ढोल ताशा और जय घोष के साथ मूर्ति का हुआ विसर्जन
पद्मेश न्यूज। वारासिवनी। १४ सितंबर से प्रारंभ हुआ १० दिवसीय गणेश उत्सव का समापन २५ सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ हो गया। इस वर्ष क्षेत्र के तीन थाना अंतर्गत सार्वजनिक गणेश उत्सव समितियां के द्वारा जगह.जगह भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर १० दिवस पूरे भक्ति भाव के साथ पूजा अर्चना की गई। जिसमें अंतिम दिन गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ जैसे जयकारों के साथ विसर्जन के लिए शोभायात्रा निकाली गई। इस शोभा यात्रा का समापन नदी नालो नहर तालाबों पर किया गया । इस दौरान पुलिस प्रशासन के द्वारा जगह जगह पुख्ता बंदोबस्त तैनात रखा गया। इस वर्ष तिथि के अनुसार गणेश उत्सव ११ दिन का मनाया गया जिसमें २५ सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन सर्वाधिक गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
इन स्थानों पर हुआ विसर्जन
गणपत्ती बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ के गुंजायमान उद्घोष के साथ २५ सितंबर को भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। हालांकि सुबह से ही नहर में मेले जैसा माहौल दिखाई दिया। नगर के वार्ड नं.३ बड़ी नहर, लाल किवाड़ी, हिमाचल नगर वार्ड क्रमांक १ एवं रामपायली रोड़ स्थित नहर ,चन्दन नदी ,शंकर तालाब के साथी ग्रामीण क्षेत्रों में विभिन्न तालाबों एवं नालो सहित अन्य स्थानों पर भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाओं के विसर्जन का दौर प्रारंभ रहा।
पुलिस व्यवस्था रही चाक चौबंद
गौरतलब है कि नगर के भीतरी सीमा से होकर निकली बड़ी नहर पर वहीं शंकर तालाब एवं नगर के किनारे से गुजरने वाली चंदन नदी में प्रतिवर्ष गणेश विसर्जन का कार्य किया जाता है। जिसकी वजह से नहर में पुलिस की चाक चौबंदी के साथ ही नपा द्वारा लाईट व्यवस्था बनाई जाती है। इस मर्तबा भी दोनों ही व्यवस्था ठीक रही। पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच नगर वासियों के द्वारा विसर्जन कार्य किया जाता रहा।
डीजे की धुन पर झूमे भक्त
दस दिवसीय गणेशोत्सव पर्व का समापन भगवान श्री गणेश की प्रतिमा विसर्जन के साथ ही समारोह पूर्वक हुआ। हालांकि इस विसर्जन कार्य में दिन भर की बारिश ने जरूर लोगों को हलाकान किया लेकिन भक्तों ने डीजे की धुन पर थिरक कर भगवान श्रीगणेश का विसर्जन बड़े ही उत्साह के साथ किया। नगर के विभिन्न मार्गों पर ढोल नगाड़ों सहित डीजे की आवाज सुनाई देती रही जिसमें भगवान गणेश के भक्ति गीत बजाते रहे।
देर रात्री तक चला विसर्जन
प्रतिमा विसर्जन का सिलसिला सुबह से शुरू हुआ जो देर रात्री तक जारी रहा। आज भी कुछ सार्वजनिक पण्डाल में विराजे गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होने की बात कहीं जा रही है। इन सार्वजनिक पंडालों ने अपनी अलग ही रणनिति विसर्जन को लेकर बनाई है। नगर के सार्वजनिक पंडालों के द्वारा शोभायात्रा के रूप में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जायेगा। यह शोभायात्रा सर्वप्रथम सार्वजनिक पंडालों एवं घरों से निकलकर नगर के चौक चौराहों का भ्रमण करेगी और उसके बाद बड़ी नहर के तट पर पहुॅचेगी जहां प्रतिमाओं का विसर्जन विधि विधान से किया जायेगा।
हवन पूजन व भंडारे का हुआ आयोजन
वहीं विसर्जन के एक दिन पूर्व पण्डालों में हवन पूजन के साथ ही विशाल भण्डारे का आयोजन हुआ है। जिसमें नगर ही नही आसपास के ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और पुण्य लाभ अर्जित किया। हालांकि कुछ पंडालों में हवन पूजन का कार्य व भंडारे का आयोजन २४ सितंबर को किया ताकि भंडारे के बाद भगवान श्रीगणेश की छोटी पूजा मूर्ति का विसर्जन किया जा सके।
धूमधाम से मनाया जाता है गणेशोत्सव
गौरतलब है कि हमारा जिला महाराष्ट्र राज्य की सीमा से सटे होने के कारण श्री गणेश का दस दिवसीय पर्व धूमधाम से मनाये जाने का रिवाज प्रजलित है। जहां एक और श्रृध्दालुभक्त अपने अपने घरों में भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित कर पूजन अर्चन करते है ,वहीं सार्वजनिक पण्डालों में भी भगवान श्री गणेश की स्थापना होती है। सार्वजनिक रूप से रखे जाने वाले भगवान श्री गणेश के पण्डालों में आराधना के साथ भक्तिपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है। इस मर्तबा भी नगर के सार्वजनिक पंडालों में विभिन्न प्रकार के भक्तिपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।









































