सुवेंदु अधिकारी के पीए हत्याकांड की जांच में नया मोड़, बलिया में मुख्य आरोपी ने किया सरेंडर

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Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता Suvendu Adhikari के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। इस मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल ज्ञानेन्द्र सिंह मोनू ने उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। उनके आत्मसमर्पण के बाद जांच एजेंसियों को मामले में कई महत्वपूर्ण सुराग मिलने की उम्मीद है।

चंद्रनाथ रथ की 6 मई 2026 को पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बताया गया था कि बाइक सवार हमलावरों ने दिन-दहाड़े उनकी कार को रोककर उन पर गोलियां चलाई थीं। इस घटना के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर काफी हलचल मच गई थी।

जांच के दौरान सामने आया कि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों का संबंध उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से हो सकता है। आरोप है कि ज्ञानेन्द्र सिंह मोनू ने हथियारों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में भूमिका निभाई थी। इसी आधार पर केंद्रीय जांच एजेंसी लगातार उनकी तलाश कर रही थी।लंबे समय से था फरार

मोनू के सरेंडर के बाद उनकी पत्नी महिमा सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया कि सीबीआई कई बार उनके घर पहुंची थी। अधिकारियों ने परिवार से पूछताछ की, सीसीटीवी फुटेज जुटाए और मोनू को जांच के सामने पेश करने को कहा था। लंबे समय तक फरार रहने के बाद आखिरकार मोनू ने खुद कानून के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जांच एजेंसियों ने पहले भी इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान कुछ हथियार भी बरामद किए गए, जिनके बारे में संदेह है कि उनका इस्तेमाल इसी हत्याकांड में हुआ था।

यह सिर्फ हत्या का मामला नहीं

इसके अलावा एक कार भी बरामद की गई, जिसका संबंध इस पूरे मामले से जोड़ा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि यह केवल एक हत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा नेटवर्क हो सकता है। इसी वजह से जांच कई राज्यों तक फैलाई गई है। सीबीआई अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस साजिश में कौन-कौन लोग शामिल थे और इसकी योजना किस स्तर पर बनाई गई थी।

पूछताछ के आधार पर हो सकते हैं कई अहम खुलासे

ज्ञानेन्द्र सिंह मोनू के सरेंडर से जांच को नई दिशा मिली है। अब उनसे पूछताछ के आधार पर कई अहम खुलासे हो सकते हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी और दोषियों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। फिलहाल सभी की नजरें आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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