की बड़ी सफलता माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य दुनिया के नक्शे पर अफ्रीका की वास्तविक भौगोलिक विशालता को सामने लाना है।










































