नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा वारासिवनी अंतर्गत ग्राम रेंगाटोला में अधिग्रहण की गई जमीन के किसानों के दस्तावेज सत्यापन किए जाने के लिए कैंप का आयोजन किया गया। इस दौरान किसानों के द्वारा उपस्थित होकर एनएचएआई पर मुआवजे को लेकर विस्तृत जानकारी दिए जाने की मांग की गई। जहां पर उक्त जानकारी उपलब्ध कराने में उपस्थित अधिकारी कर्मचारी असक्षम नजर आए और टालमटोल करते रहे। जिस पर किसानों का आक्रोश सातवें आसमान पर देखा गया जिन्होंने अधिकारियों के साथ बहुत देर तक तेज आवाज मैं सवाल जवाब करते रहे। जिनके बीच असमंजस की स्थिति बनी रही इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी अधिकारी के द्वारा विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई जिसके बाद किसानों के द्वारा दस्तावेज उपलब्ध कराने से मना कर दिया गया। वही दिल्ली और हरियाणा के अनुसार ही बालाघाट में भी मुआवजा दिए जाने की मांग की गई।
30 ग्रामों से गुजरेगा यहां राष्ट्रीय राजमार्ग 543
यहां यह बताना लाजमी है कि बालाघाट से गोंदिया राष्ट्रीय राजमार्ग 543 पांच विकासखंड के करीब 30 गांव के मध्य से निकलेगा जो लालबर्रा विकासखंड के लबादा, लेंडझरी, गर्रा, मंझापुर, डोंगरिया से वारासिवनी विकासखंड के ग्राम राजेगांव एकोड़ी, रेंगाटोला, जागपुर से होते हुए बालाघाट के ग्राम भमोडी, गोंगलाई, खुरसोड़ी, कन्हड़गाव, पेंडराई के बाद किरनापुर के मुख्य मार्ग स्थित ग्राम चिखला, खारा, राजेगांव, नेवरगांवकला, मंगोलीकला, दीघोधा, मरी, सालेटेका व अन्य 1 गांव को पार कर गोंदिया महाराष्ट्र के ग्राम कोरनी, चंगेरा, रावनवाड़ी, राजेगांव व अन्य 3 ग्राम से होता हुआ गोंदिया पहुंचेगा। उक्त ग्रामों में लगभग भूमि अधिग्रहण कार्य संपन्न हो चुका है।
एक सप्ताह के भीतर सभी को दिया जाना है मुआवजा
उक्त नवीन राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए भारत सरकार नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा आवश्यक भूमि का अधिग्रहण कर स्थान चिन्हित कर लिया गया है। जिसमें अब संबंधित ब्लॉक मैं कैम्प का आयोजन कर दस्तावेज एकत्रित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में एनएचएआई परियोजना निदेशक छिंदवाड़ा संजीव शर्मा के द्वारा टीम गठित कर बालाघाट भेजी गई। जिनके द्वारा रेंगाटोला में कैम्प आयोजित किया गया है। जहाँ पर लालबर्रा और वारासिवनी का भुगतान आ गया है ऐसे में संबंधित किसानों से दस्तावेज लेकर अग्रिम कार्यवाही किए जाने का कार्य किया जा रहा है। जहां पर इस दौरान किसानों का आक्रोश देखने मिला। इसमें बताया जा रहा है कि जल्द ही किरनापुर बालाघाट के किसानों के लिए भी कैंप का आयोजन किया जाएगा वही गोंदिया के किसानों का कार्य प्रक्रिया में है। यह समस्त कार्य आगामी एक सप्ताह के अंदर संपन्न किए जाने की बात अधिकारी के द्वारा कही जा रही है।
कृषक शिवकुमार नगपुरे ने पदमेंश से चर्चा में बताया कि हम लोगों को बुलाया गया था की जमीन अधिग्रहण हो रही है हाईवे वाली जिसके लिए खाता नंबर मांगने बुलाए थे। जहां पर अधिकारियों से अपनी जमीन के मुआवजे और रेट के संबंध में पूछा गया तो इनके द्वारा कुछ बताया नहीं जा रहा है केवल किसानों को गुमराह कर रहे हैं। पहले इनके द्वारा अलग सर्वे किया गया था फिर दूसरा सर्वे किया गया जिसमें कहीं से मार्ग की स्थिति को हटा दिया गया और कहीं पर यथावत रखा गया है। श्री नगपुरे ने बताया कि किसानों को रेट नहीं बता रहे हैं जो किसानों की रोजी-रोटी छीन रहे हैं दिल्ली में 4 करोड रुपए दे रहे हैं और यहां पर उसी रोड का एक से डेढ़ लाख रुपए दे रहे हैं ऐसा पता चला है। स्पष्ट कुछ नहीं है और कई किसान ऐसे हैं जिनके पास इसके बाद जमीन भी नहीं है हम चाहते हैं कि जिस किसान की भूमि अधिग्रहण की जा रही है उसके परिवार में एक नौकरी और 4 करोड रुपए के हिसाब से मुआवजा दें अन्यथा रोड नहीं बनेगी किसान तैयार है जरूरत पड़ने पर आंदोलन करेंगे।
कृषक गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि पता लगा कि रेंगाटोला व जागपुर के किसानों को नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के द्वारा रेंगाटोला बुलाया गया है यहां पर एनएचएआई के लोग किसान के खाते ले रहे हैं। जिसके लिए उनसे पूछा गया तो अधिकारियों ने बताया कि जो जमीन अधिग्रहण की गई है उसकी एवज में पैसा देना है इसलिए दस्तावेज लिए जा रहे हैं। जिनसे यही पूछना है कि किसके कहने पर यह अधिग्रहण हुआ है, और जब अधिग्रहण के दौरान पत्थर लगाए गए तो क्या किसानों को बुलाया गया था, जो अधिसूचना जारी की गई है उसमें कुछ किसानों का नाम है तो कुछ कहा भी नहीं। श्री श्रीवास्तव ने बताया कि यह जो प्रोजेक्ट नेशनल हाईवे 543 है यह दिल्ली से आया है तो दिल्ली में करोड़ों का मुआवजा और बालाघाट के किसानों को 1 से 2 लाख देकर भेदभाव किया जा रहा है। एनएचएआई ने कहा था कि गूगल मैप से निर्धारण किया गया इसमें परिवर्तन नहीं होगा परंतु फिर भी परिवर्तन किया गया। जिसमें नेताओं से संबंध रखने वाले किसानों की जमीन बचा दी गई और सामान्य किसानों की जमीन है ले ली गई है मां मौसी का किया गया है। हम सभी किसान इस सर्वे का विरोध करते हैं और दिल्ली हरियाणा की तरह रेट दिए जाने की मांग करते हैं।
राजस्व निरीक्षक एनएचएआई एसडी धारपुरे ने बताया कि अधिग्रहण भूमि के किसानों को मुआवजा वितरण करने के पहले खाता संख्या व अन्य दस्तावेज मिलान करना है जिसके लिए दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। मुआवजे की राशि के लिए शासन की नियमावली बनाई गई है जिसमें निर्धारित मापदंड है और इसके लिए नोटिस दिए हैं। खसरा नंबर पर उन्हें सूचना देंगे किसान नाखुश नहीं है उन्होंने अपनी बात रखी है इन्हें मुआवजा आरटीजीएस के तहत वितरण होगा।










































