FIFA World Cup 2026: तीन साल पहले माता-पिता का हुआ था अपहरण, कोलंबिया की जीत का हीरो बना बेटा

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FIFA World Cup 2026: कोलंबिया ने उज्बेकिस्तान को फीफा वर्ल्ड कप 2026 में 3-1 से हराकर शानदार शुरुआत की। इस जीत के सबसे बड़े हीरो रहे लिवरपूल के स्टार लुई डियाज। डियाज ने मैच में एक गोल किया और एक गोल में असिस्ट भी दिया। लेकिन उनके लिए यह मैच सिर्फ तीन पॉइंट का नहीं था। यह उस सफर का अंत था जो दर्द, डर और इंतजार से भरा था। मैच खत्म होते ही डियाज सीधे दर्शक दीर्घा में बैठे अपने पिता लुई मैनुअल डियाज के पास पहुंचे। पिता-पुत्र की आंखें मिलीं और दोनों की आंखों में आंसू थे। यह आंसू खुशी के थे। एक ऐसा सपना पूरा हुआ था जिसके लिए दोनों ने सालों इंतजार किया था। डियाज ने मैच के बाद कहा, “आज मुझे अपना पूरा अतीत याद आ रहा है। मैंने इस पल के लिए बहुत मेहनत की है। बहुत संघर्ष के बाद मैं यहां तक पहुंचा हूं।” डियाज का इशारा उस दौर की तरफ था जब कोलंबिया 2022 वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई भी नहीं कर पाया था और उसके तुरंत बाद उनकी जिंदगी में भूचाल आ गया था।

जब 12 दिन तक किडनैप रहे पिता

अक्टूबर 2023 के आखिर में कोलंबिया-वेनेजुएला बॉर्डर पर एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। सशस्त्र गुरिल्ला ग्रुप ने लुई डियाज के माता-पिता, लुई मैनुअल डियाज और सिलेनिस मारूलांडा का अपहरण कर लिया। कुछ घंटों बाद मां सिलेनिस को छोड़ दिया गया, लेकिन पिता को बंधक बना लिया गया। उस समय डियाज लिवरपूल के लिए खेल रहे थे। खबर मिलते ही वह दो मैच छोड़कर कोलंबिया लौट आए। उन्होंने सरकार और सेना से पिता को छुड़ाने की अपील की। पूरा देश उनके साथ खड़ा हो गया। जब वह लिवरपूल वापस लौटे तो लूटन टाउन के खिलाफ मैच में गोल करने के बाद उन्होंने अपनी जर्सी उठाई। उसके नीचे वाली शर्ट पर स्पेनिश में लिखा था, “फ्रीडम फॉर पापा” यानी “पापा के लिए आजादी”। डियाज के इस कदम के बाद कोलंबिया सरकार पर दबाव बढ़ गया। सेना ने सर्च ऑपरेशन तेज किया। 12 दिन बाद गुरिल्ला ग्रुप ने लुई मैनुअल को रिहा कर दिया। पिता की वापसी पर डियाज फूट-फूटकर रोए थे।

बेटे के पहले वर्ल्ड कप मैच से पहले पिता की प्रार्थना

इस हफ्ते डियाज के पिता ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला। वीडियो में वह अपने बेटे के पहले वर्ल्ड कप मैच से पहले हाथ जोड़कर प्रार्थना कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि बेटा देश के लिए खेले और गोल करे। उज्बेकिस्तान के खिलाफ डियाज ने पिता की दुआ कबूल कर दी। 63वें मिनट में उन्होंने शानदार गोल दागा। फिर 78वें मिनट में जॉन डुरान के गोल में असिस्ट दिया। कोलंबिया 3-1 से जीत गया।डियाज की कहानी बताती है कि फुटबॉल सिर्फ खेल नहीं है। यह जज्बात है। तीन साल पहले जिस पिता को किडनैपर्स ने 12 दिन तक जंगल में रखा, आज वही पिता स्टेडियम में बैठकर बेटे को वर्ल्ड कप में गोल करते देख रहा था। यही फुटबॉल की खूबसूरती है। यही जिंदगी की जीत है।

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