लालबर्रा : ‘कृषि संकाय’ के बिना विद्यार्थियों के लिये औचित्यहीन है ‘कृषि महाविद्यालय’

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 ‘कृषि प्रधान बालाघाट जिले में विगत वर्षों से मुरझड़(वारासिवनी) में ‘कृषि महाविद्यालय’ संचालित है परंतु यह बालाघाट विधानसभा क्षेत्रांतर्गत लालबर्रा ब्लाक के विद्यार्थियों के लिए विडम्बना है कि ब्लाक के शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में कृषि संकाय उपलब्ध नही है, अब जब तक विद्यार्थी कृषि संकाय से बारहवीं उत्तीर्ण नही होंगे तब तक उन्हे कृषि संबंधी बेसिक नॉलेज नही होगा एवं वे ‘पीएटी यानि प्री एग्रीकल्चर टेस्ट’ में सम्मिलित होकर कृषि महाविद्यालय में प्रवेश हेतु चयनित ही नही हो पायेंगे, मतलब साफ है बिना कृषि संकाय खोले क्षेत्रवासियों के लिये जिले में ‘कृषि महाविद्यालय’ का होना औचित्यहीन साबित हो रहा है’- ब्लाक अंतर्गत स्थित शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में कक्षा ग्यारहवीं व बारहवीं में अध्ययन हेतु ‘कृषि संकाय’ उपलब्ध ना होने के कारण क्षेत्रीय विद्यार्थियों को कृषि महाविद्यालय का लाभ नही मिल पा रहा है वहीं दूसरी ओर ‘कृषि संकाय’ ना होने के कारण अधिकांश विद्यार्थी ‘कला संकाय’ लेकर अध्ययन करने के लिये मजबूर है। विदित हो कि ब्लाक की अधिकांश आबादी ‘कृषि’ कार्य पर आश्रित है, ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती होने के कारण दसवीं उत्तीर्ण होने के  बाद अधिकांश पालक यह चाहते है कि उनके पुत्र-पुत्रियां कृषि संकाय से पढ़ाई कर खेती को लाभ का धंधा बनाने में उनकी मदद करें परंतु किसानों का यह ख्वाब सिर्फ ‘कृषि संकाय’ मौजूद ना होने के कारण अधूरा ही रह जाता है। किसानों का मानना है कि यदि क्षेत्रांतर्गत स्थित शालाओं में कृषि संकाय प्रारंभ करवा दिया जाये तो ‘कला संकाय’ की अपेक्षा विद्यार्थी ‘कृषि संकाय’ लेकर आगे की पढ़ाई करना उचित समझेंगे इसके अलावा आने वाली पीढ़ी को खेती संबंधी बेसिक नॉलेज एवं आधुनिक  पध्दतियों की सारी जानकारियां पढ़ाई के दौरान मिल जायेगी जिससे घरेलु खेती में हो रही परेशानियों का हल निकाल पाना मुश्किल नही होगा। क्षेत्रीय बुध्दिजीवी नागरिकों व कृषकों ने क्षेत्रीय विधायक गौरीशंकर बिसेन, सांसद डॉ.ढालसिंह बिसेन व समस्त जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि वे इसी सत्र से ब्लाक अंतर्गत स्थित हायर सेकेंडरी शालाओं में ‘कृषि संकाय’ खुलवाये जाने का प्रयास कर एक यादगार सौगात प्रदान करें।

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सिर्फ लेंडेझरी व कनकी में है कृषि संकाय

पद्मेश के द्वारा जुटाये गये आंकड़ों के अनुसार लालबर्रा ब्लाक में कुल २१ हायर सेकेंडरी शालाएं स्थित है जिसमें शासकीय उत्कृष्ट उमावि लालबर्रा, शासकीय कन्या उमावि अमोली, शासकीय उमावि बघोली, शासकीय उमावि नगपुरा, शासकीय उमावि बल्हारपुर, शासकीय उमावि ददिया, शासकीय उमावि घोटी, शासकीय उमावि टेंगनीकला, शासकीय उमावि नेवरगांव(ला), शासकीय उमावि कंजई, शासकीय उमावि जाम, शासकीय उमावि खमरिया, शासकीय उमावि नेवरगांव(वा), शासकीय उमावि बडग़ांव, शासकीय उमावि कटंगझरी, शासकीय उमावि टेकाड़ी(लो), शासकीय उमावि कनकी, शासकीय उमावि लेंडेझरी, शासकीय उमावि गर्रा, शासकीय उमावि बिरसोला व शासकीय उमावि मोहगांव(ध) शामिल है जिसमें से सिर्फ पूर्व केबिनेट मंत्री गौरीशंकर बिसेन के गृहग्राम लेंडेझरी एवं कनकी स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल में कृषि संकाय उपलब्ध है जबकि शेष शालाओं में सिर्फ कला व विज्ञान संकाय ही मौजूद है।
आसान विषय होने के साथ साथ संभावनाएं है बहुत

विषय विशेषज्ञों की मानें तो अन्य संकायों की अपेक्षा ‘कृषि संकाय’ काफी आसान विषय होता है जिसमें भविष्य में आगे बढऩे की ढेरों संभावनाएं है। कृषि संकाय से अध्ययन करने वाले विद्यार्थी बारहवीं के पश्चात ‘पीएटी’ की परीक्षा में सम्मिलित होकर बीएससी कृषि, बीएससी उद्यानिकी व बीएससी वानिकी का कोर्स कर सकते है जिसके बाद कृषि विभाग से जुड़े विभिन्न पदों पर नियुक्ति होने या अनुसंधान केंद्रों में पदस्थापना होने की संभावनाएं बनती है इसके अलावा यदि विद्यार्थी चाहें तो कृषि उपकरणों या खाद-बीज से जुड़े व्यवसाय प्रारंभ कर सकते है।
चार स्कूलों में खोला गया था ‘कामर्स’ संकाय, नही हुए एडमिशन

हम आपको बता देें कि वर्ष २०१८ में ब्लाक अंतर्गत स्थित चार शासकीय उज्चतर माध्यमिक शालाओं में ‘कामर्स’ संकाय की सौगात दी गई थी एवं बड़े जोर-शोर से इसका प्रचार प्रसार किया गया था परंतु क्षेत्रीय विद्यार्थियों ने ‘कृषि’ संकाय खोले जाने की मांग रखी एवं किसी भी विद्यार्थी ने कामर्स संकाय में प्रवेश नही लिया जिसके कारण चारों विद्यालयों में कामर्स संकाय भी बंद हो चुका है।

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