Jhabua News: झाबुआ में दशहरा के दिन तीनों बच्चों के शव एक कुएं में मिला था। घटना के दो दिन बाद उनके परिजनों ने आशंका व्यक्त की है कि बच्चों की बलि दी गई है। उनके जीभ और होंठों पर चोट के निशान हैं। हालांकि प्रशासन ने इन बातों को खारिज कर दिया है।झाबुआ : मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले स्थित चुई गांव में एक खुले कुएं तीन बच्चों के शव मिले थे। इसके दो दिन बाद उनके परिजनों ने शक जताया है कि दशहरा के मौके पर बच्चों को बलि दी गई हो सकती है। उन्होंने बच्चों की जीभ और होंठों पर चोट के निशान होने का हवाला दिया है। हालांकि इस दावे की पुष्टि नहीं हुई है।कुएं में रहने वाले जीव से आ सकती है चोट
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर का कहना है कि ये चोटें कुएं में मौजूद किसी मछली या पानी में रहने वाले किसी अन्य जीव की वजह से आई हो सकती हैं। कुएं को खाली भी किया जा रहा था ताकि उसके अंदर की चीजों की जांच की जा सके और यह पता लगाया जा सके कि वहां कोई मछली या पानी का अन्य जीव मौजूद है या नहीं।
तीन बच्चे हो गए थे लापता
दरअसल, 9-10 साल की उम्र के ये बच्चे- विवेक, मयंक और विजय हैं। तीनों दशहरा को दोपहर करीब तीन बजे लापता हो गए थे। शाम तक ये लोग घर नहीं लौटे तो उनके परिवारों ने उन्हें खोजना शुरू कर दिया।खेतों के पास मिली इनकी साइकिलें
बाद में खेतों के पास इनकी साइकिलें मिलीं, जिसके बाद ग्रामीणों ने आसापस के तीन कुओं की तलाशी ली। आखिरकार एक गहरे कुएं से तीनों बच्चों के शव बरामद हुए।
बच्चों की जीभ, कान और होंठों पर चोटें थीं। हमें शक है कि शायद किसी नरबलि की रस्म के तहत उनकी हत्या की गई है। इस में मामले में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बच्चों के रिश्तेदार
साइकल चलाते हुए गिरे
वहीं, झाबुआ एसपी देवेंद्र पाटीदार ने बताया कि बच्चे साइकिल चला रहे थे और जिस कुएं में शव मिले हैं, वह एक ढलान पर स्थित है। हो सकता है कि उनका संतुलन बिगड़ गया हो और वे कुएं में गिर गए हों। चूंकि शव कई घटों तक कुएं के अंदर रहे, इसलिए पानी में रहने वाले जीवों ने उनके होंठों और जीभ को काट लिया होगा। ये सभी चोटें मौत के बाद आई हैं। पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट रूप से डूबना बताया गया है। मामला दर्ज कर लिया गया है और हम आगे की जांच कर रहे हैं।डॉक्टरों की टीम ने किया पोस्टमार्टम
सीएचसी राणापुर के मेडिकल ऑफिसर डॉ राजेश बारिया जो कि पोस्टमार्टम करने वाली टीम में शामिल थे। उन्होंने बताया कि मौत का संभावित कारण डूबना ही पाया गया है। बरिया ने कहा कि होठों और जीभ पर लगी चोटें पानी में मौजूद किसी मछली या अन्य जलीय जीव की वजह से हो सकती है। ये चोटें मौतें के बाद की हैं।
उन्होंने कहा कि विसरा को सुरक्षित रख लिया गया है और जांच के लिए भेज दिया गया है। फोरेंसिक और मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचा जा सकेगा। शरीर के किसी अन्य हिस्से पर कोई और चोट नहीं मिली है।कुएं में जीवों की मौजूदगी की भी जांच
अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या पानी में कोई मछली या अन्य जलीय जीव मौजूद थे, जिनकी वजह से शवों पर ये चोटें आई हो सकती हैं। जांच के दौरान इकट्ठा किए गए फोरेंसिक सैंपल और अन्य चीजें फोरेंसिक साइंस लैब भेजी जाएंगी।
दो बच्चे माता-पिता के इकलौते बेटे
ये तीनों बच्चे दो परिवारों से थे। विजय और मयंक अपने-अपने माता-पिता के इकलौते बेटे थे। इन मौतों से परिवार पूरी तरह से टूट गया है। जिस जगह पर बच्चों की साइकिलें मिली थीं, वहां तीन खुले कुएं थे, जिनमें से एक में वे गिरे। इनमें से किसी भी कुएं के चारों ओर सुरक्षा के लिए कोई दीवार नहीं बनी थी। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि आखिर किन हालात में बच्चे कुएं में गिर गए। झाबुआ जिला प्रशासन की ओर से हर परिवार को 4-4 लाख रुपए की सहायता राशि देने की मंजूरी दी गई है।










































