Kuno National Park News: बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता CCB2 को अब कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में शिफ्ट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद इस मादा चीता को नए प्राकृतिक आवास में छोड़ेंगे, जिससे प्रदेश में चीतों की आबादी का दायरा तेजी से बढ़ेगा।श्योपुर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत मध्य प्रदेश में वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में चीतों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास के दायरे को लगातार बढ़ाया जा रहा है। इसी कड़ी में अब 7800 किलोमीटर दूर बोत्सवाना से भारत लाई गई खास मादा चीता CCB2 को कूनो नेशनल पार्क से निकालकर गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में शिफ्ट किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खुद इस मादा चीता को उसके नए और सुरक्षित प्राकृतिक आशियाने में छोड़ेंगे।
7800 किलोमीटर का सफर तय कर भारत आई थी CCB2
बोत्सवाना के घांजी क्षेत्र में जन्मी मादा चीता CCB2 करीब ढाई साल की उम्र में इस साल 28 फरवरी को भारत लाई गई थी।भारत और बोत्सवाना के बीच की सीधी हवाई दूरी लगभग 7,800 किलोमीटर (4,850 मील) है। इस अंतरमहाद्वीपीय वन्यजीव स्थानांतरण के तहत विशेष कार्गो विमानों और सैन्य परिवहन विमानों की मदद से इन चीतों को सुरक्षित भारत लाया गया था। कूनो पहुंचने के बाद तय क्वारंटीन पीरियड पूरा करके इसे मई के महीने में खुले जंगल में छोड़ दिया गया था, जहां इसने बहुत कम समय में भारतीय परिस्थितियों के साथ तालमेल बिठा लिया।कई बार कूनो की सीमा छोड़कर निकली
कुछ समय पहले कूनो नेशनल पार्क की सीमा लांघकर यह मादा चीता श्योपुर के विजयपुर क्षेत्र के दुबेरा गांव में आ धमकी थी। खेतों से होती हुई यह चीता सीधे गांव की रिहायशी गलियों और एक सरकारी प्राइमरी स्कूल के पास जा पहुंची थी। आबादी वाले इलाके में अचानक चीते की मौजूदगी से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था और ग्रामीण डर के मारे छतों पर चढ़ गए थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि चीता पूरी तरह शांत मुद्रा में था और किसी को भी नुकसान पहुंचाए बिना खुद ही वापस जंगलों की तरफ लौट गया था। इस घटना के बाद वन विभाग की मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखे सवाल भी खड़े हुए थे।चीतों की आबादी बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
अब सीसीबी-2 के गांधी सागर पहुंचने से वहां पहले से मौजूद चीतों के साथ मिलकर एक मजबूत कुनबा तैयार होगा। इस प्रक्रिया के बाद गांधी सागर सैंक्चुरी में कुल 2 नर और 2 मादा चीते हो जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्रों में चीतों को बसाने से भारत में दीर्घकालिक ‘चीता मेटापॉपुलेशन’ विकसित करने में बहुत मदद मिलेगी। केंद्र सरकार के ऑफिशियल प्रोजेक्ट फ्रेमवर्क के तहत कूनो और गांधी सागर के इस विशाल भौगोलिक परिदृश्य में आने वाले समय में 60 से 70 चीतों को सफलतापूपर्वक बसाने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया गया है।मादा चीता CCB2 को अब कूनो नेशनल पार्क से गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी भेजा जा रहा है।
सीएम डॉ. मोहन यादव खुद इस मादा चीता को गांधी सागर के खुले जंगलों में छोड़ेंगे।
इस शिफ्टिंग के बाद गांधी सागर में कुल 2 नर और 2 मादा चीते हो जाएंगे, जिससे चीता मेटापॉपुलेशन को बढ़ावा मिलेगा।
यह चीता लगभग 7,800 किलोमीटर का अंतरमहाद्वीपीय सफर तय करके बोत्सवाना से भारत आई थी।
केंद्र सरकार के फ्रेमवर्क के अनुसार कूनो-गांधी सागर परिदृश्य में 60-70 चीतों का दीर्घकालिक आवास विकसित करना है।










































